ePaper

Chaibasa News : आदिवासी युवा व्यवसायी बनकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करें : रामेश्वर बिरुवा

Updated at : 23 Sep 2025 11:24 PM (IST)
विज्ञापन
Chaibasa News : आदिवासी युवा व्यवसायी बनकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करें : रामेश्वर बिरुवा

पश्चिमी सिंहभूम. टिक्की ने आदिवासी आर्थिक विकास और चुनौतियां पर संगोष्ठी की

विज्ञापन

चाईबासा. ट्राइबल इंडियन चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (टिक्की) की पश्चिमी सिंहभूम इकाई ने मंगलवार को स्थानीय प्राकृतिक व्याख्या केंद्र, वन प्रभाग में संगोष्ठी आयोजित की. इसका विषय ‘आदिवासियों का आर्थिक विकास और चुनौतियां’ रहा. उक्त आयोजन सागोन ट्रस्ट और जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र के सहयोग से हुआ. अध्यक्ष रामेश्वर बिरुवा के नेतृत्व में सरकारी अधिकारियों, आदिवासी नेताओं, शैक्षणिक विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और युवाओं के बीच संवाद के लिए रचनात्मक मंच दिया गया. अध्यक्ष ने कहा कि आजादी के 75 साल बाद भी आदिवासी गरीबी और बाहरी दबाव से जूझ रहे हैं. हालांकि 2011-12 से आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है. अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है. उन्होंने आदिवासी युवाओं से व्यवसाय और उद्योग में प्रवेश करने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने व जल, जंगल और जमीन जैसे स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि चुनौतियां हैं. मजबूत ग्रामसभा और संसाधनों के प्रभावी उपयोग से काबू पाया जा सकता है. पारंपरिक ज्ञान को आधुनिकता से जोड़ें : तुबिद संगोष्ठी में मुख्य अतिथि पूर्व आइएएस, पूर्व गृह सचिव सह कैबिनेट सचिव ज्योति भ्रमर तुबिद ने आदिवासी क्षेत्रों में समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक व आर्थिक प्रथाओं के साथ एकीकृत करने के महत्व पर बल दिया. तोरंग ट्रस्ट की अध्यक्ष व झारखंड राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य डॉ वासवी किडो, जमशेदपुर में जेएसएलपीएसके ब्लॉक परियोजना प्रबंधक राउतु बोदरा, चाईबासा के बीआरएलएफ के क्षेत्रीय समन्वयक निशांत कुमार ने अपने विचार रखे. स्थानीय औषधीय पौधों के दस्तावेजीकरण पर जोर सागोन ट्रस्ट के अध्यक्ष बहलेन चांपिया सिंकू ने स्थानीय उद्यमिता, सहकारी मॉडल, ब्रांडिंग, जीआइ टैगिंग, नीति वकालत और विश्वविद्यालयों के साथ इनक्यूबेशन केंद्र स्थापित करने पर दृष्टिकोण साझा किया. जोहार ट्रेस्ट के अध्यक्ष रमेश जेराई ने पारंपरिक आदिवासी औषधीय प्रथा और स्थानीय औषधीय पौधों के दस्तावेजीकरण के महत्व पर प्रकाश डाला. जोर दिया कि यह ज्ञान स्वदेशी ज्ञान को संरक्षित करते हुए उद्यमशीलता के अवसर पैदा कर सकता है. सांस्कृतिक विरासत को आर्थिक विकास से जोड़ना जरूरी डॉ मीनाक्षी मुंडा ने आदिवासी युवाओं को व्यावहारिक कौशल से लैस करने, रोजगार क्षमता बढ़ाने और शैक्षणिक ज्ञान व वास्तविक अवसरों के बीच की खाई को पाटने के लिए कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर कौशल-आधारित मॉड्यूल विकसित करने के महत्व पर प्रकाश डाला. वहीं अमिताभ घोष ने आदिवासी सांस्कृतिक विरासत को आर्थिक विकास से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया. बताया कि पारंपरिक कला, शिल्प, इको-टूरिज्म और सांस्कृतिक प्रथाओं का न केवल अपार विरासत मूल्य है, बल्कि आधुनिक बाजारों से जुड़ने पर स्थायी आजीविका की संभावनाएं हैं. उद्यमिता को बढ़ावा देते हुए सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करना आदिवासी आर्थिक सशक्तीकरण का शक्तिशाली प्रेरक बन सकता है. झारखंड व ओडिशा के कई जिलों की संस्थाएं शामिल हुईं संगोष्ठी में पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, खूंटी, रांची व ओडिशा के मयूरभंज के हो, मुंडा, संताली व उरांव समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाली आदिवासी सामाजिक संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी रही. आदिवासी छात्र, पीएचडी शोधार्थी, स्वयं सहायता समूह और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विचारों के समृद्ध आदान-प्रदान में योगदान दिया. इन मुद्दों पर केंद्रित रही चर्चा – वर्तमान आर्थिक गतिविधियां जैसे कृषि, वनोपज, हस्तशिल्प और लघु उद्योग. – सीमित बाजार पहुंच, अपर्याप्त बुनियादी ढांचा और बेरोजगारी की चुनौतियां. – कौशल विकास, उद्यमिता और प्रौद्योगिकी अपनाने के अवसर. – सरकारी एजेंसियों, गैर-सरकारी संगठन, ट्रस्टों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच साझेदारी का महत्व.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
ANUJ KUMAR

लेखक के बारे में

By ANUJ KUMAR

ANUJ KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola