Chaibasa News : झारखंड में छीना जा रहा आदिवासियों का अधिकार, आदेश थोप रही सरकार : चंपाई

Published by : AKASH Updated At : 03 Feb 2026 12:13 AM

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सेरेंगसिया में पूर्व सीएम ने श्रद्धांजलि दी, कहा- जल, जंगल व जमीन आज भी संकट में

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जगन्नाथपुर.

पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन सोमवार की शाम करीब 4:00 बजे शहीद स्थल (टोंटो प्रखंड की सेरेंगसिया घाटी) पहुंचे. उन्होंने वीर पोटो हो समेत कोल विद्रोह के अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी. पूर्व सीएम ने शहीदों के बलिदान को याद किया. उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने जिस जल, जंगल, जमीन और परंपराओं की रक्षा के लिए ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ विद्रोह किया था, वह आज भी संकट में है. झारखंड सरकार आदिवासी विरोधी है. इस सरकार ने कई दशक से चली आ रही परपंरा को तोड़ दिया. सेरेंगसिया के ग्रामीण हर साल सांस्कृतिक कार्यक्रम व खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन करते थे. इसे जबरन रद्द करवा दिया. उनका कसूर सिर्फ यही था कि उन्होंने मुझे मुख्य अतिथि के तौर कर बुलाया था. उन्होंने कहा कि भोगनाडीह से सेरेंगसिया तक शहीद के परिवारों व पारंपरिक ग्राम प्रधानों के निर्णयों को दरकिनार कर पुलिस के दम पर सरकारी आदेशों को थोपने का प्रयास चल रहा है. उसे आदिवासी समाज बर्दाश्त नहीं करेगा.

सारंडा में बसे लाखों आदिवासी परिवार को धोखा दिया गया

पूर्व सीएम ने सरकार पर सारंडा में बसे लाखों आदिवासी परिवारों को धोखा देने का आरोप लगाया. यहां चल रहीं खनन कंपनियों को बचाने के लिए सरकार तुरंत सुप्रीम कोर्ट पहुंच गयी, लेकिन सारंडा में हजारों वर्षों से बसे लाखों आदिवासियों के बारे में इनके मुंह से एक शब्द नहीं निकला. हमारा विरोध वाइल्ड लाइफ सेंचुरी से नहीं है, लेकिन इन लाखों आदिवासियों का क्या कसूर है? राज्य सरकार उन्हें उजाड़ने पर क्यों आमदा है?

नोवामुंडी में 850 एकड़ जमीन बिना ग्रामसभा के कंपनी को क्यों दी?

कैबिनेट की जिस बैठक में सरकार ने पेसा अधिनियम को स्वीकृति दी. उसी बैठक में बिना ग्राम सभा की अनुमति के नोवामुंडी में 850 एकड़ से अधिक जमीन हिंडाल्को को दी गयी. उन्हें कोल ब्लॉक पलामू प्रमंडल में आवंटित किया गया है, तो वन क्षति की भरपाई कोल्हान के शेड्यूल एरिया में क्यों की जा रही है? उस भूमि पर आदिवासी हजारों वर्षों से खेती करते हैं, वहां देशाउली है, सरना स्थल है.

राज्य में आदिवासी समाज को खत्म करने की साजिश

राज्य में बांग्लादेशी घुसपैठियों व धर्मांतरण की मार झेल रहे आदिवासी समाज को खत्म करने की साजिश रच रही है. सरकार कोई कदम नहीं उठी रही है. इसके पहले चाईबासा पहुंचने पर तांबो चौक समेत कई स्थानों पर नो एंट्री आंदोलनकारियों व अन्य संगठनों ने पूर्व मुख्यमंत्री का स्वागत किया. इस दौरान सेरेंगसिया शहीद स्मारक समिति के अध्यक्ष महेन्द्र लागुरी व समर्थक मौजूद रहे.

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