गुवा.
सारंडा वन क्षेत्र स्थित बोंगा मांडा स्थल पर मकर संक्रांति के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही. गुरुवार को आदिवासी समाज व अन्य समुदाय के लोगों ने भगवान राम, माता सीता व वीर हनुमान के पवित्र पदचिह्नों पर विधिवत पूजा-अर्चना की. इसके साथ ही श्रद्धालुओं ने कारो नदी में आस्था की डुबकी लगाकर सुख-समृद्धि की कामना की. मान्यता है कि रामायण काल में भगवान राम, माता सीता व लक्ष्मण अपने 14 वर्षों के वनवास के दौरान सारंडा के इसी जंगल क्षेत्र में स्थित बोंगा मांडा में कुछ समय तक ठहरे थे. यहां स्थित पत्थर पर भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण व हनुमान जी के पदचिह्न अंकित हैं, जिन्हें श्रद्धालु पवित्र मानते हैं. प्रत्येक वर्ष मकर संक्रांति पर 14 व 15 जनवरी को आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना करते हैं. इस पूजा के माध्यम से वे अपने परिवार, गांव व क्षेत्र की रक्षा, सुख-शांति और खुशहाली की कामना करते हैं. बोंगा मांडा में यह दो दिवसीय धार्मिक आयोजन आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बना हुआ है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

