जगन्नाथपुर. पश्चिमी सिंहभूम जिले के ग्रामीणों की रक्षा के लिए बंगाल से बुलायी गयी एक्सपर्ट टीम के एक सदस्य की हाथी ने पटक कर मार डाला. इस घटना से ग्रामीणों और डर गये हैं. उनका कहना है कि रक्षक ही असुरक्षित है, तो हम किस पर भरोसा करें. डीएफओ का घटनास्थल पर पहुंचना और हाथी को खदेड़ने का आश्वासन देना अब नाकाफी लगता है. ज्ञात हो कि वन विभाग ने पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले से 20 सदस्यीय एक्सपर्ट टीम बुलायी. टीम के सदस्य सुखलाल बेसरा (ग्राम चुरकु, थाना बारिकुल) हाथियों को खदेड़ने की कोशिश कर रहे थे, तभी हाथी ने हमला कर दिया. मझगांव पुलिस ने तत्काल सक्रियता दिखाते हुए घायल सुखलाल को मयूरभंज (ओडिशा) के ररुवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया. यहां डॉक्टर एल के नायक ने प्राथमिक इलाज कर रेफर कर दिया. ओडिशा के क्योंझर अस्पताल में शाम 7:00 बजे वनकर्मी की मौत हो गयी.
हर साल करोड़ों खर्च, फिर भी जा रही जान
गौरतलब हो कि हाथियों को खदेड़ने के नाम पर हर साल करोड़ों का बजट खर्च होता है. इसके बावजूद ग्रामीणों की जान जा रही है. लोग मौत के साये में जी रहे हैं. वन विभाग अक्सर दावा करता है कि उनके पास ‘क्विक रिस्पांस टीम’है, लेकिन हकीकत यह है कि जब हाथी गांव में घुसता है, तो विभाग के पास केवल टॉर्च और पटाखों के अलावा कुछ नहीं होता है.कुइलसुता पहुंचे डीएफओ, हाथी प्रभावित परिवारों से मिले
गोइलकेरा. कोल्हान के वन प्रमंडल पदाधिकारी (डीएफओ) कुलदीप मीणा शुक्रवार को टोंटो प्रखंड के कुइलसुता गांव पहुंचे. उन्होंने हाथी के हमले में जान गंवाने वाले युवक जगमोहन सावैयां के परिजनों से मुलाकात की. परिजनों को हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया. उन्होंने कहा कि आश्रितों को मुआवजे की सभी प्रक्रियाएं जल्द पूरी की जायेगी. उन्होंने परिजनों के बीच राहत सामग्रियों का वितरण किया. ग्रामीणों को हाथियों से बचाव के लिए जागरूक किया गया. विगत छह जनवरी को तड़के कुइलसुता गांव में जगमोहन सावैयां को दंतैल हाथी ने कुचल कर मार डाला था.कुकड़ू प्रखंड में जंगली हाथियों का उत्पात, किसानों की फसलें बर्बाद
चांडिल. कुकड़ू प्रखंड के बेरासीसिरूम गांव के टोला खरकोचा में बीते गुरुवार की देर रात जंगली हाथियों के झुंड ने जमकर उत्पात मचाया. हाथियों ने खेतों में लगी आलू, बंदगोभी, टमाटर और फूलगोभी की फसलों के साथ खलिहान में रखे धान के बंडलों को भी नष्ट कर दिया. शुक्रवार की सुबह जब किसान अपने खेतों में पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि हाथियों ने उनकी मेहनत से तैयार फसल को रौंद डाला है. आलू और सब्जी की खेती पूरी तरह बर्बाद हो गयी है. इस घटना से ग्रामीण किसान गहरे संकट में हैं. बताया कि खेती-बाड़ी ही उनकी आय का प्रमुख साधन है, जिससे वे अपने परिवार का जीवन-यापन करते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि इस वर्ष क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक बढ़ गया है, जिससे किसान लगातार चिंतित हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि वन विभाग हाथियों को गांवों से दूर भगाने में विफल साबित हो रहा है. किसानों ने प्रशासन और वन विभाग से क्षतिग्रस्त फसलों का अविलंब मुआवजा देने और क्षेत्र से हाथियों को भगाने की ठोस पहल करने की मांग की है.सरायकेला वन प्रमंडल : 21 वर्षों में हाथियों से 147 की मौत, 217 घायल
खरसावां. सरायकेला वन प्रमंडल में बीते 21 वर्षों (2004-05 से दिसंबर 2025 तक) में हाथियों के हमले में 147 लोगों की मौत हुई है. वहीं 217 लोग घायल हुए हैं. वन विभाग ने 12 करोड़ 44 लाख 20 हजार 217 रुपये का मुआवजा भुगतान किया गया है.इन मद में हुआ मुआवजा भुगतान
– 147 मृतकों के आश्रित को : 3 करोड़ 17 लाख 62 हजार 500 रुपये– 217 घायलों के उपचार : 43 लाख 41 हजार 439 रुपये
– खेती (5091.92 हेक्टेयर) : 4 करोड़ 18 लाख 14 हजार 901 रुपये– घरों में अनाज (6451.29 क्विंटल) : 55 लाख 98 हजार 219 रुपये
– 49 पालतु पशुओं मरे : 1 लाख 50 हजार 500 रुपये– 3050 मकानों को क्षति : 4 करोड़ 07 लाख 52 हजार 658 रुपये
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