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अतिक्रमण के कारण अदृश्य हुआ शिवगंगा

देवघर : श्रावणी मेला शुरू होने के साथ ही दबंगों के इशारे पर शिवगंगा इलाके में अस्थायी दुकान आदि के जरिये अतिक्रमण शुरू हो गया है. इस कारण बाबाधाम आने वाले कांवरियों को शिवगंगा सरोवर में संकल्प के साथ स्नान व पूजा आदि में काफी परेशानी हो रही है. मेला शुरू होने से एक सप्ताह […]

देवघर : श्रावणी मेला शुरू होने के साथ ही दबंगों के इशारे पर शिवगंगा इलाके में अस्थायी दुकान आदि के जरिये अतिक्रमण शुरू हो गया है. इस कारण बाबाधाम आने वाले कांवरियों को शिवगंगा सरोवर में संकल्प के साथ स्नान व पूजा आदि में काफी परेशानी हो रही है.

मेला शुरू होने से एक सप्ताह पहले प्रशासन व पुलिस पदाधिकारियों ने भारी लाव-लश्कर के साथ उक्त इलाके में अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाया था. इस दौरान एसडीअो व एसडीपीअो के नेतृत्व में दुकानों के शेड, प्लास्टिक, दुकान के बाहर लगे चौकियों व चूल्हों को तोड़ कर हटा दिया गया है. मगर इस अभियान का मेला शुरू होने के चार-पांच दिन के अंदर ही हवा निकल गयी है. पूरे शिवगंगा इलाके में फिलहाल पांव रखने की भी जगह नहीं बची है. इस कारण जहां बाहर से आने वाले श्रद्धालुअों को परेशानी हो रही है, वहीं बाबा मंदिर व शिवगंगा इलाके के समीप के मुहल्लों में रहने वाले स्थानीय लोगों को घर से निकलने से लेकर आवागमन करने में भारी फजीहत हो रही है. सूत्रों का कहना है यह सब इलाके में दबंगों के इशारे पर हो रहा है.

अतिक्रमण के पीछे छिप गया सूचना स्क्रीन
पर्यटन विभाग की अोर कांवरियों व श्रद्धालुअों को देवघर व आसपास के पर्यटक क्षेत्रों की जानकारी देने के लिए शिवगंगा इलाके में दो बड़े-बड़े स्क्रीन लगाये गये हैं. मगर अबैध अतिक्रमण के कारण पूरा इलाका ढंक सा गया है. इसके कारण श्रद्धालुअों को स्क्रीन से दी जाने वाली प्रशासनिक जानकारी भी लोगों को नहीं मिल पा रही है.
चार हजार रुपये स्क्वायर फीट की दर से दुकान !
सूत्रों से जानकारी के अनुसार, पूरे शिवगंगा इलाके में रंगदारों के इशारे पर चार हजार से लेकर पांच हजार रुपये स्क्वायर फीट की दर से दुकानें सज गयी है. पूरे इलाके में 400 से 500 छोटी बड़ी दुकानें उपरोक्त भाव में सजी हैं. जबकि खोमचा लेकर खिलौने आदि बेचने वालों को प्रत्येक दिन रंगदारों को 500 रुपये तक भुगतान करने पड़ते हैं. रोजगार के इरादे से आने वाले लोग चुपचाप दबंगों को रंगदारी भी दे रहे हैं. मगर प्रशासन की अोर से इस दिशा में अब तक किसी तरह की कोई पड़ताल या पहल नहीं हो सकी है. मोकामा से आकर दुकान लगाने वाले रमेश शर्मा ने बताया कि, दिनभर में आप कितने पैसे की बिक्री करते हैं, उससे कोई मतलब नहीं. शाम होते ही पैसे का भुगतान कर देना है. इसके अलावा निगम के कर्मचारी भी रसीद काटकर पैसा लेने पहुंचते हैं. कुलमिलाकर बद्धी – तागा से लेकर चूड़ी , बिंदी , खिलौना व छोटे – मोटे चाय दूकानदारों से लेकर आस – पास के बाध दूकानदारों को भी रंगदारी टैक्स चुकाने को बाध्य होना पड़ता है . अभी इस काम में एक साथ दो – दो गिरोह सक्रिय है . हालांकि दोनों ही गुट एक – दूसरे के कट्टर दुश्मन बताये जाते हैं . लोगों को आशंका है कि कभी भी आमने – सामने पड़ने पर दोनों गुट टकरा सकते हैं .

Prabhat Khabar Digital Desk
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