......यूं निकलती है कंघी से गाने की धुन, लोग हो जाते हैं मंत्रमुग्ध
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 06 May 2017 12:19 PM
देवघर : सुकून के दो पल की चाहत जब इंसान को होती है तब वह संगीत सुनना चाहता है. संगीत की इसी चाहत ने इंसानों से वाद्य यंत्रों का आविष्कार करवाया. इंसानी सभ्यता जब पनप रही थी, तो उन्हीं दिनों लोगों ने काम के बीच मनोरंजन की तरकीब ढूंढ निकाली. बैलों के गरदन में घंटी […]
देवघर : सुकून के दो पल की चाहत जब इंसान को होती है तब वह संगीत सुनना चाहता है. संगीत की इसी चाहत ने इंसानों से वाद्य यंत्रों का आविष्कार करवाया. इंसानी सभ्यता जब पनप रही थी, तो उन्हीं दिनों लोगों ने काम के बीच मनोरंजन की तरकीब ढूंढ निकाली. बैलों के गरदन में घंटी बांध दी ताकि मधुर ध्वनि उसके कानों तक पहुंचे और कठोर मेहनत के बीच भी मनोरंजन होता रहे.धीरे -धीरे कई वाद्ययंत्रों का आविष्कार हुआ.
इसी फेहरिस्त में शामिल हैं देवघर के धनंजय खवाड़े. धनंजय खवाड़े ने एक ऐसे वाद्ययंत्र का ईजाद कर दिया. जिसका इस्तेमाल आपके और हमारे घरों में बाल झाड़ने के लिए होता है लेकिन आज उनके कंघी से निकले धुन का लाखों लोग मुरीद है. अपने स्कूल के दिनों से ही खास तरह के धुन निकालने के लिए प्रसिद्ध है. धनंजय को कंघी धुन बजाने की प्रेरणा अपने मामाजी से आयी.
https://www.youtube.com/watch?v=6IWLKpbyhmo?list=RD6IWLKpbyhmo
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