फुसरो नगर परिषद क्षेत्र के आदिवासी गांव ताराबेड़ा में प्रकृति पर्व सोहराय धूमधाम से मनाया गया. शनिवार को गोठ पूजा के साथ पर्व शुरू हुआ. रविवार को गोहाल पूजा हुई और सोमवार को बरदखुंटा के साथ संपन्न हुआ. इस दौरान ढोल-नगाड़े की थाप पर युवक-युवतियाें ने परंपरागत नृत्य किया.
मुख्य अतिथि विस्थापित नेता कैलाश ठाकुर ने कहा कि यह पर्व धान की कटनी के बाद मनाया जाता है. हमें अपनी परंपरा और संस्कृति पर गर्व होना चाहिए और आने वाली पीढ़ी को इससे परिचय कराना चाहिए. मौके पर आदिवासी नेता जितेंद्र टुडू, वीरेंद्र टुडू, कालीचरण टुडू, जुगल मांझी, देवचंद टुडू, सुरेश टुडू, श्यामलाल मांझी, पैरवी देवी, अनिता देवी, मंजू देवी, संगीता कुमारी, मनीषा टुडू, सरिता टुडू, पुनम टुडू, खुशबू टुडू, प्रतिमा टूडू, अनिता कुमारी, मुनिया देवी, सुरेंद्र टुडू, अंजलि टुडू, अंकू मरांडी, आंबावती देवी, सरोजमुनी कुमारी आदि मौजूद थे.तिलैया में सोहराय मिलन समारोह 12 को
लुगुबुरु ओलचिकी इतुन आसड़ा, तिलैया (ललपनिया) की ओर से 12 जनवरी को सोहराय मिलन समारोह का आयोजन किया जायेगा. यह निर्णय आसड़ा परिसर में अध्यक्ष रामकुमार सोरेन की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया. उन्होंने कहा कि आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को पारंपरिक व समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराना और जोड़े रखना है. सोहराय में 12 प्रकार के पारंपरिक लोकनृत्य होते हैं. बैठक में आयोजन को लेकर 20 सदस्यों की टीम भी गठित की गयी. फरवरी माह के अंत में विद्यार्थियों व शिक्षकों के लिए पुरुलिया स्थित संताल आदिवासियों के धार्मिक व ऐतिहासिक स्थल अयोध्या पहाड़ का शैक्षणिक भ्रमण कराने का भी निर्णय लिया गया. बैठक में किशोर मरांडी, गौतम सोरेन, जीवन किस्कू, जितेंद्र सोरेन, रामवृक्ष टुडू, लालू सोरेन, रेणुका बेसरा, खुशबू मुंडा, मंजू कुमारी आदि थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

