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गांव में सड़क का अभाव, बिजली भी नहीं, स्थिति नारकीय

Updated at : 21 Oct 2025 7:14 PM (IST)
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गांव में सड़क का अभाव, बिजली भी नहीं, स्थिति नारकीय

प्रखंड के मड़वा गांव में गुरुवार को प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

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लावालौंग. प्रखंड के मड़वा गांव में गुरुवार को प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम का आयोजन किया गया. यहां ग्रामीणों ने अपने गांव की समस्याओं से अवगत कराया. कहा कि गांव में बिजली, सड़क व अन्य मूलभूत सुविधाएं नहीं है. मोबाइल नेटवर्क की सुविधा नहीं होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है. कोलकोले-बनवार पथ की जर्जर स्थिति के कारण लोगों को आवागमन में काफी परेशानी हो रही है. हल्की बारिश होने से भी सड़क पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जा रहा है. यहां पैदल भी चलना दूभर हो जाता है. सड़क के अभाव में लोगों का इलाज समय पर नहीं हो पाता है. कई बार ग्रामीणों को समय पर इलाज नहीं होने से जान भी गंवानी पड़ी है. दुर्गा पूजा के वक्त सांप के डंसने से बनवार के अनिल यादव के पुत्र व 15 दिन पूर्व भुषाड़ के एक बच्चे की मौत हो चुकी है. यहां बिजली तक की सुविधा नहीं है. ग्रामीणों ने कहा कि मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर विधानसभा व लोकसभा चुनाव में वोट बहिष्कार तक कर चुके हैं. पदाधिकारियों ने समस्या दूर करने का आश्वासन दिया. लेकिन आज तक कोई कार्य नहीं हो पाया. वर्जन::: गांव में सड़क के साथ-साथ नेटवर्क नहीं रहने से राशन उठाव करने में लोगों को दिक्कतें होती है. गांव में बिजली नहीं है. अंधेरे में रहने को ग्रामीण विवश हैं. कई बार बिजली व सड़क की मांग कर चुके हैं, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया. राजेश साव सड़क के अभाव में लोगो की जा रही हैं जान- संदीप सड़क के अभाव में लोग अस्पताल नहीं पहुंच पाते हैं. इस कारण कई लोग काल के गाल में समा चुके हैं. कोलकोले-बनवार पथ का निर्माण कई वर्षो से नहीं हुआ है. सड़क पर पैदल चलना दूभर है. बाईक सवार गिर कर घायल हो रहे हैं. संदीप कुमार इस आधुनिक युग में गांव तक बिजली नहीं है. आज भी लोगों को लालटेन व ढिबरी के सहारे रहना पड़ रहा है. बच्चे ढिबरी के सहारे पढ़ाई करते हैं. सांसद-विधायक से कई बार गांव की समस्याओं को दूर करने की मांग की, लेकिन किसी ने नहीं सुनी. रोहित सड़क नहीं रहने से लोगम इलाज कराने स्वास्थ्य केंद्र नहीं पहुंच पाते हैं. गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान अस्पताल ले जाने में भी परेशानी होती है. एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंचता हैं. इसके कारण लोग चार-पांच किमी पैदल चलते हैं. धीरज

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ANUJ SINGH

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