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Chaibasa News : घाटों को सजाने में जुटे व्रती, फल और पूजन सामग्री से पटे बाजार

Updated at : 25 Oct 2025 10:43 PM (IST)
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Chaibasa News : घाटों को सजाने में जुटे व्रती, फल और पूजन सामग्री से पटे बाजार

चाईबासा. नहाय-खाय के साथ छठ महापर्व शुरू, खरना आज

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चाईबासा. नहाय-खाय और कद्दू-भात के साथ लोक आस्था का महापर्व छठ शनिवार से शुरू हो गया. इस दौरान व्रतियों ने सुबह में स्नान-ध्यान कर अरवा चावल का भात, चना दाल व कद्दू का प्रसाद बनाया. इसके बाद प्रसाद ग्रहण किया. रोरो नदी तट पर छठ घाट को दुरुस्त करने व सजाने की तैयारी चल रही है. रोरो नदी तट पर कुछ लोगों ने स्वयं खर्च पर पक्का छठ घाट का निर्माण कराया है, ताकि व्रतियों को अर्घ्य अर्पित करने किसी भी तरह की परेशानी ना हो. वहीं, नगर परिषद के कर्मी भी छठ घाटों को व्यवस्थित करने व सजाने-संवारने में जुटे रहे. शनिवार को छठघाट के सीढियों की पानी से धुलाई करायी गयी. खास बात यह रही है कि इस बार सब्जी के थोक कारोबारियों ने एक दिन पूर्व नौ टन कद्दू मंगवा लिया था. इस वजह से बाजार में कद्दूत 20 से लेकर 40 रुपये पीस बिक्री हुई. वहीं कद्दू भात के साथ ही छठ के बाजार भी सज गये हैं. फल विक्रेताओं ने फलों का स्टॉक मंगाना शुरू कर दिया है. इसके साथ ही छठ पूजन सामग्री के भी बाजार सज गये हैं. पिछले साल की ही दर पर सूप- दौरा की बिक्री की जा रही है.

छठ हमारी संस्कृति की आत्मा

जगन्नाथपुर में लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व शनिवार को पारंपरिक विधि-विधान और उल्लास के साथ आरंभ हुआ. प्रथम दिन ‘नहाय-खाय’ की रस्म के साथ व्रतियों ने भगवान सूर्य और छठी मैया की आराधना करते हुए अपने व्रत की शुरुआत की. सुबह सूर्योदय से पूर्व ही विभिन्न मोहल्लों की महिलाएं स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा-अर्चना में जुट गयी. नहाय-खाय पर सात्विक भोजन कद्दू-भात और चना दाल का प्रसाद बनाया गया, जिसे सर्वप्रथम सूर्य देव को अर्पित करने के बाद व्रतियों और परिवारजनों ने ग्रहण किया. मान्यता है कि यह विधि तन-मन की शुद्धि प्रदान करती है और व्रती को आगामी कठिन व्रतों के लिए तैयार करती है. नहाय-खाय संपन्न होने के बाद अब व्रती महिलाएं दूसरे दिन यानी रविवार को होने वाले ‘खरना’ की तैयारी में जुट गयी हैं. खरना के दिन वे पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं और सांध्यकाल में गुड़ की खीर, रोटी और केले के प्रसाद से व्रत खोलती हैं. इसी के साथ उनके 36 घंटे के निर्जला उपवास का आरंभ होता है, जिसे पर्व का सबसे कठिन और पवित्र चरण माना जाता है. इस दौरान जगन्नाथपुर के गली-मोहल्लों में पारंपरिक छठ गीतों की धुनें गूंजने लगी हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्ति और उत्सव भाव से भर गया है. स्थानीय निवासी ईश्वर चंद्र विद्यसागर ने कहा कि छठ पूजा हमारी संस्कृति की आत्मा है. इसमें निहित अनुशासन, स्वच्छता और समर्पण समाज को नई दिशा देती है.

छठ घाटों पर शुरू हुआ सफाई अभियान :

छठ शुरु होते ही जगन्नाथपुर के छठ घाटों पर तैयारियां तेज हो गयी हैं. बड़ा सरकारी तालाब और बलियाडीह नदी में सफाई शुरु हो गयी है. स्थानीय लोग सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं और स्वयंसेवी तौर पर टीम बनाकर सफाई कर रहे हैं. नदी में जलस्तर बनाए रखने के लिए लोगों ने अस्थायी बांध तैयार किया है. जगन्नाथपुर के दो प्रमुख छठ घाटों की सफाई का दायित्व समाजसेवी ईश्वरचंद विद्यासागर ने संभाला है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि व्रतियों को अर्घ्य देने में कोई असुविधा न हो. स्थानीय बाजारों में छठ पूजा की रौनक दिखाई दे रही है, जहां लोग सूप, लौकी और अन्य पूजन सामग्री खरीद रहे ह

नोवामुंडी : नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय महापर्व शुरु :

नोवामुंडी में शनिवार को छठ व्रत धारी महिलाओं ने सुबह घर की साफ सफाई कर ओड़िया तालाब में स्नान-ध्यान कर पूजा पाठ की. छठ का संकल्प ले चनादाल कद्दू की सब्जी और चावल का सात्विक भोजन ग्रहण किया और अपने परिवार ने भी भोजन ग्रहण किया.

छठ पर गुवा कुसुम घाट पर होगी गंगा आरती

गुवा. लोक आस्था का महापर्व छठ पर्व की शुरुआत शनिवार को नहाय-खाय से हुई. व्रती महिलाओं ने गुवा के कुसुम घाट पर कारो नदी में स्नान किया. इसके बाद लौकी-भात का प्रसाद ग्रहण किया. रविवार को खरना पूजा होगी, जिसमें व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखकर शाम को खीर का प्रसाद ग्रहण करेंगे. सोमवार को अस्ताचलगामी (डूबते) सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जायेगी. मंगलवार की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ यह चतुर्दिवसीय पर्व संपन्न होगा. गुवा के कुसुम घाट पर समाजसेवी गोविंद पाठक, हेमराज सोनार और गुवा सेल प्रबंधन के सहयोग से भव्य गंगा आरती का आयोजन होगा. इसके लिए बनारस से विशेष पुरोहित बुलाए गये हैं. दीपों की लौ और भक्ति संगीत से घाट का वातावरण अत्यंत श्रद्धामय रहेगा.

सामग्रियों की दर (रुपये में)

कद्दू (प्रति पीस) 20-40

सूप 100- 120

डाला 300- 400

सुप्ती 50

दीया (दर्जन) 20

हुमाददानी 20

अरता 20

बद्धी 10मिट्टी की कलशी 05- 10

गन्ना (प्रति पीस) 50-100

गागर नींबू (प्रति पीस) 30- 40

नारियल40- 50

डाभ40- 50

अनार (प्रति किलो)180- 200

सेव (प्रति किलो)140- 160

संतरा (प्रति किलो)80

अंगूर(प्रति किलो) 180

अमरूद (प्रति किलो) 60- 80

पानी फल (प्रति किलो)40- 50

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ATUL PATHAK

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By ATUL PATHAK

ATUL PATHAK is a contributor at Prabhat Khabar.

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