डेढ़ साल पहले अपनों से बिछड़े, भाई से मिले तो छलके आंसू, आपको भी रुला देगी फूलदेव की कहानी

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भाई से मिलाते थाना प्रभारी व पीएलव.

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चाईबासा में डालसा की पहल से डेढ़ साल से भटके यूपी के फूलदेव यादव अपने परिवार से मिल गए. पीएलवी और पुलिस की मदद से भाई से मिल भावुक हुए फूलदेव.

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चाईबासा | डेढ़ साल से अपनों से दूर... कभी रास्तों पर भटकते हुए, कभी अस्पताल में और फिर वृद्धाश्रम में जिंदगी गुजार रहे अधेड़ फूलदेव यादव की आंखों में शनिवार को खुशी के आंसू थे. जैसे ही सामने अपने छोटे भाई को देखा, फूलदेव खुद को रोक नहीं सके. दोनों भाई एक-दूसरे से लिपटकर रोने लगे. यह सिर्फ दो भाइयों का मिलन नहीं था, बल्कि डेढ़ साल से बिछड़े एक परिवार के फिर से जुड़ने का भावुक पल था. डालसा की पहल और पीएलवी की कोशिशों से फूलदेव आखिरकार अपने परिवार तक पहुंच सके.

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डेढ़ साल पहले घर से निकले, फिर रास्तों में खो गयी जिंदगी

फूलदेव यादव मूल रूप से उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर के रहने वाले हैं. करीब डेढ़ वर्ष पहले वह घर से भटक गये थे. रास्ता भटकने के बाद वह अपने घर और परिवार से दूर होते चले गये. परिजनों से संपर्क टूट गया और परिवार के लिए उनकी तलाश चिंता और बेचैनी में बदल गयी. इधर, भटकते-भटकते फूलदेव पश्चिमी सिंहभूम के नोवामुंडी क्षेत्र तक पहुंच गये. अपरिचित जगह और अपनों से दूरी के बीच उनकी जिंदगी मुश्किलों में गुजर रही थी.

नोवामुंडी में मिले तो पीएलवी ने पहुंचाया अस्पताल

पिछले दिनों पीएलवी की नजर नोवामुंडी क्षेत्र में भटक रहे फूलदेव पर पड़ी. उनकी स्थिति को देखते हुए पीएलवी ने उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया. यहां इलाज और स्वास्थ्य लाभ के बाद उन्हें डिस्चार्ज किया गया. इसके बाद उनकी देखभाल के लिए उन्हें संचार वृद्धाश्रम, झींकपानी में रखा गया. उम्मीद थी कि सुरक्षित माहौल में रहने के दौरान उनके परिवार तक पहुंचने का रास्ता निकलेगा. लेकिन, कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. फूलदेव वृद्धाश्रम से चुपके से निकल गये. दोबारा नोवामुंडी पहुंच गये. उनके फिर से भटक जाने के बाद उन्हें परिवार से मिलाने की कोशिश दोबारा तेज की गयी. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डालसा अध्यक्ष मोहम्मद शाकिर और सचिव रवि चौधरी के मार्गदर्शन में पीएलवी ने लगातार प्रयास जारी रखा. आखिरकार इन कोशिशों का वह दिन आया, जिसका इंतजार फूलदेव और उनके परिवार को लंबे समय से था.

भाई को सामने देखते ही भर आईं आंखें

फूलदेव के छोटे भाई के मिलने के बाद माहौल पूरी तरह भावुक हो गया. लंबे अरसे बाद दोनों भाई आमने-सामने थे. एक-दूसरे को देखते ही दोनों गले लग गये. फूट-फूटकर रोने लगे. डेढ़ साल की दूरी और बिछड़ने का दर्द उस एक पल में आंसुओं के रूप में बाहर आ गया. फूलदेव के परिवार के लिए यह पल किसी बड़ी खुशी से कम नहीं था. जिस भाई के लौटने की उम्मीद लगातार बनी हुई थी, वह आखिरकार उनके सामने था.

इन लोगों की कोशिशों से परिवार तक पहुंच सके फूलदेव

फूलदेव को परिवार से मिलाने में पीएलवी प्रमिला पात्रों, रेणु देवी और सोमा बोस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. साथ ही झींकपानी और किरीबुरू थाना प्रभारी ने भी परिवार की तलाश और मिलाने की प्रक्रिया में सहयोग किया. डालसा और पीएलवी की इस पहल ने न सिर्फ एक भटके हुए व्यक्ति को सहारा दिया, बल्कि डेढ़ साल से बिछड़े दो भाइयों को फिर से एक-दूसरे के सामने ला दिया.


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