एक करोड़ के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा दस्ते के साथ पश्चिमी सिंहभूम में पुलिस-नक्सली मुठभेड़, 5 जवान घायल
Published by : Samir Ranjan Updated At : 01 Dec 2022 10:50 PM
पश्चिमी सिंहभूम के टोंटो और गोइलकेरा सीमा में एक करोड़ के नक्सली मिसिर बेसरा दस्ते से हुई मुठभेड़ में कई नक्सली कैंप को ध्वस्त किया गया, वहीं इस हमले में पांच जवान घायल हो गये. घायल सभी जवान को एयरलिफ्ट कर बेहतर इलाज के लिए रांची भेज दिया गया. सभी घायल जवान की स्थिति बेहतर है.

पश्चिमी सिंहभूम जिला अंतर्गत टोंटो और गोइलकेरा सीमा गुरुवार (एक दिसंबर, 2022) को कोबरा 209 बटालियन (Cobra 209 Battalion) और झारखंड पुलिस (Jharkhand Police) जवानों की नक्सलियों के साथ करीब एक घंटा तक दो बार हुई मुठभेड़ में सैकड़ों राउंड गोलियां चली. इस दौरान पुलिस ने नक्सलियों के कई कैंप को ध्वस्त किया. वहीं, इस मुठभेड़ में पांच जवान घायल हो गये. सभी घायल जवानों को बेहतर इलाज के लिए एयरलिफ्ट से रांची लाया गया. सभी घायल जवान कोबरा 209 बटालियन के हैं.

जानकारी के अनुसार, कोल्हान जंगल के टोंटो और गोइलकेरा के सीमा क्षेत्र में कोबरा बटालियन नक्सलियों के खिलाफ सर्च अभियान चला रही थी. जैसे ही कोबरा जवान एवं पुलिस बल लोवाबेड़ा और तिलायबेड़ा के पास पहुंची, नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी. फायरिंग होते ही कोबरा बटालियन और पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई करते फायरिंग शुरू कर दी. सूत्रों के अनुसार, सबसे पहले सुबह करीब 8.30 बजे तिलायबेड़ा में मुठभेड़ हुई. इसके बाद अभियान चला रहे जवानों की करीब 11.30 बजे लोवाबेड़ा जंगल के पास नक्सलियों के साथ दोबारा मुठभेड़ हो गयी. इस दौरान कोबरा के पांच जवानों को गोली लगी है. सभी को बेहतर इलाज के एयरलिफ्ट कर रांची ले जाया गया. सभी जवान खतरे से बाहर बताये गये हैं. इस दौरान नक्सलियों को भी भारी नुकसान होने की खबर है. पुलिस बल ने मुठभेड़ स्थल के पास लगे नक्सलियों के कैंप को भी ध्वस्त कर दिया है.

पश्चिमी सिंहभूम एसपी आशुतोष शेखर ने बताया कि घायल जवानों के मुताबिक नक्सलियों को भी काफी नुकसान हुआ है. उन्होंने बताया कि दुगर्म क्षेत्र होने के कारण कठिनाईयों का सामना करते हुए पुलिस बल द्वारा बेहतर जवाबी कार्रवाई की गई है. अभियान देर शाम तक जारी था.

सूत्रों के अनुसार, टोंटो और गोइलकेरा के जिस सीमा क्षेत्र में पुलिस और सुरक्षाबल के बीच मुठभेड़ हुई है, वहां मौजूदा समय में एक करोड का इनामी माओवादियों के सैक सदस्य मिसिर बेसरा, 25 लाख का इनामी अजय दा और अलमोल दा का दस्ता रहा है. कयास लगाया जा रहा है कि इस दस्ते में 40 से भी ज्यादा नक्सली मौजूद थे.

