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तीन धर्मों का संगम स्थल है मां भद्रकाली मंदिर, पर्यटन विभाग ने 18 साल से नहीं किया कोई काम, मास्टरप्लान भी ठंडे बस्ते में

Updated at : 12 Dec 2025 6:20 AM (IST)
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Maa Bhadrakali Mandir Jharkhand

इटखोरी में भद्रकाली मंदिर का मनोहारी दृश्य. फोटो : प्रभात खबर

Maa Bhadrakali Mandir Jharkhand: मां भद्रकाली मंदिर प्राचीन मंदिर है. जैन धर्म के दसवें तीर्थंकर भगवान शीतलनाथ जी की चरण पादुका और ताम्र पत्र मिले हैं. भगवान बुद्ध की दर्जनों प्रतिमाएं अलग-अलग मुद्रा में हैं. हिंदू देवी-देवताओं की भी कई प्रतिमा यहां हैं. यह स्थल 1500 साल पुराना है. यहां खुदाई में बड़ी संख्या में प्राचीन दुर्लभ प्रतिमाएं मिली हैं.

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Maa Bhadrakali Mandir Jharkhand| इटखोरी (चतरा), विजय शर्मा : झारखंड में पर्यटन स्थलों के विकास के लिए सरकार हर साल कई घोषणाएं करतीं हैं. कई योजना बनतीं हैं. चतरा जिले के प्रसिद्ध इटखोरी मंदिर, जो तीन धर्मों का संगम स्थल है, वहां के विकास की सारी योजनाएं अब भी फाइलों में ही दबी हैं. पर्यटन विभाग ने 18 साल से इस मंदिर क्षेत्र में विकास का कोई काम नहीं किया है.

हिंदू, जैन और बौद्ध धर्मावलंबियों का पवित्र तीर्थ स्थल

झारखंड के प्राचीनतम धार्मिक पर्यटन स्थल मां भद्रकाली मंदिर को 3 धर्मों का संगम कहा जाता है. हिंदू, जैन और बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए यह पवित्र स्थल है. बावजूद इसके मां भद्रकाली मंदिर परिसर के विकास पर पर्यटन विभाग का ध्यान नहीं है. वर्ष 2007 से पर्यटन विकास का कोई काम नहीं हुआ. पर्यटकों को आकर्षित करने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है. प्रत्येक वर्ष आयोजित होने वाले राजकीय इटखोरी महोत्सव में सरकारें विकास की घोषणाएं करतीं हैं. उसके बाद सब कुछ भुला दिया जाता है.

भद्रकाली मंदिर के पीछे है हदहदवा रॉक. फोटो : प्रभात खबर

धूल फांक रही इटखोरी को बौद्ध सर्किट से जोड़ने की योजना

रघुवर दास की सरकार ने मां भद्रकाली मंदिर को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल बनाने का मास्टर प्लान तैयार किया था. इसमें इटखोरी को बौद्ध सर्किट से जोड़ने की बात कही गयी थी. करीब 500 करोड़ रुपए की इस योजना के लिए डीपीआर तैयार किया गया था. रघुवर दास की सरकार के सत्ता से बेदखल होते ही योजना खटाई में पड़ गयी. मां भद्रकाली मंदिर को बोधगया, रजरप्पा और पारसनाथ से जोड़ने की योजना थी.

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Maa Bhadrakali Mandir Jharkhand: भद्रकाली मंदिर परिसर में क्या-क्या है?

मां भद्रकाली मंदिर प्राचीन मंदिर है. जैन धर्म के दसवें तीर्थंकर भगवान शीतलनाथ जी की चरण पादुका और ताम्र पत्र मिले हैं. भगवान बुद्ध की दर्जनों प्रतिमाएं अलग-अलग मुद्रा में हैं. हिंदू देवी-देवताओं की भी कई प्रतिमा यहां हैं. यह स्थल 1500 साल पुराना है. यहां खुदाई में बड़ी संख्या में प्राचीन दुर्लभ प्रतिमाएं मिली हैं.

इटखोरी के बक्सा डैम में ठंड के मौसम में आते हैं विदेशी पक्षी. फोटो : प्रभात खबर

मंदिर परिसर का विकास होता, तो इटखोरी को मिलती नयी पहचान

मां भद्रकाली मंदिर परिसर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाता, तो झारखंड में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होती. इससे राज्य को पर्यटन क्षेत्र के रूप में नयी पहचान मिलती. क्षेत्र के लोगों के लिए रोजगार के अवसर का सृजन होता. विदेशी पर्यटकों के आने से क्षेत्र को आर्थिक समृद्धि मिलती.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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