20 साल से बदहाल सड़क पर चलने को मजबूर 25 हजार लोग, बारिश में 12 गांवों का हाल और बिगड़ा

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बारिश में कीचड़

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गोइलकेरा की गम्हरिया पंचायत में 20 वर्षों से सड़क जर्जर है.12 गांवों के 25 हजार लोग कीचड़ और धूल भरी राह पर चलने को मजबूर हैं. प्रशासन से निर्माण की मांग.

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बारिश होते ही सड़क तालाब में बदल जाती है. बच्चे कीचड़ से होकर स्कूल जाते हैं. मरीजों को अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है और किसान अपनी उपज बाजार तक नहीं ले जा पाते. गोइलकेरा प्रखंड के 12 गांवों के करीब 25 हजार लोग पिछले 20 वर्षों से इसी परेशानी के साथ जीवन बिता रहे हैं. अब ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क निर्माण का काम चाहिए.

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बारिश में कीचड़, धूप में धूल से परेशान ग्रामीण

गम्हरिया पंचायत को प्रखंड मुख्यालय से जोड़ने वाली यह सड़क लंबे समय से बदहाल है. सड़क की ऊपरी परत कई जगहों से उखड़ चुकी है और रास्ता गड्ढों में तब्दील हो गया है. बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भर जाता है, जबकि गर्मी और शुष्क मौसम में वाहनों के गुजरने से धूल उड़ती है.

इस सड़क से जोहरपता, कातुएदल, चातोमउली, कारा, पोपोगोदा, खजुरिया, गम्हरिया, रेला, बाड़गुवा, कुमारतोड़ांग और रायरोवा समेत करीब 12 गांव जुड़े हुए हैं. लगभग 25 हजार लोगों की आवाजाही इसी सड़क पर निर्भर है.

स्कूली बच्चों और मरीजों के लिए बढ़ी परेशानी

बारिश के दिनों में सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है. कीचड़ से भरे रास्तों से होकर स्कूल पहुंचना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है. कई बार बच्चों के जूते और कपड़े पूरी तरह खराब हो जाते हैं.

स्वास्थ्य सेवाओं पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है. कई बार एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती. गंभीर मरीजों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को मुख्य सड़क तक ले जाने में काफी दिक्कत होती है.

किसानों को भी हो रहा नुकसान, ग्रामीणों ने उठाई आवाज

कारा समेत आसपास के अधिकांश गांवों के लोग खेती पर निर्भर हैं. किसान अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने के लिए इसी सड़क का उपयोग करते हैं. सड़क खराब होने के कारण परिवहन प्रभावित हो रहा है और किसानों का खर्च भी बढ़ रहा है.

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सड़क निर्माण की मांग की है. ग्रामीण सुखराम चंपिया, दुराय चांपिया, मंगीलाल सोय, बेहरा नाग, सीताराम नाग और रुइदास अंगारिया ने कहा कि वर्षों से इस समस्या को लेकर आवाज उठाई जा रही है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया है.

ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क सिर्फ आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और किसानों की आजीविका से भी जुड़ी हुई है. ऐसे में अब लोगों को सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क निर्माण का काम शुरू होने का इंतजार है.


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