तीन धर्मों का संगम स्थल है मां भद्रकाली मंदिर, पर्यटन विभाग ने 18 साल से नहीं किया कोई काम, मास्टरप्लान भी ठंडे बस्ते में

इटखोरी में भद्रकाली मंदिर का मनोहारी दृश्य. फोटो : प्रभात खबर
Maa Bhadrakali Mandir Jharkhand: मां भद्रकाली मंदिर प्राचीन मंदिर है. जैन धर्म के दसवें तीर्थंकर भगवान शीतलनाथ जी की चरण पादुका और ताम्र पत्र मिले हैं. भगवान बुद्ध की दर्जनों प्रतिमाएं अलग-अलग मुद्रा में हैं. हिंदू देवी-देवताओं की भी कई प्रतिमा यहां हैं. यह स्थल 1500 साल पुराना है. यहां खुदाई में बड़ी संख्या में प्राचीन दुर्लभ प्रतिमाएं मिली हैं.
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Maa Bhadrakali Mandir Jharkhand| इटखोरी (चतरा), विजय शर्मा : झारखंड में पर्यटन स्थलों के विकास के लिए सरकार हर साल कई घोषणाएं करतीं हैं. कई योजना बनतीं हैं. चतरा जिले के प्रसिद्ध इटखोरी मंदिर, जो तीन धर्मों का संगम स्थल है, वहां के विकास की सारी योजनाएं अब भी फाइलों में ही दबी हैं. पर्यटन विभाग ने 18 साल से इस मंदिर क्षेत्र में विकास का कोई काम नहीं किया है.
हिंदू, जैन और बौद्ध धर्मावलंबियों का पवित्र तीर्थ स्थल
झारखंड के प्राचीनतम धार्मिक पर्यटन स्थल मां भद्रकाली मंदिर को 3 धर्मों का संगम कहा जाता है. हिंदू, जैन और बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए यह पवित्र स्थल है. बावजूद इसके मां भद्रकाली मंदिर परिसर के विकास पर पर्यटन विभाग का ध्यान नहीं है. वर्ष 2007 से पर्यटन विकास का कोई काम नहीं हुआ. पर्यटकों को आकर्षित करने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है. प्रत्येक वर्ष आयोजित होने वाले राजकीय इटखोरी महोत्सव में सरकारें विकास की घोषणाएं करतीं हैं. उसके बाद सब कुछ भुला दिया जाता है.

धूल फांक रही इटखोरी को बौद्ध सर्किट से जोड़ने की योजना
रघुवर दास की सरकार ने मां भद्रकाली मंदिर को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल बनाने का मास्टर प्लान तैयार किया था. इसमें इटखोरी को बौद्ध सर्किट से जोड़ने की बात कही गयी थी. करीब 500 करोड़ रुपए की इस योजना के लिए डीपीआर तैयार किया गया था. रघुवर दास की सरकार के सत्ता से बेदखल होते ही योजना खटाई में पड़ गयी. मां भद्रकाली मंदिर को बोधगया, रजरप्पा और पारसनाथ से जोड़ने की योजना थी.
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Maa Bhadrakali Mandir Jharkhand: भद्रकाली मंदिर परिसर में क्या-क्या है?
मां भद्रकाली मंदिर प्राचीन मंदिर है. जैन धर्म के दसवें तीर्थंकर भगवान शीतलनाथ जी की चरण पादुका और ताम्र पत्र मिले हैं. भगवान बुद्ध की दर्जनों प्रतिमाएं अलग-अलग मुद्रा में हैं. हिंदू देवी-देवताओं की भी कई प्रतिमा यहां हैं. यह स्थल 1500 साल पुराना है. यहां खुदाई में बड़ी संख्या में प्राचीन दुर्लभ प्रतिमाएं मिली हैं.

मंदिर परिसर का विकास होता, तो इटखोरी को मिलती नयी पहचान
मां भद्रकाली मंदिर परिसर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाता, तो झारखंड में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होती. इससे राज्य को पर्यटन क्षेत्र के रूप में नयी पहचान मिलती. क्षेत्र के लोगों के लिए रोजगार के अवसर का सृजन होता. विदेशी पर्यटकों के आने से क्षेत्र को आर्थिक समृद्धि मिलती.
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By Mithilesh Jha
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