Bokaro News : सेहरा बनाने वालों की हुनर को नहीं मिल रहा सही दाम

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Bokaro News : सेहरा  बनाने वालों की हुनर को नहीं मिल रहा सही दाम

Bokaro News : चास में सेहरा बनाने वालों की हुनर को सही दाम नहीं मिल पा रहा है.

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चास प्रखंड के गोपालपुर, कुरा, पुंडरू और संथालडीह गांव के दर्जनों परिवार दूल्हे का सेहरा यानी मोर बनाने का काम कर रहे हैं. लेकिन मांग और उचित बाजार नहीं मिलने के कारण इन्हें मेहनत और कारीगरी का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है. बाजार का रेडीमेड सेहरा व पगड़ी ने भी इनका काम प्रभावित किया है. इसके कारण कई कारीगर अन्य काम करने को विवश हैं. हरिराम गोस्वामी, मधु गोस्वामी, साधु गोस्वामी, मकर गोस्वामी, चक्रधर गोस्वामी, रवींद्र नाथ गोस्वामी, सहदेव गोस्वामी, हेमंत गोस्वामी, भोजू गोस्वामी, नकुल गोस्वामी, प्रशांत गोस्वामी आदि कारीगरों का कहना है कि एक मुकुट यानी दूल्हे का सेहरा बनाने में 130 रुपये की लागत आती है और उसे हमलोग 200 रुपये में ही बेच पाते हैं. एक मुकुट को बनाने में लगभग तीन घंटे का समय लगता है. मुकुट का सामान लोकल मार्केट में काफी महंगा मिलता है. इसलिए बाहर से ही मंगाते हैं. साल भर में केवल आठ महीने ही मुकुट बनाने का काम चलता है. बाकी समय पर मूर्तियों के पोशाक बनाते हैं. इसमें भी सही मूल्य नहीं मिल पाता है.

क्या कहते हैं कारीगर

शंकर गोस्वामी ने कहा कि यह हमलोगों का पारंपरिक काम है. रोजगार का एकमात्र साधन भी है. इसलिए पूरी लगन और मेहनत के साथ करते हैं. लेकिन मेहनत के अनुसार में दाम नहीं मिल पाता है. सहदेव गोस्वामी ने कहा कि मुकुट और मूर्तियों का पोशाक बनाने का सामान भी महंगा हो गया है. इससे लागत ज्यादा हो जाता है. उस अनुसार दाम नहीं मिल पाता है. बंगाल जाकर अपना सामान को दुकानदार को देना पड़ता है.

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Janak Singh Choudhary

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