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लॉकडाउन इफेक्ट : किसानों को रुला रहा प्याज, नहीं मिल रहे खरीदार, लाखों का नुकसान

Updated at : 11 Jun 2020 6:03 PM (IST)
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लॉकडाउन इफेक्ट : किसानों को रुला रहा प्याज, नहीं मिल रहे खरीदार, लाखों का नुकसान

जिले के किसान इनदिनों प्याज के आंसू रो रहे हैं. उचित खरीदार नहीं मिलने से जहां प्याज घरों में पड़े-पड़े सड़ रहा है, वहीं औने-पौने दामों पर बेचने को भी मजबूर होना पड़ रहा है. जिले के करनी गांव के किसानों के पास करीब 4,000 क्विंटल प्याज आज भी उनके घरों में पड़ा है. अब इन किसानों को चिंता सताने लगी है कि कहीं ये प्याज भी सड़ न जाये.

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इटखोरी (चतरा) : जिले के किसान इनदिनों प्याज के आंसू रो रहे हैं. उचित खरीदार नहीं मिलने से जहां प्याज घरों में पड़े-पड़े सड़ रहा है, वहीं औने-पौने दामों पर बेचने को भी मजबूर होना पड़ रहा है. जिले के करनी गांव के किसानों के पास करीब 4,000 क्विंटल प्याज आज भी उनके घरों में पड़ा है. अब इन किसानों को चिंता सताने लगी है कि कहीं ये प्याज भी सड़ न जाये. पढ़ें, विजय शर्मा की रिपोर्ट.

चतरा जिला अंतर्गत करनी गांव के किसान इनदिनों काफी परेशान हैं. इन किसानों के करीब 4,000 क्विंटल प्याज घरों में पड़ा है, जिसका उचित खरीदार नहीं मिल रहा है. इटखोरी बाजार में इन दिनों थोक भाव में 7 रुपये तथा खुदरा में 10 रुपये किलो की दर से प्याज बिक रहा है.

प्याज का निर्यात नहीं होने के कारण कई किसान तो प्याज को खेतों में ही छोड़ने लगे हैं. इस बार किसानों को ही प्याज रुला रहा है. करनी गांव के लगभग 75 किसानों के पास प्याज का भंडार पड़ा है. कई किसान अपने घरों के फर्श पर इन प्याज को रखे हुए हैं. प्याज रखने की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण धीरे-धीरे सड़ने भी लगा है. करनी के किसानों को इस बार लाखों रुपये का नुकसान हुआ है.

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लागत 10 रुपये और खरीदार मांगते हैं 6 रुपये प्रति किलोग्राम प्याज

करनी गांव के किसान ब्रह्मदेव दांगी कहते हैं कि मेरे पास 50 क्विंटल प्याज है. कोई खरीदार नहीं आ रहा है. जो भी आते हैं वे 6 रुपये किलो की दर से प्याज मांगते हैं, जबकि लागत है 10 रुपये. हर साल कम से कम दो लाख रुपये का आमद होता था, लेकिन कोरोना के कारण इस बार तो पूंजी भी नहीं लौटेगी. उन्होंने कहा कि सड़ जाने के कारण कई क्विंटल प्याज तो पहले ही फेंक चुके हैं. अब हिम्मत जवाब दे रहा है. इटखोरी प्रखंड में कोल्डस्टोर नहीं होने के कारण मजबूरी में इन प्याजों को घरों में रखना पड़ रहा है.

मेहनताना भी नहीं निकल रहा

किसान गिरीश चंद्र गिरीश कहते हैं कि प्याज की खेती करने वाले किसान इस बार बर्बाद हो गये हैं. पिछले साल हमने 7 हजार रुपये का प्याज बेचा था, लेकिन इस बार तो मेहनताना भी नहीं निकल रहा है. प्याज की कमाई से ही बच्चों के पढ़ाई का खर्च वहन करते थे. कर्ज लेकर खेती किये थे. मई माह तक प्याज की बिक्री हो जानी चाहिए थी, लेकिन अब तक प्याज घर में ही पड़ा है. अब तो बारिश का मौसम भी आने लगा है. इससे प्याज सड़ने की संभावना अधिक है.

Posted By : Samir ranjan.

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