वर्षों से गुफा में रहकर साधनारत आचार्य स्वामी भाष्कर ने दिया दर्शन

Published by : BALRAM Updated At : 14 Jan 2026 8:11 PM

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मधुपुर के गुफा के द्वार पर स्वामी भाष्कर आरण्य का किया दर्शन

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मधुपुर. शहर के बावन बीघा स्थित सांख्य योग साधना के लिए विश्व प्रसिद्ध कापिल मठ में मकर संक्रांति के अवसर पर आचार्य स्वामी भाष्कर आरण्य गुफा द्वार पर निकले और शिष्यों को दर्शन दिया. इस दौरान पूरा मठ ओम आदि विदुषे कपिलाय नमः के मंत्रोच्चारण से मठ गुंजायमान होता रहा. आचार्य स्वामी भाष्कर आरण्य के साथ सभी शिष्य और श्रद्धालु सामूहिक पाठ में शामिल हुए. स्वामी भाष्कर आरण्य ने शिष्यों और श्रद्धालुओं के द्वारा किए गए प्रश्नों का उत्तर देकर उनकी जिज्ञासा शांत किया. स्वामीजी ने सभी को नेक इंसान बनकर असहाय, गरीब, जरूरतमंदों की सहायता करने को कहा. बताते चले कि कापिल मठ के शिष्य मकर संक्रांति के अवसर पर आसपास के गांवों में जाकर जरूरतमंदों को कंबल और फल जैसी सहायता सामग्री वितरित करते हैं. बुधवार को शिष्यों ने सिरसिया, बघनाडीह आदि गांवों में जाकर मठ के शिष्यों ने फल और कंबल बांटा. यह पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश से जुड़ा है और मठ में योग व अहिंसा के संदेश को प्रचारित किया जाता है. इस दिन तिल, गुड़, वस्त्र और कंबल का दान करना शुभ माना जाता है और मठ इस परंपरा का पालन करता है. मठ के संबंध में बताया जाता है कि सांख्य योगाचार्य स्वामी हरिहरानंद आरण्य ने वर्ष 1926 में मधुपुर में इसकी स्थापना की थी. स्वामीजी बंगाल के जमींदार परिवार से थे. वे तपस्या द्वारा सिद्धि लाभ के लिए संयासी बने थे. ईश्वर के प्रति सत्यानुरोध से संतुष्टि न पाकर एक पुस्तकालय में ज्ञान अर्जन के लिए प्रयत्नशील रहे. ईश्वर प्राप्ति के लिए घर त्याग कर संयास ले लिया. वे अपने लक्ष्य की प्राप्ति के बाद आध्यात्मिक अभ्यास त्रिवेणी वाराणसी, हरिद्वार, ऋषिकेश समेत कुछ स्थानों में गये. अंत में झारखंड से मधुपुर में आकर मठ की स्थापना किया. सांख्य तत्व में लीन होकर कुछ बंगला और संस्कृत भाषा में पुस्तकों की रचना की, जो अत्योत्म, तार्किक और हृदयस्पर्शी है. स्वामीजी के व्यक्तित्व से प्रभावित होकर कुछ सत्यानुसंधानी लोगों ने अपने गुरु का स्थाई निवास के रूप में एक कृत्रिम गुफा का निर्माण कराया, जिसमें मात्र एक प्रवेश द्वार है. स्वामीजी गुफा में अंतिम क्षण बिताया. सन 1947 में स्वामीजी कपिल मठ में समाधि ले लिये. इसके बाद के दिनों में स्वामी धर्ममेघ आरण्य ने यहां चल रही साधना परंपरा को समृद्ध किये. स्वामी धर्ममेघ आरण्य की महासमाधि के बाद वर्तमान में सद्गुरु योगाचार्य स्वामी भाष्कर आरण्य परंपरा को अनवरत बनाए हुए है. सांख्य योग दर्शन पर कापिल मठ से करीब 50 पुस्तकें प्रकाशित हुई है. अंग्रेजी, हिंदी, बांग्ला, गुजराती, संस्कृत में ग्रंथ लिखे गये हैं, जिनमें से कुछ ग्रंथ दुनिया के 56 विश्वविद्यालयों के शोधार्थी विद्यार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र है. पुस्तकों की रॉयल्टी और भक्तों के सहयोग से मठ का संचालन होता आ रहा है. मौके पर स्वामी करुणा प्रकाश, चुन्नीलाल पटेल, दिनेश पटेल, सत्यब्रत मिश्रा, मुन्ना बथवाल, संदीप, मनोज पटेल, मिठु राय, स्वास्तिक पटेल, रुद्र पटेल, कुणाल मिश्रा, मयंक मिश्रा आदि मौजूद थे. हाइलार्ट्स : नेक इंसान बनकर जरूरतमंदों की सहायता करें : स्वामी भाष्कर मधुपुर के गुफा के द्वार पर स्वामी भाष्कर आरण्य का किया दर्शन

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