कॉटेज की चाहत में वकीलों की झोपड़ी भी गयी

Updated at : 02 Jan 2019 7:23 AM (IST)
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कॉटेज की चाहत में वकीलों की झोपड़ी भी गयी

देवघर : जिला अधिवक्ता संघ के दर्जनों वकीलों के लिए बड़े जोर-शोर से कॉटेज निर्माण की घोषणा तो कर दी गयी, पर शिलान्यास के बाद भी अबतक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है. कॉटेज की चाहत में दर्जनों अधिवक्ताओं ने स्वेच्छा से अपनी झोपड़ी हटा ली, लेकिन अब तक उन्हें खुले आसमान में बैठने […]

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देवघर : जिला अधिवक्ता संघ के दर्जनों वकीलों के लिए बड़े जोर-शोर से कॉटेज निर्माण की घोषणा तो कर दी गयी, पर शिलान्यास के बाद भी अबतक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है. कॉटेज की चाहत में दर्जनों अधिवक्ताओं ने स्वेच्छा से अपनी झोपड़ी हटा ली, लेकिन अब तक उन्हें खुले आसमान में बैठने की नौबत आ गयी है.
संघ के अध्यक्ष बालेश्वर प्रसाद सिंह व सांसद डाॅ निशिकांत दुबे की मंत्रणा से वकीलों के लिए कोर्ट परिसर में संघ भवन के सामने कॉटेज बनाने पर सहमति बनी. इसके बाद बहुत ही तामझाम से नारियल फोड़कर सांसद डाॅ निशिकांत दुबे ने कॉटेज निर्माण का शिलान्यास किया था.
शिलान्यास के बाद करीब एक महीने तक तो बारिश के कारण काम शुरू नहीं हो सका. सावन के समय काम आरंभ होने के बाद जमीन की स्वीकृति का मामला उठ गया. कॉटेज बनाने का काम दो चरणों में करना था. पहले चरण में 15 कॉटेज बनाने की बात सामने आयी. संवेदकों ने निर्माण कार्य में तेजी लाने की मंशा से ईंट, गिट्टी व बालू कोर्ट परिसर में गिराया.
इतना ही नहीं पिलर के लिए छड़ भी लाया गया व जल्दबाजी में एक पिलर का फाउंडेशन किया गया. काम आरंभ होने के बाद कई अधिवक्ताओं ने विरोध जताते हुए हाइकोर्ट रांची को फैक्स कर दिया व सिविल कोर्ट की जमीन पर निर्माण कार्य की शिकायत कर दी गयी. हाइकोर्ट के निर्देश पर कॉटेज का काम तत्काल स्थगित कर दिया गया है जो अब तक पुन: आरंभ नहीं हुआ है.
अब भी खुले आसमान के नीचे बैठ रहे वकील
कॉटेज बनने की आस में अब भी कई अधिवक्ता खुले आसमान में बैठने को मजबूर हैं. अधिवक्ता विश्वजीत, धनंजय राय आदि कुर्सी लगाकर अपनी जगह पर बैठते हैं व मुवक्किलों का काम काज करते हैं. इनका कहना है कि पहले तो झोपड़ी में काम कर रहे थे, कॉटेज की उम्मीद में इससे भी हाथ गंवा बैठे.
पुन: झोपड़ी बनायेंगे और कॉटेज बनाने के लिए जगह की स्वीकृति हो जायेगी, तो पुन: झोपड़ी हटाने की नौबत हो जायेगी. इसी प्रकार अधिवक्ता चंद्रशेखर प्रसाद सिंह, कादिर आदि ने भी अपनी झोपड़ी हटा कर दूसरे जगह बैठकी आरंभ कर दिये हैं, लेकिन कॉटेज नहीं बनने से चिंतित हैं.
75 लाख रुपये खर्च करने की है योजना
अधिवक्ताओं के लिए यह लाभकारी योजना बनी है. इसमें करीब 75 लाख रुपये खर्च किये जायेंगे. यह सांसद के निजी कोष से व अन्य विभागों के साथ सहयोग मद से बनाया जाना है. एक कॉटेज बनाने में पांच लाख रुपये से भी अधिक खर्च का प्राक्कलन था. निर्माण कार्य बाधित रहने से अधिवक्ताओं में तरह-तरह की चर्चा हर रोज होती रहती है. कुछ अधिवक्ता तो स्वत: झोपड़ी बना लिये हैं.
क्या कहते हैं संघ के अध्यक्ष
जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष बालेश्वर प्रसाद सिंह कहते हैं कि कॉटेज निर्माण की बाधा को खत्म करने के लिए हाइकोर्ट से संपर्क साधा जा रहा है. शीघ्र ही समाधान होने के आसार हैं. जिस काम की आधारशिला रखी गयी है, उसे धरातल पर उतारने का अथक प्रयास जारी है व अधिवक्ताओं के हितार्थ कार्य कराने का प्रयास होगा.
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