हाथी मारने के लिए ‘हंटर नवाब’ कब तक?

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झारखंड में वन विभाग की दक्षता पर उठा सवाल झारखंड के वन विभाग पर भारी पड़ा एक हाथी, लेना पड़ा हैदराबादी हंटर का सहारा झुंड से बिछड़ा हाथी हुआ था बेकाबू, मिलाने का नहीं हुअा प्रयास वन विभाग में नहीं है हंटर का पद बेहोश करके शिफ्टिंग तक में भी सफल नहीं हुआ विभाग देवघर […]

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झारखंड में वन विभाग की दक्षता पर उठा सवाल

झारखंड के वन विभाग पर भारी पड़ा एक हाथी, लेना पड़ा हैदराबादी हंटर का सहारा
झुंड से बिछड़ा हाथी हुआ था बेकाबू, मिलाने का नहीं हुअा प्रयास
वन विभाग में नहीं है हंटर का पद
बेहोश करके शिफ्टिंग तक में भी सफल नहीं हुआ विभाग
देवघर : झारखंड में वन विभाग के पास बहुत बड़ी फौज है. भारतीय वन सेवा के बड़े-बड़े और दक्ष अधिकारी हैं. लेकिन इन अधिकारियों का पसीना अपने झुंड से बिछड़े एक हाथी ने छुड़ा दिया. महीनों से इस हाथी को पकड़ने की मशक्कत वन विभाग के अधिकारी कर रहे थे, लेकिन इसे बेहोश कर शिफ्टिंग तक करने में सफल नहीं हो पाये. जंगलों में रहने वाला हाथी अपने झुंड से बिछड़ कर शहर या गांव की ओर आ गया और लोगों को मारने लगा. तब भी वन विभाग उक्त हाथी पर काबू पाने में विफल रहा है.
कहा गया कि अब इस हाथी को शूट करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है. साहेबगंज वन विभाग के अधिकारियों ने सरकार और अपने विभाग के आलाधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी. तब सरकार और विभाग को हाथी का शिकार करने के लिए हंटर नवाब का सहारा लेना पड़ा.
एक हाथी पर काबू पाने में सक्षम नहीं वन विभाग
सवाल यह है कि आखिर कब तक हाथियों को मारने के लिए हंटर नवाब का सहारा झारखंड सरकार लेगी. सरकार इन वन विभाग के अधिकारियों के स्किल डेवलपमेंट के लिए विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था क्यों नहीं कर पा रही है. झारखंड बने 17 साल हो गये. अब तक झारखंड का वन विभाग इतना भी दक्ष नहीं हो पाया है कि एक हाथी को काबू कर सके. ऐसे में यदि आदमखोर शेर भटक कर इन इलाकों में आ जाये तो लोगों का भगवान ही मालिक है. क्योंकि हाथी का शिकार नहीं कर पाने वाला वन विभाग भला शेर का शिकार कैसे कर पायेगा.
क्या है नियम
-वाइल्ड लाइफ में नियम है कि ऐसी स्थिति निर्मित हो तो हाथी को ट्रैंक्युलाइज करके दूसरी जगह शिफ्ट किया जाता है. अगर यह संभव न दिखे तो मारा भी जा सकता है. इसके लिए पीसीसीएफ (वाइल्ड लाइफ) का आदेश जरूरी होता है.
वन विभाग के पास नहीं हैं हंटर
इस पूरे अॉपरेशन पर झारखंड सरकार का लाखों रुपया खर्च हुआ. उत्पाती हाथी को मारना जरूरी था क्योंकि वह अब तक 11 जानें ले चुका था. लेकिन हाथी को मारने के लिए वन विभाग के पास हंटर नहीं है. विभागीय जानकारी के अनुसार, हंटर का कोई पद ही नहीं है. ऐसे में बाहरी रजिस्टर्ड शिकारी का ही सहारा विभाग को लेना पड़ रहा है.
वाहन क्षतिग्रस्त एक घायल
साहिबगंज : साहिबगंज से तालझारी के पहाड़ पर जा रहे साहिबगंज वन प्रमंडल के चार पहिये वाहन डब्लूबी65 बी 5571 मदनशाही के समीप हाइवा के चपेट में आ गया. जिससे वाहन क्षतिग्रस्त हो गया. जिसमें एक व्यक्ति घायल हो गया. उसका अस्पताल में इलाज किया गया. जबकि हाइवा भागने में सफल रहा.
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