रुढ़ीगत संयुक्त ग्राम सभा मंच का धरना-प्रदर्शन

मंगलवार को अंचल कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन किया.
टंडवा. उत्तरी कर्णपुरा क्षेत्र के विस्थापित आदिवासी मूलवासियों ने रुढ़ीगत संयुक्त ग्रामसभा मंच के नेतृत्व में मंगलवार को अंचल कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन किया. इसकी अध्यक्षता सुष्मिता उरांव ने की, संचालन रामकुमार उरांव व महेंद्र उरांव ने किया. इस दौरान शोषण, अन्याय व संवैधानिक अधिकारों के हनन समेत अंचल कार्यालय में भ्रष्टाचार, अवैध जमाबंदी, नो इंट्री नियमों की अनदेखी, व्यक्तिगत सामुदायिक वन पट्टा सत्यापन जैसे मुद्दों पर विस्थापितों ने आवाज बुलंद की. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि खेती व वनोपज उनकी मुख्य आजीविका है. सभी गांवों को सामुदायिक वन अधिकार पट्टा सीएफआर देकर जल-जंगल-जमीन को बचाया जाये. रैयतों का आरोप है कि सीसीएल की ओर से जमीन को समतल कर वापस नहीं किया जाता, अधिग्रहण के समय नौकरी-शिक्षा व जमीन वापसी के वादे पूरे नही होते हैं. रैयतों को न्याय मांगने पर धमकी दी जाती है. इससे आदिवासी मूलवासी को नागरिकता खोने का डर सता रहा है. वक्ताओं ने सीएनटी एक्ट-1908 की अनदेखी कर सीसीएल द्वारा अवैध म्यूटेशन कराने का पुरजोर विरोध किया. वहीं अरबो मुनाफा के बाद भी गांवों को बिजली, पानी, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है. कहा कि डीएमएफटी व सीएसआर फंड का लाभ नहीं मिल रहा, जो विकास की नाम पर आदिवासियों के विनाश को दर्शाता है. धरना-प्रदर्शन के बाद 32 सूत्री मांगो का ज्ञापन बीडीओ सह अंचल पदाधिकारी देवलाल उरांव को सौंपा गया. मौके पर महेंद्र उरांव, रामकुमार उरांव, विकास महतो, रूपलाल महतो, जुगेश मिंज, बीरेंद्र एक्का, अनिल कुमार महतो, सुशील टोप्पो, अंगद कुमार महतो, सुरेंद्र टोप्पो, बालेश्वर उरांव, प्रेम सुंदर लकड़ा, प्रियंका देवी, बहुरा मुंडा, गुलाब महतो, कामेश्वर गंझू, तापेश्वर गंझू समेत काफी संख्या में लोग शामिल थे.
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