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इटखोरी : मां भद्रकाली मंदिर परिसर में कीर्ति स्‍तंभ व कमल मंदिर का हुआ शिलान्‍यास

Updated at : 18 Jan 2019 8:31 PM (IST)
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इटखोरी : मां भद्रकाली मंदिर परिसर में कीर्ति स्‍तंभ व कमल मंदिर का हुआ शिलान्‍यास

– हजारों की संख्‍या में जुटे जैन धर्मावलंबी इटखोरी : तीन धर्मों के संगम स्थल मां भद्रकाली मंदिर परिसर के पास जैन धर्म के दसवें तीर्थंकर भगवान शीतलनाथ गर्भ जन्म कल्याण भूमि पर शुक्रवार को सर्व धर्म सदभाव का दृश्य दिखा, इस मौके पर अहिंसा विश्व मैत्री कीर्ति स्तंभ व भगवान शीतलनाथ के कमल मंदिर […]

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– हजारों की संख्‍या में जुटे जैन धर्मावलंबी

इटखोरी : तीन धर्मों के संगम स्थल मां भद्रकाली मंदिर परिसर के पास जैन धर्म के दसवें तीर्थंकर भगवान शीतलनाथ गर्भ जन्म कल्याण भूमि पर शुक्रवार को सर्व धर्म सदभाव का दृश्य दिखा, इस मौके पर अहिंसा विश्व मैत्री कीर्ति स्तंभ व भगवान शीतलनाथ के कमल मंदिर का शिलान्यास हुआ. सांसद सुनील सिंह, दिगंबर जैन धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष ताराचंद जैन, रविंद्र कीर्ति महाराज, सुरेश झांझरी व सुनील जैन, जितेंद्र जैन ने शिलान्यास किया. सांसद ने अहिंसा का ध्वजारोहण किया.

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांसद सुनील सिंह ने कहा कि पूर्वजों के पुण्य कार्यों के कारण ही आज हम सब को यह पुण्य भूमि प्राप्त हुआ है. उन्होंने कहा कि धर्म किसी में विभेद नहीं कराता है. धर्म व्‍यक्ति के गुणों के धारणा को कहते हैं. धर्म जीवन जीने का उपकार व संवेदना है. दूसरों के दुःख से पीड़ित होना ही धर्म कहलाता है.

उन्होंने कहा कि किसी संप्रदाय का अनादर कर हम सुख से नहीं रह सकते. समाज के दुष्प्रभाव से मोक्ष पाना ही धर्म है. उन्होंने कहा कि भगवान शीतलनाथ जी भी हमसबों के पूर्वज थे. उन्होंने जैन मुनियों से आशीर्वाद लेते हुए कहा कि इससे आने वाली पीढ़ियों को बेहतर संस्कार मिले. पूर्वजों के संस्कार के कारण ही आज इस भूमि पर इतने संतों का दर्शन हुआ.

इस क्षेत्र को अहिंसा भूमि बनाना है : ताराचंद जैन

दिगम्बर जैन धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष ताराचंद जैन ने कहा कि मां भद्रकाली व शीतलनाथ के इस क्षेत्र को अहिंसा क्षेत्र बनाना है. आज ऐतिहासिक दिन है. यह स्थल विकास का नया गाथा लिखेगा. उन्होंने कहा कि मैं सनातन धर्म पर भी विश्वास करता हूं. जैन समाज जियो और जीने दो की राह पर चलता है. भगवान श्रीकृष्ण भी तीर्थंकर के अवतार थे.

अकेला जीवन शून्य की तरह होता है : विराग सागर

अकेला जीवन शून्य की तरह होता है. साधना के पथ पर चलने वाले का जीवन धन्य होता है. यह बात जैन मुनि विराग सागर जी महाराज ने कही. उन्‍होंने कहा कि संत बहते पानी की धारा की तरह होते हैं. उन्होंने कहा कि जब-जब अधर्म बढ़ता है तब-तब भगवान का अवतार होता है. दूसरों के कष्ट को अपना समझना चाहिए. उन्होंने कहा कि कुछ लोग अपने वृद्ध माता पिता को वृद्धाश्रम में छोड़ देते हैं, वह पुत्र नहीं कुपुत्र होते हैं. जो माता पिता का आदर करते हैं वह जीवन भर सुखी रहते हैं.

