देवघर: बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करने के बाद बाबा फौजदारी बासुकीनाथ पर जलार्पण करने के लिए पैदल यात्र कर जाने वाले कांवरियों की असुविधा अब भी बरकरार है.
राज्य की पूर्ववर्ती सरकार ने पिछले वर्ष देवघर से बासुकीनाथ तक पैदल यात्र करने वाले कांवरियों की सुविधा के लिए कच्ची कांवरिया पथ निर्माण करने का फैसला लिया था. तत्कालीन पर्यटन मंत्री सुरेश पासवान की पहल पर देवघर-बासुकीनाथ पक्की रोड के किनारे 40 किलोमीटर कच्ची कांवरिया पथ निर्माण का निर्णय लिया गया था. पहले चरण में सरकार ने इसका प्रस्ताव पीडब्ल्यूडी को तैयार करने का निर्देश दिया. लेकिन पिछली सरकार जाते ही यह योजना धरी रह गयी. हालांकि बाद में मनरेगा से पैदल कांवरिया पथ निर्माण के लिए देवघर व दुमका डीसी ने जरमुंडी, मोहनपुर व सोनायठाढ़ी प्रखंडों के बीडीओ को निर्देश दिया था. 15 दिन पहले देवघर डीसी अमीत कुमार द्वारा देवघर-बासुकीनाथ मार्ग का निरीक्षण कर संबंधित प्रखंड के अंतर्गत मोहनपुर व सोनारायठाढ़ी बीडीओ को मनरेगा से मिट्टी मोरम कार्य चालू करने के लिए प्रस्ताव मांगा था.
दोनों प्रखंडों के बीडीओ द्वारा मनरेगा के तहत जिन-जिन पंचायतों में सड़क पड़ती थी, उन पंचायतों से अभिलेख व प्रस्ताव जिलास्तर पर भेज दिया. लेकिन इसकी स्वीकृति भी नहीं हुई व कार्य भी चालू नहीं हुआ.
पीडब्ल्यूडी ने भेजा कच्ची पथ का प्रस्ताव
श्रवणी मेला को देखते हुए पीडब्ल्यूडी द्वारा आनन-फानन में करीब 10 लाख का प्रस्ताव कुछ दिनों पहले विभाग के उच्चाधिकारियों के पास भेजा है. इस 10 लाख की राशि में सड़क किनारे मिट्टी व बालू बिछाने की योजना है. हालांकि विभाग से अब तक इसकी स्वीकृति नहीं मिल पायी है. इस परिस्थिति में श्रवणी मेला से पहले देवघर-बासुकीनाथ कांवरिया पथ बनेगी या नहीं, संशय बरकरार है.
पक्की सड़क पर दुर्घटना के शिकार होते हैं कांवरिये
देवघर-बासुकीनाथ पक्की सड़क स्टेट हाइ-वे से अब तब्दील होकर नेशनल हाइ-वे हो गयी है. इस चौड़ी पक्की सड़क के किनारे पर्याप्त जगह भी नहीं है कि कांवरिये पैदल या दंड देते हुए अपनी यात्र कर पाये. जो भी जगह है उस पर चलना तक कठिन है. ऐसी परिस्थिति में दंडयात्र तो संभव ही नहीं है. वर्तमान में कच्ची सड़क कहीं झाड़ियों में गुम है तो कहीं सड़क बिल्कुल उबड़-खाबड़ है. इस कारण कांवरिया व दंडयात्री को पक्की सड़क पर मजबूरी में चलना पड़ता है. पक्की सड़क पर कई बार कांवरिये दुर्घटना के शिकार होने से घायल हुए हैं तो दंड यात्रियों को जान तक गंवानी पड़ी है. रात में पक्की सड़क पर यात्रा खतरे से खाली नहीं है. तेज गति से चलने वाले वाहन अक्सर पैदल चलने वाले कांवरियों को अपने चपेट में ले सकती है.
