चक्रधरपुर. इस बार चक्रधरपुर नगर परिषद अध्यक्ष पद को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गयी है. राज्य सरकार की हालिया अधिसूचना के बाद इस पद को अनुसूचित जनजाति (अन्य) वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया है. आरक्षण की घोषणा के बाद सामान्य और ओबीसी वर्ग के कई दावेदार पीछे हट गये हैं, जिससे राजनीतिक निगाहें अनुसूचित जनजाति वर्ग के संभावित प्रत्याशियों पर टिक गयी हैं. राजनीतिक गलियारों में कई लोगों के नाम चर्चा में है. इनमें उदय मांझी सिंहभूम की सांसद जोबा मांझी के दूसरे पुत्र और विधायक जगत मांझी के छोटे भाई हैं. पारिवारिक विरासत, संगठनात्मक पकड़ और क्षेत्र में प्रभाव के चलते उन्हें इस चुनाव में मजबूत दावेदार माना जा रहा है. वहीं सन्नी उरांव भी मैदान में सक्रिय हैं. वे चक्रधरपुर से विधायक सुखराम उरांव के सुपुत्र हैं और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के चक्रधरपुर प्रखंड अध्यक्ष के रूप में संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. वहीं कांग्रेस की ओर से अनुप्रिया सोय दिवंगत सांसद विजय सिंह सोय की सुपुत्री भी प्रमुख दावेदार मानी जा रही हैं.
महागठबंधन और भाजपा में रणनीति
उदय मांझी, सन्नी उरांव और अनुप्रिया सोय सभी महागठबंधन की पार्टियों से जुड़े हैं. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि तीनों के मैदान में उतरने से मुकाबला कड़ा और दिलचस्प होगा. हालांकि, आपसी वोट बंटवारे से बचने के लिए महागठबंधन किसी एक नाम पर सहमति भी कर सकता है. भाजपा खेमे में भी हलचल है. चर्चा में हैं पूर्व सांसद लक्ष्मण गिलुवा की पत्नी मालती गिलुवा और दिवंगत विधायक जगन्नाथ बांकिरा के सुपुत्र रवि बांकिरा, जिन्हें भाजपा समर्थित उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है. फिलहाल नगर परिषद चुनाव की औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है. लेकिन राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरम है. इस बार का चुनाव न केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित रहेगा, बल्कि राजनीतिक वंशवाद, संगठनात्मक ताकत और व्यक्तिगत प्रभाव की परीक्षा भी साबित होगा.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