इस पावन भूमि पर आना शौभाग्य है : रविन्द्र कीर्ति

इस पावन भूमि पर आना शौभाग्य की बात है. विकास कार्य में बाधा नहीं होनी चाहिए. यह बात जैन धर्म गुरु रविन्द्र कीर्ति जी महाराज ने कही. उन्होंने कहा कि धार्मिक कार्यों में सभी को बढ़ कर सहयोग करना चाहिए. विरोध से पाप तथा सहयोग से पुण्य बढ़ता है. उन्‍होंने कहा कि संतो की भक्ति व आशीर्वाद से जीवन तृप्त होता है.

संत साधना के देवता होते हैं : श्रमणी आर्यिका माता जी

संत साधना के देवता होते हैं, संत जीवन के निर्माता होते हैं. यह बात जैन साध्वी श्रमणी आर्यिका श्री 105 विशिष्ट श्री माता जी ने कही. उन्होंने कहा कि साधना से ही नर, नारायण बनता है. संतों के चरण जहां पड़ते हैं वह तीर्थ स्थल बन जाता है. संत शास्त्र के ही नहीं जीवन के पन्नों को भी बदल देते हैं. माता जी ने कहा कि संत जंगलों को भी मंगलमय बना देते हैं.

हर पर्वत पर मोती नहीं हो सकता : विशोक सागर

हर पर्वत पर मोती नहीं हो सकता. यह बात जैन मुनि विशेक सागर जी महाराज ने कही. उन्होंने कहा कि उसी प्रकार हर मनुष्य संत नहीं बन सकता, संत बनने के लिए त्याग करना पड़ता है. समारोह की शुरुआत ध्वजारोहण के साथ हुई. बिहार के औरंगाबाद से आये जैन समाज के अध्यक्ष कन्हैया लाल सेठी व उनकी पत्नी सुगनी देवी समेत परिवार के सभी सदस्यों ने ध्वजारोहण किया, उंसके बाद कमल मंदिर निर्माण के लिए 24 तीर्थंकर की भूमि पूजन हुई, इसमें बंगाल, बिहार व झारखंड के कई जैन समुदाय के लोगों ने सहयोग किया. कमल मंदिर के भूमि पूजन में अनिल जैन व उनकी पत्नी अनिता जैन, प्रदीप कला व उनकी पत्नी प्रेम कला, ललित जैन व उनकी पत्नी संतोष जैन समेत कुल 24 लोग शामिल हुए.

कार्यक्रम में उपस्थित सनातन व जैन धर्म के लोगों ने विराग सागर जी महाराज के चरणों मे श्रीफल भेंट किया, उंसके बाद जैन मुनि का आशीर्वाद लिया. कार्यक्रम स्‍थल भक्ति गीतों से गूंजता रहा. राजस्थान के दौसा से आये जैन गीतकार हर्ष व उनके सहयोगियों ने एक से बढ़कर एक भक्ति गीत गाये. उन्होंने आजा बार बार तुझको पुकार………, नील गगन के तले मुनियों के संग चले………, समेत कई गीत गाये. आकांक्षा जैन व प्रज्ञा जैन ने धार्मिक गीतों पर नृत्य किया.

कार्यक्रम में देश के कई प्रदेशों से जैन धर्म के लोग आये थे. राजस्थान, बिहार, बंगाल, झारखंड, उड़ीसा, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश आदि से लोग आये थे. कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में कोडरमा के सुरेश झांझरी, सुनील जैन, जितेंद्र जैन, सौरव जैन, बिनोद जैन, प्रियांशू जैन, मीना जैन, स्वाति जैन, पुष्पा जैन, आरती जैन, पूजा जैन, चंदा जैन आदि ने सराहनीय कार्य किये. कार्यक्रम स्थल पर पुलिस सुरक्षा की पूरी व्‍यवस्था थी. बीडीओ उत्तम प्रसाद, इंस्पेक्टर मार्कडेय बानरा, थाना प्रभारी अशोक राम पुलिस बल के साथ तैनात थे.

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