Bokaro News : बृहस्पति दोष के कारण आज से बंद हुई शहनाई की गूंज
Published by : JANAK SINGH CHOUDHARY Updated At : 08 Jun 2025 11:10 PM
Bokaro News : गुरु के वृद्धत्व दोष के कारण रविवार की शाम से वैवाहिक कार्यक्रम तथा अन्य धार्मिक कार्यों पर विराम लग गया है.
बोकारो, सनातन धर्मावलंबियों के अनुसार किसी भी धार्मिक तथा मांगलिक कार्य में गुरु बृहस्पति का उदय शुभ माना जाता है. उनके अस्त होने या वृद्धत्व काल में धार्मिक कार्य वर्जित माने गये हैं. इस संबंध में राम मंदिर के पुजारी ज्योतिषाचार्य पं शिव कुमार शास्त्री ने बताया कि गुरु के वृद्धत्व दोष के कारण रविवार की शाम से वैवाहिक कार्यक्रम तथा अन्य धार्मिक कार्यों पर विराम लग गया है. वहीं ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि बुधवार 11 जून से देवगुरु बृहस्पति पश्चिम में अस्त हो रहे हैं. जबकि इनका उदय पूर्व दिशा में 7 जुलाई को होगा. बताया कि देवगुरु बृहस्पति लगभग 1 वर्ष में एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करते हैं. परंतु इस वर्ष गुरु की राशि सामान्य से दोगुनी होगी जिससे गुरु एक व वहीं आषाढ़ शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी रविवार छह जुलाई को भगवान विष्णु शयन मुद्रा में चले जाएंगे. इसके साथ ही चतुर्मास व्रत प्रारंभ हो जाएगा जो चार महीना तक रहेगा. पं शिव कुमार शास्त्री ने बताया कि देवगुरु बृहस्पति धार्मिक और मांगलिक कार्यों का कारक ग्रह है जिनकी उपस्थिति में धार्मिक कार्य सफल माने गए हैं. वैवाहिक कार्यक्रमों में गुरु ग्रह का उदय रहना आवश्यक है. हमारे षोडश संस्कारों में विवाह का बहुत महत्व है. विवाह का दिन एवं लगन निश्चित करते समय ज्योतिषी वर एवं वधू की जन्मपत्रिका के अनुसार सूर्य, चंद्र व गुरु की गोचर स्थिति का ध्यान रखते हैं जिसे त्रिबल शुद्धि कहा जाता है. गुरु के अस्त रहने पर विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, कर्ण छेदन, नासिक छेदन, सगाई, मंदिर प्राण प्रतिष्ठा, द्विरागमन, वधु प्रवेश, यज्ञोपवीत सहित अन्य कार्य करना अशुभ माना गया है. इसलिए गुरु के अस्त होने तथा चातुर्मास प्रारंभ हो जाने के कारण 16 शहनाई की गूंज सुनाई नहीं देगी. धार्मिक व मांगलिक अनुष्ठान बंद रहेंगे. आगामी 2 नवंबर को चातुर्मास की समाप्ति एवं देवोत्थान एकादशी के बाद 17 नवंबर से विवाह कार्य प्रारंभ हो जाएंगे. उन्होंने बताया कि ज्योतिष में बृहस्पति 27 नक्षत्र में पूर्व भाद्रपद विशाखा तथा पुनर्वसु नक्षत्र के स्वामी होते हैं जिस व्यक्ति पर गुरु बृहस्पति की कृपा बरसती है उस व्यक्ति के अंदर सात्विक गुणों का विकास होता है.धन धान्य से ही पूर्ण रहता है.
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