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Teachers Day Special: शिक्षा के सच्चे साधक के रूप में जाने जाते थे शिक्षक अरुण कुमार मुखर्जी

Updated at : 04 Sep 2024 9:09 PM (IST)
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Teachers Day Special: शिक्षा के सच्चे साधक के रूप में जाने जाते थे शिक्षक अरुण कुमार मुखर्जी

स्व मुखर्जी हजारीबाग से बेरमो आए और 1972 में रामविलास में शिक्षक के रूप में योगदान दिया. ऐसे तो वे रसायन शास्त्र के प्रख्यात शिक्षक के रूप में जाने जाते थे, लेकिन हिंदी साहित्य, इंग्लिश लिटरेचर, फिजिक्स, मैथ के अलावे अन्य विषयों के पारंगत शिक्षक के रूप में विख्यात थे.

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Teachers Day Special, राकेश वर्मा : बेरमो कोयलांचल के संडे बाजार निवासी स्व अरुण कुमार मुखर्जी आज भी बेरमो के शिक्षा जगत में शिक्षा के एक सच्चे साधक के रूप में याद किए जाते हैं. मूलतः बंगाल के बारासात निवासी स्व मुखर्जी 70 के दशक के पूर्व बेरमो आए थे. स्व मुखर्जी के फुफेरे भाई चंदन कुमार बनर्जी के पिता साधन कुमार बनर्जी ने उन्हें बेरमो लाया था. बंगाल के बारासात में स्व मुखर्जी के माता पिता के निधन बाद वे बेरमो आ गए.

शिक्षा बिहार से की ग्रहण, तीसरा स्थान किया था प्राप्त

बेरमो आने के कुछ वर्षो तक अपनी मैट्रिक तक की शिक्षा बिहार से पूरी की. उनके परिजन बताते हैं कि अपने जमाने में वे उस वक्त बिहार माध्यमिक बोर्ड की परीक्षा में पूरे बिहार में तीसरा स्थान प्राप्त किया था. मैट्रिक की परीक्षा पास करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए वे बंगाल के बहरामपुर चले गए. यहां से उन्होंने एमएससी तक की शिक्षा ग्रहण की. पुनः बेरमो लौटे और हजारीबाग में एक सरकारी विद्यालय में शिक्षक के रूप में योगदान दिया. हजारीबाग में ही उनकी मुलाकात बेरमो के प्रतिष्ठित रामविलास उच्च विद्यालय के प्राचार्य बीएन प्रसाद से हुई. प्रसाद स्व मुखर्जी के शैक्षणिक माहौल से काफी प्रभावित हुए और उन्होंने रामविलास उच्च विद्यालय में शिक्षक के रूप में योगदान देने का आग्रह किया.

सभी विषयों में है थे पारंगत

स्व मुखर्जी हजारीबाग से बेरमो आए और 1972 में रामविलास में शिक्षक के रूप में योगदान दिया. ऐसे तो वे रसायन शास्त्र के प्रख्यात शिक्षक के रूप में जाने जाते थे, लेकिन हिंदी साहित्य, इंग्लिश लिटरेचर, फिजिक्स, मैथ के अलावे अन्य विषयों के पारंगत शिक्षक के रूप में विख्यात थे. रामविलास उच्च विद्यालय में 1972 से 1980 तक वे बतौर शिक्षक के रूप में पदस्थापित रहे. अचानक उनकी तबियत बिगड़ने के बाद उन्होंने शिक्षक का पद छोड़ अपने संडे बाजार निवास स्थान पर आराम करने लगे. काफी तबियत खराब होने के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपने आप से दूर नहीं रखा और साधक के रूप में बच्चों में सामाजिक बदलाव के प्रेरणा के उद्देश्य से ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया.

गरीब और असहाय बच्चों को पढ़ाते थे ट्यूशन

संडे बाजार दुर्गा मंडप के अलावा अपने घर में सुबह से देर रात तक गरीब, असहाय और शिक्षा के प्रति जागरूक बच्चों की टीम बनाकर उन्हें कोचिंग देना शुरू किया. सुबह आठ बजे से उनका कोचिंग क्लास शुरू होता था जो रात नौ-दस बजे तक चलता थे. उनसे शिक्षा ग्रहण करने वाले उस दौर के लोग बताते हैं कि बच्चों को शिक्षा के प्रति सजग करने को वे अहले सुबह चार-साढ़े चार बजे आसपास के बच्चों के घर जाकर उन्हें जगाते थे और बैठकर पढ़ने को कहते थे. उनकी शैक्षणिक शैली ज्यादातर मौखिक हुआ करती थी. लेकिन विषयों पर कमांड इतना कि बच्चों की मानस पटल पर उनकी बातें अंकित हो जाती थी. इधर तबियत खराब होने के बाद भी रामविलास उच्च विद्यालय से उनका नाता नहीं टूटा. तत्कालीन प्राचार्य ललित मोहन सिंह ने उन्हें स्कूल के बगल में हीं एक कलर्क महेश बाबू के घर में कमरा दिलवा दिया. जहां पर वो स्कूल की अवधि तक स्कूल को पढ़ाने वाले अन्य शिक्षकों को शैक्षणिक सलाह और गाइडलाइन दिया करते थे.

