मझगांव. पश्चिम सिंहभूम जिले के मझगांव प्रखंड में खौफ का पर्याय बन चुका दंतैल हाथी शुक्रवार रात आठ बजे से लापता है. यह वही हाथी है जिसने अभी तक क्षेत्र में 20 लोगों को अपना शिकार बना चुका है. ताजा घटनाक्रम में शुक्रवार को तिलोकुटी गांव में इस हाथी ने जमकर कोहराम मचाया और तीन लोग दामोदर कुलडी (हल्दिया), प्रकाश दास (बेनीसागर) और सुखलाल बेसरा (बांकुड़ा, प. बंगाल) को कुचलकर मार डाला था. हाथी को पकड़ने के लिए सीसीएफ स्मिता पंकज के नेतृत्व में वन विभाग की टीम लगी हुई है. रविवार शाम 4:30 बजे तक झारखंड-ओडिशा सीमा पर ड्रोन कैमरों से सघन तालाशी अभियान चलाया गया, पर घने जंगलों के बीच हाथी का कोई सुराग नहीं मिला. फिलहाल आला अधिकारियों की टीम खड़पोस-पोनडुवाबुरु क्रशर के पास डेरा डाले है. विभाग की इस विफलता से ग्रामीणों में आक्रोश और भय बढ़ता जा रहा है.
गांवों में सन्नाटा, मुखिया के घर ””कैंप”” :
हाथी के डर से जंगल से सटे गांवों के लोग अपने घरों को छोड़ने पर विवश हैं. खड़पोस पंचायत की स्थिति सबसे भयावह है. यहां मुखिया प्रताप चातार के घर में लगभग 300 ग्रामीणों ने शरण ले रखी है. मुखिया के अनुसार लोग इतने डरे हुए हैं कि उन्हें घर वापस भेजने का भरोसा दिला पाना मुश्किल हो रहा है.रेस्क्यू टीम में शामिल अधिकारी
चाईबासा डीएफओ आदित्य नारायण, जमशेदपुर कंजरवेटिव सबहा अंसारी, रेंजर जितेंद्र प्रसाद, अंचल अधिकारी विजय हेमराज खालको और पश्चिम बंगाल से आई एक्सपर्ट टीम लगातार स्थिति पर नजर बना कर रखी है.ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर
ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर है. उनका कहना है कि जब 1 जनवरी से ही हाथी लोगों को मार रहा था, तो वन विभाग ने उसे रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किया. 20 लोगों की जान लाने के बाद भी विभाग अब तक केवल ””””ड्रोन”””” और ””””अंधेरे में सर्च ऑपरेशन”””” के भरोसे बैठा है.हाथी से छेड़छाड़ न करें ग्रामीण : वन विभाग
हाथियों को भागने के लिए ग्रामीणों को खुद रिस्क उठाना पड़ता है. इसी क्रम में ग्रामीण अपनी जान गंवा रहे हैं. हाथी देखने के लिए उमड़ी भीड़ से शरारती तत्व हाथियों को छेड़ते हैं. इससे हाथी हिंसक हो जाता है. रिल बनाने वाले भी अक्सर हाथियों के साथ छेड़छाड़ करते हैं. इससे हाथी भड़क कर लोगों पर वार कर देता है. वन विभाग ने जिला प्रशासन से हाथी प्रभावित क्षेत्र में भीड़ पर नियंत्रण रखने के लिए निषेधाज्ञा लगाने की मांग की है. वन विभाग ने ग्रामीणों को हाथी से छेड़छाड़ नहीं करने की अपील की है.पश्चिम सिंहभूम जिले में एक दंतैल हाथी ””””यमराज”””” बनकर घूम रहा है. 1 जनवरी से शुरू मौत का यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. टोंटो से शुरू होकर गोइलकेरा, नोवामुंडी और अब मझगांव तक हाथी ने 20 लोगों की जान ले ली है. वन विभाग की सुस्ती को देखते हुए ग्रामीणों ने अब अपनी सुरक्षा का जिम्मा खुद उठा लिया है. कई गांवों में युवाओं की टोलियां बनायी गयी हैं. मशाल और लाठी-डंडों के साथ रातभर जागकर पहरा दे रहे हैं. ग्रामीणों का दावा है कि हाथी को अंतिम बार ओडिशा सीमा से 10 किमी भीतर देखा गया था, जबकि विभाग इसकी पुष्टि नहीं कर पा रहा है.
9 दिन में 20 मौतें : पश्चिमी सिंहभूम में दंतैल हाथी का ””खूनी सफर””
01 जनवरी को
बांडीजारी, बनई व रोरो गांव में मंगल सिंह देवगम (34), हुरदप (55) और विष्णु सुंडी की हत्या, दो लोग घायल03 जनवरी को
कितापी (गोइलकेरा) गांव में महिला चंपाई कुई (47) को कुचला, पति और पुत्र घायल.04 जनवरी को
केंदुकोचा गांव में जोंगा कुई (56) नामक महिला की हाथी के हमले से मौत.05 जनवरी को
सोवां व कुइलीसुता गांव में एक ही परिवार के 3 लोग कुंदरा बहांदा, 6 वर्षीय बेटी कोदमा और 9 माह की मासूम सामू को मार डाला. इसी रात जगमोहन सवैयां (22) को घसीटकर मार डाला. 02 जनवरी को गोइलकेरा में सो रहे मंदरु कयोम (36) को मार डाला, 13 वर्षीय पुत्र घायल.06 जनवरी को
नोवामुंडी प्रखंड की बाबरिया व उलीसाई बाबरिया में एक ही परिवार के 4 लोगों को सनातन मेराल, पत्नी जोलको, 5 वर्षीय मुंगुरू और 8 वर्षीय दमयंती की मौत. उलीसाई में गुरुचरण, मंगल बोबोगाऔर चंपी की जान गयी.09 जनवरी को
तिलोकुटी (मझगांव) दामोदर कुलड़ी, प्रकाश दास और सुखलाल बेसरा को मौत के घाट उतारा.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