जानकारी के अनुसार, जिला पुलिस को कोल्हान रेंज में टोंटों और गोईलकेरा थाना के सीमावर्ती क्षेत्र में लोवाबेड़ा और तिलयबेड़ा गांव के समीप भाकपा (माओवादी) नक्सलियों के काफी संख्या में होने और किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की सूचना मिली थी. इस सूचना के आधार पर एसपी ने कोबरा 209 बटालियन, झारखंड जगुआर की 205 बटालियन, सीआरपीएफ 60 बटालियन के टीमों की एक संयुक्त अभियान दल गठित किया. इस अभियान के तहत कोबरा, जगुआर बटालियन एवं सीआरपीएफ के सुरक्षा बलों ने सुबह करीब 8.15 बजे से 8.30 बजे के बीच पुलिस बल को देखते हुए नक्सलियों द्वारा अंधाधुंध फायरिंग शुरू की दी. इस पर पुलिस बल द्वारा जवाबी कार्रवाई करते हुए गोलीबारी की. इस जवाबी फायरिंग में पुलिस बल को भारी पड़ता देख माओवादी घने जंगल की ओर भाग खड़े हुए.

इसके बाद दोबारा सर्च अभियान शुरू किया गया, जिसमें करीब 11 बजे से 11.30 बजे के बीच नक्सलियों द्वारा पुलिस बल को निशाना बनाने के लिए फायरिंग शुरू कर दी. इस पर पुलिस बल ने जवाबी कार्रवाई की. वहीं, पुलिस बल को भारी पड़ता देख नक्सली दोबारा क्षेत्र छोड़कर भाग खड़े हुए. एसपी श्री शेखर ने बताया कि दोनों ओर से करीब आधा घंटा तक फायरिंग होते रही, जिसमें तीन पुलिसकर्मी को गोली लगी है और दो जवान स्पलिंटर लगने से घायल हुए हैं. पुलिस बल द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस मुख्यालय रांची के सहयोग से हेलीकॉप्टर के माध्यम से तत्काल प्राथमिकी उपचार के बाद सभी जख्मी जवानों को बेहतर इलाज के लिये रांची ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है. सभी घायल जवान सुरक्षित हैं.
घायल पांच पुलिसकर्मियों के नाम
– सीटीजीडी सुरज कुमार
– सीटीजीडी सुशील लकड़ा
-सीटीजीडी कृष्णानाथ बोखर
– सीटी / जीडी बुद्धदेव किसान
– सीटी/ डॉग हेंडलर संदीप एम

मालूम हो कि कोल्हान सुरक्षित वन क्षेत्र टोंटो के जिस सरजोमुरू जंगल में मुठभेड़ हुई है, वह भाकपा माओवादी नक्सलियों के लिए सुरक्षित जोन माना जाता रहा है. यहां कई इनामी नक्सली भी मौजूद हैं. हाल ही में सैयतवा गांव में सुरक्षा बलों का कैंप बना है. बावजूद यहां की भौगोलिक स्थिति नक्सलियों के छुपने एवं भागने में काफी मददगार साबित होती है. इससे पूर्व तत्कालीन एसपी अजय लिंडा के समय भी आठ दिसंबर, 2020 को भी पुलिस-नक्सली के बीच भीषण मुठभेड़ हुई थी.

उस समय भी कोबरा बटालियन और सीआरपीएफ के सुरक्षा बलों को भारी पड़ते देख नक्सली घने जंगल का फायदा उठाते हुए भाग निकले थे. कोल्हान के टोंटो का एक बड़ा क्षेत्र गोईलकेरा एवं झींकपानी से सटा है. वहीं, चाईबासा से भी कुछ हिस्सा सटा है. कहा जा रहा है कि कोल्हान क्षेत्र राजाबासा, झिरझोर, बुरूराईका, तुईबेड़ा, सांगाजाटा, बोरोई, पाटूंग, अगरवां, आकाहाटा, कदालसोपवा आदि गांव के जंगलों में नक्सलियों की गतिविधियां हमेशा बनी रहती है.
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By Samir Ranjan
Senior Journalist with more than 20 years of reporting and desk work experience in print, tv and digital media
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