अरुण जी के कई छात्र आज उच्च पदों में हैं

1989 में उनका निधन हुआ. लेकिन उनके पढ़ाए हुए सैंकड़ों बच्चे आज कई उच्च पदों पर कार्य कर रहे हैं. उनसे शिक्षा ग्रहण करने वाले कई लोग बातचीत के क्रम में कहते हैं अब अरुण कुमार मुखर्जी जैसे शिक्षा के सच्चे साधक कहां मिलते हैं. अब तो शिक्षा पूरी तरह से प्रोफेसनल हो गया है. स्व मुखर्जी के एक भाई तरुण कुमार मुखर्जी बंगाल के एक सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल और होमियोपैथी के डॉक्टर रहे.

हिंदी के सच्चे साधक थे भैया मनोरंजन

राम बिलास उच्च विद्यालय के हिंदी शिक्षक भैया मनोरंजन हिंदी के सच्चे साधक थे. हिंदी के प्रखर शिक्षक के रूप में ख्याति अर्जित करने वाले भैया मनोरंजन ने वर्ष 1965 में इस विद्यालय में बतौर हिंदी शिक्षक योगदान दिया था. इन्होंने वर्ष 1957 में हजारीबाग के हिंदी हाई स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास करने के बाद 1961 में संत कोलम्बस कॉलेज से हिंदी, अंग्रेजी व फिलोस्पी में स्नातक किया था. इसके बाद रांची विश्वविद्यालय से 1963 में हिंदी से एमए किया.

बेरमो में कई शिक्षक थे चर्चित

बेरमो के चर्चित शिक्षकों में व्यास सिंह, केपी सिंह, अनिल मुखर्जी, अरुण सर, यमुना सिंह, बिदा सिंह, बाटुल मुखर्जी, भोला मुखर्जी, मीरा बहनजी, मालती बहनजी, विद्या सिंह, गोलक मुखर्जी, पूर्णिमा बहनजी, नवल किशोर सिंह, जयनंदन सिंह, बीएन पांडेय, देवनारायण सिंह, रामस्वरूप सिंह, एचएन सिन्हा, एसएन प्रसाद, किशोर प्रसाद, एमएन पांडेय, ज्योति प्रजापति, मदन प्रजापति, कन्हाई राम, चंडी चरण डे, बिंदेश्वर प्रजापति, जगदीश प्रजापति, अरुण जयसवाल, रघुवीर पांडेय आदि का भी नाम आता है.

चर्चित शिक्षकों में गरीब दास भी थे शामिल

बेरमो के चर्चित शिक्षकों में स्व गरीब दास भी शामिल हैं. बेरमो के राम बिलास उच्च विद्यालय से वर्ष 1993 में सेवानिवृत्त हुए, गरीब दास गणित में एसएल सोनी का टिगोनोमेट्री और अलजबरा के जानकार थे. उन्होंने कभी विद्यार्थियों को गणित की पढ़ाई किताब खोल कर नहीं करायी. जिस चैप्टर से छात्र सवाल करते थे, उसका जवाब तुरंत ब्लैक बोर्ड पर लिख देते. गणित से पहले वह विद्यालय में इतिहास विषय पढ़ाते थे. विद्यालय के एक छात्र एसडी प्रसाद (सीसीएल के सेवानिवृत्त अधिकारी) के कहने पर गणित पढ़ाना शुरू किया था.

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Kunal Kishore

लेखक के बारे में

By Kunal Kishore

कुणाल ने IIMC , नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा की डिग्री ली है. फिलहाल, वह प्रभात खबर में झारखंड डेस्क पर कार्यरत हैं, जहां वे बतौर कॉपी राइटर अपने पत्रकारीय कौशल को धार दे रहे हैं. उनकी रुचि विदेश मामलों, अंतरराष्ट्रीय संबंध, खेल और राष्ट्रीय राजनीति में है. कुणाल को घूमने-फिरने के साथ पढ़ना-लिखना काफी पसंद है.

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