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डिजिटल इंडिया का सपना अधूरा, 45 करोड़ खर्च करने के बाद भी देवघर की 190 पंचायतों तक नहीं पहुंचा इंटरनेट

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
बीबीएनएल ने सभी 191 पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर बिछाने का काम पावर ग्रिड लिमिटेड कंपनी को दिया था
बीबीएनएल ने सभी 191 पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर बिछाने का काम पावर ग्रिड लिमिटेड कंपनी को दिया था
symbolic file photo

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से डिजिटल इंडिया के तहत 2017 में हर पंचायत में भारत नेट सेवा शुरू करने की योजना देवघर में फ्लॅाप साबित हो रही है. ग्राम पंचायत सचिवालय व प्रज्ञा केंद्रों में हाई स्पीड इंटरनेट की सुविधा देकर महत्वपूर्ण योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में रहनेवालों तक पहुंचाने का सपना पूरा नहीं हो सका है.

देवघर की 191 पंचायतों में 45 करोड़ की लागत से शुरू की गयी यह योजना इंटरनेट की सुविधा नहीं मिलने के कारण बेकार साबित हो रही है. योजना के तहत सभी जगह भारत ब्रॉडबेंड नेटवर्क लिमिटेड (बीबीएनएल) ने ऑप्टिकल फाइबर बिछाये थे. पर केवल एक पंचायत को छोड़कर 190 पंचायत में नियमित नेटवर्क नहीं मिलने के कारण भारत नेट सेवा बंद है.

इन पंचायतों में लगाये गये बीबीएनएल बॉक्स व मशीनें समेत अन्य उपकरण व सोलर आदि धीरे-धीरे बर्बाद हो रहे हैं. जिले में एकमात्र मोहनपुर प्रखंड की चितकाठ पंचायत में भारत नेट सेवा चालू है. इस पंचायत में संचालित प्रज्ञा केंद्र व सीएससी के माध्यम से ग्रामीणों को कई सेवाओं का लाभ मिल रहा है.

तीन पंचायत में एक कंप्यूटर ऑपरेटर की नियुक्ति : सरकार ने प्रत्येक तीन पंचायत में एक कंप्यूटर ऑपरेटर की नियुक्ति की है. इन कंप्यूटर ऑपरेटर को सारा कार्य पंचायतों में ही निबटाना है. लेकिन बीबीएनएल सेवा बंद होने से कंप्यूटर ऑपरेटर Â बाकी 06 पर

डिजिटल इंडिया का सपना...

को शहर के साइबर कैफे में पंचायतों के लेखा-जोखा, ग्राम सभा की योजनाओं की इंट्री करानी पड़ रही है. इसके लिए साइबर कैफे में भारी भरकम राशि चुकानी पड़ रही है. इस अव्यवस्था से पंचायत सचिवालय में एक छत के नीचे सारी सुविधा मुहैया कराने की योजना पर ग्रहण लग गया है.

स्पीड 512 केबी तक निर्धारित : भारत नेट की स्पीड 512 केबी तक निर्धारित है. हाइ स्पीड नेट के जरिये गांव में वाइ फाइ चौपाल शुरू करने की केंद्र सरकार की योजना है. वाइ-फाइ का दायरा करीब एक किलोमीटर तक तय किया गया है. इस परिधि के भीतर विशेष छूट के साथ विद्यार्थियों के अलावा कोई भी सामान्य व्यक्ति इंटरनेट की सेवाएं पा सकेगा. वाइ-फाइ चौपाल के तहत पंचायतों में स्थापित सीएससी से एक किलोमीटर के दायरे में पड़ने वाले स्कूल, कॉलेज, अस्पताल व सरकारी दफ्तरों में एक वर्ष तक फ्री वाइ-फाइ सेवा देनी है.

छात्रों को पहले वर्ष नि:शुल्क व अगले कुछ वर्षों में निर्धारित शुल्क के साथ सेवा मिलनी है. लेकिन जब पंचायत मुख्यालय में ही भारत नेट की सेवा ठप पड़ी हुई है, तो गांव में वाइफाइ की सुविधा कैसे मिलेगी. देवघर में वाइ फाइ चौपाल की योजना भी फ्लॉप साबित हो रही है.

बीबीएनएल का कहना है कि सड़क निर्माण व बिजली खंभे गढ़ने के दौरान पंचायतों में बिछाये गये ऑप्टिकल फाइबर का कनेक्शन कट गया. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने नये सिरे से सभी पंचायतों में भारत नेट सुविधा चालू करने का जिम्मा कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) को 2019 में दिया. इसके बाद पूरे जिले में एकमात्र मोहनपुर प्रखंड की नया चीतकाट पंचायत में ही भारत नेट सेवा शुरू हो पायी है.

सांसद ने एफआइआर दर्ज करने का दिया है आदेश

20 अगस्त को दिशा कमेटी की बैठक में गोड्डा सांसद डॉ निशिकांत दुबे ने मामले को उठाया. भारत नेट सेवा का कार्य अधूरा छोड़ने वाली कंपनी पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था. सांसद ने बैठक में कहा है कि डीसी यह जांच करवा लें कि किस पंचायत में अब तक भारत नेट सेवा की सुविधा नहीं हो पायी है. संबंधित जिम्मेवार कंपनी पर एफआईआर दर्ज करायें.

posted by : sameer oraon

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