Chaibasa News : 150 साल से जंजीरों में बंधे हैं भगवान, रोज होती है पूजा

नरसिंह बाबा ने 1850 के दशक में लक्कड़ बाबा को स्थापित किया था
मनोहरपुर. मनोहरपुर में संत नरसिंह आश्रम अपने आप में अध्यात्म और श्रद्धा का अटूट केंद्र है. इस आश्रम में एक भगवान ऐसे भी हैं, जो पिछले 150 साल से जंजीरों से जकड़े हैं. मनोहरपुर में कोयल नदी के तट पर अवस्थित नरसिंह आश्रम के मुख्य द्वार पर विगत 150 से ज्यादा सालों से लकड़ी के तने के आकार के रूप में स्थापित एक भगवान जंजीरों में बंधे हुए हैं. लोग इसी रूप में उनकी पूजा भी करते हैं. मान्यता है कि यहां मन्नत मांगने वालों की मुरादें अवश्य पूरी होती हैं. स्थानीय लोग इन्हें तबसे लक्कड़ बाबा के नाम से मानते आ रहे हैं. इन्हें नरसिंह बाबा ने ही स्थापित किया था. नरसिंह आश्रम के पुजारी श्रीकृष्ण शुक्ल के अनुसार 1850 के दशक में इन्हें नरसिंह बाबा ने स्थापित किया था
स्थापना की कहानी :
संत नरसिंह आश्रम के मूल पुजारी श्रीकृष्ण शुक्ल के अनुसार 1850 के दशक में इन्हें नरसिंह बाबा ने स्थापित किया था. इसके पीछे की कहानी के अनुसार एक बार बरसात में नरसिंह बाबा कोयल नदी के किनारे स्नान करने गये. तब उन्होंने एक पेड़ को बहते पाया. उन्होंने उस पेड़ को नदी से निकालकर आश्रम ले आये. पेड़ की प्राण-प्रतिष्ठा कर आश्रम के मुख्य द्वार पर स्थापित कर दिया. लक्कड़ बाबा को नरसिंह बाबा ने वहां दरबान के रूप में स्थापित किया, ताकि वे आश्रम आने- जानेवाले लोगों पर नजर रख सकें. ऐसी किंवदंती है कि उस वक्त जो भी लोग जूते-चप्पल पहनकर आश्रम में प्रवेश करता था, उसे डंडा फेंक कर लक्कड़ बाबा दंडित किया करते थे. यह डंडा आज भी लक्कड़ बाबा की पीठ पर बंधा है. लक्कड़ बाबा की लकड़ी की प्रजाति का भी आज तक पता नहीं चल पाया है. तब से लेकर आज तक भगवान उसी अवस्था में स्थापित हैं.जंजीरों से जकड़े होने की वजह :
पुजारी के मुताबिक लक्कड़ बाबा उस जमाने में आश्रम के अलावा पूरे मनोहरपुर का भ्रमण करते थे. यहां के लोग अपने पूर्वजों के हवाले से बताते हैं कि उन्हें मनोहरपुर में भ्रमण करते उनके पूर्वजों ने देखा भी था. लक्कड़ बाबा के रूप को देख लोग भयभीत हो जाते थे. यह जानकर नरसिंह बाबा ने उन्हें जंजीरों से बांधकर द्वार पर पुनर्स्थापित कर दिया. इसके बाद भी लक्कड़ बाबा की आस्था कभी कम नहीं हुई है.एक प्रखर योगी थे नरसिंह बाबा
नरसिंह बाबा के बारे में अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल पाया है. लोगों के मुताबिक वे एक प्रखर योगी और स्वतंत्रता सेनानी थे. 1857 के सिपाही विद्रोह के दौरान वे 24 साल की अवस्था में अमृतसर से मनोहरपुर आये. यहां उन्हें पुराना मनोहरपुर राज परिवार द्वारा करीब 8 से 10 एकड़ जमीन दान में दी गयी. जमीन पर आश्रम की स्थापना की. वे काफी चमत्कारी भी थे. उनके चमत्कार की कहानियां आज भी लोग याद करते हैं. आश्रम में उन्होंने कई तरह के फलदार, फूलदार व मसालों के पेड़ भी लगाये थे. कहा तो यह भी जाता है कि नरसिंह बाबा ने नाग – नागिन का जोड़ा भी पाल रखा था. नागिन के माथे पर सिंदूर व नाक में नथनी भी होते थे. इसके अलावा अन्य कई कारणों से यह आश्रम डेढ़ दशक से ज्यादा समय से विख्यात है. ऐसी मान्यता है कि 108 सुपारियों को जलाकर उसकी राख को घी के साथ मिलाकर उसका लेप लक्कड़ बाबा को लगाने से लोगों की मन्नतें पूरी होती हैं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




