बबलू खवाड़े, शंकर जायसवाल समेत सात आरोपित हुए रिहा
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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गोरेलाल झा हत्याकांड. 15 साल बाद आया फैसला देवघर : बहुचर्चित गोरेलाल झा उर्फ अरुणानंद झा हत्याकांड में देवघर कोर्ट ने 15 साल बाद शनिवार को फैसला सुनाया है. इस हत्या के मामले में राज नारायण खवाड़े उर्फ बबलू खवाड़े, शंकर जायसवाल समेत सात आरोपितों को कोर्ट ने रिहा कर दिया है. अन्य आरोपित जो […]
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गोरेलाल झा हत्याकांड. 15 साल बाद आया फैसला
देवघर : बहुचर्चित गोरेलाल झा उर्फ अरुणानंद झा हत्याकांड में देवघर कोर्ट ने 15 साल बाद शनिवार को फैसला सुनाया है. इस हत्या के मामले में राज नारायण खवाड़े उर्फ बबलू खवाड़े, शंकर जायसवाल समेत सात आरोपितों को कोर्ट ने रिहा कर दिया है. अन्य आरोपित जो रिहा हुए हैं, उसमें मन्नू भारद्वाज, अमित सिंह, मामा जी, सुरेश मिश्रा व महादेव द्वारी के नाम शामिल हैं.
सेशन जज-3 की अदालत ने सुनाया फैसला : वर्ष 2012 में हुई इस हत्याकांड में देवघर कोर्ट के सेशन जज-3 की अदालत ने बबलू खवाड़े सहित सातों आरोपितों को संदेह का लाभ देते हुए रिहा कर दिया है.
बबलू खवाड़े, शंकर जायसवाल…
सेशन ट्रायल नंबर 109/2012 में दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद उक्त फैसला भरी अदालत में सुनाया गया. इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से नामित गवाहों ने घटना की पुष्टि नहीं की, जिसके चलते आरोपितों को संदेह का लाभ मिल गया. सभी आरोपितों पर गोली चलाकर गोरे लाल झा को गंभीर रूप से जख्मी करने का आरोप लगा था. इस घटना में स्व झा की मौत सदर अस्पताल में इलाज के दौरान हो गयी थी. इस मामले के सूचक गोरेलाल झा ही खुद थे. ज्ञात हो कि पंडित बीएन झा पथ पर 8 जुलाई 2002 को यह घटना घटी थी जिसमें उपरोक्त सातों के अलावा अन्य आठ-दस अज्ञात लोगों को आरोपित बनाया गया था.
क्या था यह मामला : शहर के चर्चित व्यक्ति गोरेलाल झा उर्फ अरुणानंद झा के उपर गोली चलाने की घटना हुई थी. इसमें करीब छह राउंड गोली चली थी जिसमें गोरेलाल झा गंभीर रुप जख्मी हो गये थे. बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया गया था जहां पर बयान दर्ज होने के बाद दम तोड़ दिया था. इस संबंध में नगर थाना में कांड संख्या 126/2002 दर्ज कर भादवि की धाराएं 147,148,149, 302, 307, 447 व 504 लगायी गयी थी. प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले का अनुसंधान किया व आरोप-पत्र दाखिल किया. इसके बाद इस मामले को ट्रायल के लिए सेशन कोर्ट भेजा गया जहां पर सेशन जज तीन विजय कुमार की अदालत द्वारा उपरोक्त फैसला दिया गया. सभी अारोपितों को रिहा करते हुए जमानतदारों को भी उनके दायित्व से मुक्त किया गया. दर्ज प्राथमिकी के अनुसार जमीन के वर्चस्व को लेकर झंझट हुआ था.
सभी को मिला संदेह का लाभ
सेशन जज तीन विजय कुमार की अदालत से 15 साल बाद अाया फैसला
08 जुलाई 2012 को पंडित बीएन झा पथ में घटी थी घटना
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