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टीएसपीसी उग्रवादियों ने मांझीपाड़ा गांव में ग्रामीणों के साथ की मारपीट

By Sameer Oraon
Updated Date
मंगलवार की रात दस बजे उग्रवादियों का दस्ता गांव पहुंचा और हवाई फायरिंग करते हुए गांव के पांच लोगों को उनके घरों से बाहर निकालकर मारपीट की
मंगलवार की रात दस बजे उग्रवादियों का दस्ता गांव पहुंचा और हवाई फायरिंग करते हुए गांव के पांच लोगों को उनके घरों से बाहर निकालकर मारपीट की
Prabhat Khabar

दीनबंधु

चतरा : मंगलवार की रात दस बजे उग्रवादियों का दस्ता गांव पहुंचा और हवाई फायरिंग करते हुए गांव के पांच लोगों को उनके घरों से बाहर निकालकर मारपीट की. सूत्रों का कहना है कि मारपीट एवं हवाई फायरिंग का कारण भूमि विवाद है. जिस भू-खंड को लेकर गांव के खैरवारों ने तीन दशक तक भाकपा माओवादीयों के साथ दो-दो हाथ किया था. उसी जमीन को लेकर टीएसपीसी ने मोर्चा खोल दिया है. हवाई फायरिंग कर उग्रवादी जंगल के रास्ते भाग निकले. उग्रवादियों की संख्या 25 थी.

इधर घटना की जानकारी मिलने के बाद सिमरिया के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बचनदेव कुजूर दल बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया. इसके बाद उग्रवादियों की धर पकड़ को लेकर छापेमारी शुरू कर दी गई है. थाना प्रभारी रामबृक्ष राम ने बताया कि टीएसपीसी उग्रवादियों की पिटाई से पांच लोग जख्मी हुए हैं. स्थानीय स्तर पर उनका उपचार कराया जा रहा है.

तीस वर्षों से है उग्रवादियों का खैरवार समुदायों से संघर्ष करते आ रहे हैं. बताते चले कि वर्ष 1990 के दशक में भाकपा माओवादी उग्रवादियों व माझीपाड़ा गांव के खैरवारों के बीच एक भू-खंड को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था. दोनों ओर से कई बार हिंसक झड़क हुई थी. जिसमें चार-पांच खैरवार समुदाय के लोगों के साथ-साथ कई उग्रवादी भी मारे गए थे.

बाद में स्थिति को देखते हुए वर्ष 1995 में तत्कालीन उपायुक्त रामवृक्ष महतो और पुलिस अधीक्षक विनय कुमार ने खैरवारों को मांझीपाड़ा गांव से विस्थापित करते हुए सदर थाना क्षेत्र के धमनिया गांव में शरणार्थी के रूप में स्थापित कर दिया था. लेकिन जैसे ही हालात सामान्य हुए वैसे ही सभी 17 खैरवार परिवार वापस गांव लौट गए.

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