Bokaro News : सोनाडाली से लेकर विशुघाट पहाड़ तक लगी है भीषण आग

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Bokaro News : सोनाडाली से लेकर विशुघाट पहाड़ तक लगी है भीषण आग

Bokaro News : हर साल लाखों रुपये पेड़ लगाने में हो जाते हैं खर्च, पर आग से बचाव की व्यवस्था नहीं

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Bokaro News : बोकारो जिले में वन क्षेत्र को विकसित करने के लिए प्रत्येक साल लाखों रुपये पेड़ लगाने में खर्च किये जाते हैं, लेकिन हर वर्ष जंगलों में लगने वाले आग से सैकड़ों पेड़ जल जा रहे हैं. आग से बचाव की मुकम्मल व्यवस्था नहीं हो पाती है. प्रत्येक साल अप्रैल-मई माह में जंगलों में भीषण आग लगती है और पूरा वन क्षेत्र जलकर नष्ट हो जाता है. इस वर्ष भी पिछले कई दिनों से चंद्रपुरा प्रखंड के सोनाडाली पहाड़ से लेकर मथुराहिर-विशुघाट पहाड़ तक भीषण आग लगी हुई है. पिछले दो-तीन दिनों में कई किलोमीटर तक आग का दरिया बढ़ चुका है. शाम ढलते ही आग की भयावह लपटें दूर-दूर तक दिखायी पड़ रही है. रोजाना हजारों पेड़-पौधे जलकर मर रहे हैं. चंद्रपुरा-फुसरो सड़क मार्ग में सोनाडाली पहाड़ स्थित है. राजाबेड़ा से लेकर भंडारीदह तक लगभग तीन-चार किलोमीटर वन क्षेत्र में जगह-जगह आग लगी हुई है. वहीं विशुघाट पहाड़ी इलाका तारमी पंचायत के हेठबेड़ा गांव से सटा है. इस पहाड़ में भी धीरे-धीरे आग बढ़ती जा रही है. वन विभाग अगर समय रहते स्थानीय ग्राम पंचायतों व ग्रामीणों के सहयोग से इसे बुझाने का प्रयास करता तो आग पर समय रहते काबू पाया जा सकता था. यह वन क्षेत्र बोकारो रेंज के ढोरी वीट में तारमी के अधीन है.

ओवर हिट वेट व महुआ चुनने वाले लगाते हैं आग :

बताया जाता है कि गर्मी में ओवर हिट वेट के कारण भी आग लग जाती है. वहीं कहीं-कहीं महुआ चुनने के दौरान भी जो आग लगायी जाती है, वह ठीक से नहीं बुझाये जाने के कारण भी बाद में बढ़ जाती है. बेरमो वन क्षेत्र में बेरमो, गोविंदपुर व पेक बीट है. जबकि बोकारो रेंज में ढोरी व नावाडीह वन वीट है. नावाडीह व चंद्रपुरा प्रखंड का एक बड़ा भाग वन क्षेत्र है, जिसमें कई स्थानों पर आग लगी है.

अब आग से पनप नहीं पा रहे हैं नये पौधे :

ढोरी सब वीट में तारमी के चंद्रपुरा-भंडारीदह से सटे सोनाडाली व विशुघाट पहाड़ी जगंल के अलावा इन क्षेत्रों में कतरामबेड़ा, गोहालपहरी, धोवाबेड़ा, बगजोबरा, कुकुरमरवा जंगल क्षेत्र है, जो अलग-अलग नामों से जाने जाते है. इन जंगलों में ग्रामीणों द्वारा जंगल रोको अभियान पिछले 10-15 वर्षों से चलाया जा रहा है. इस कारण कोई भी ग्रामीण जंगल में लकड़ी की कटाई नहीं कर सकता है, लेकिन अगलगी के कारण प्रत्येक वर्ष जंगल में जो नये पौधे लगते हैं, वह नष्ट हो जाते हैं. जंगलों में खासकर सखुआ, सीधा, धोवा, पुतर, कारी, महुआ, बांस, शीमल, डोका, करम आदि प्रजाति के पेड़-पौधे हैं. आग से 5-10 फीट तक के छोटे पौधे नष्ट हो रहे हैं.

जंगलों में मोर व जंगली सुअर की भरमार :

सोनाडाली, विशुघाट, कतारामबेड़ा, गोहालपहरी के जंगलों में पिछले 10 सालों में सबसे अधिक मोर की संख्या बढ़ी है. इन जंगलों में हजारों की संख्या में मोर हैं. सुबह-सुबह एक साथ सड़कों पर कई मोर विचरण करते दिख जाते हैं. गांवों तक अब चारे-पानी की तलाश में मोर पहुंचने लगे हैं. इसके अलावा जंगली सुअरों की भी संख्या काफी बढ़ी है. खरगोश, तीतर सहित कई तरह के पशु-पक्षी भी हैं, जो अक्सर दिखे जाते हैं.

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Manoj Kumar

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