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भविष्य बचाने को पानी बचायें, क्योंकि बोकारो में लगातार कम हो रहा शुद्ध भूजल

डायनेमिक ग्राउंड वाटर रिसोर्स रिपोर्ट 2023. एक साल में आयी 8152.23 एचएएम शुद्ध भूजल की कम

सीपी सिंह, बोकारो, इस साल गर्मी ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है. इस सीजन अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक चला गया था, जो कि पिछले वर्ष तक 42 डिग्री था. वहीं कई जगह पेयजल की समस्या से लोग त्रस्त हुए हैं. कहीं डीप बोरिंग फेल हुआ तो कहीं कुआं सूखा. साथ ही भूमिगत जल स्तर पर तरह-तरह की बात कही गयी. बोकारो जिला में पेयजल संकट से हर कोई वाकिफ है. चास व बेरमो अनुमंडल में तो गर्मी में समस्या से दो-चार होना पड़ता है. यह हर साल की कहानी है. 2023 में सामान्य से कम बारिश हुई थी. इसका असर भूमिगत जल स्तर पर भी हुआ था. भारत सरकार की डायनेमिक ग्राउंड वाटर रिसोर्स की 2023 की रिपोर्ट की माने तो बोकारो जिला की स्थिति बिगड़ती ही जा रही है. बोकारो जिला में भविष्य उपयोग के लिए मात्र 12501.03 हेक्टेयर मीटर्स (एचएएम) शुद्ध भूजल ही बचा है. एक साल में बोकारो जिला में भविष्य उपयोग के लिए भूजल की स्थिति में 8152.23 एचएएम की कमी आयी है.

भूमिगत जलस्तर में कमी का एक कारण कम वर्षा के साथ-साथ वर्षा जल संचयन योजना का नाकाम होना भी है. 2023 में बरसात में तालाब का जीर्णोद्धार का काम शुरू किया गया था. जिला में लघु सिंचाई विभाग की ओर से 55 तालाबों की सफाई कराने की योजना बनी थी. वहीं, चास नगर निगम की ओर से 13 तालाबों की सफाई करायी गयी थी. तालाब समेत अन्य वेटलैंड को धरती का फेफड़ा माना जाता है. तालाब में संचित पानी भूगर्भ जल की मात्रा को संतुलित बनाती है. गर्मी में सूखने के बाद मॉनसून में तालाब भर जाता है. लेकिन, निगम की ओर से सफाई व जीर्णोद्धार के नाम पर तालाब से पानी निकाल दिया गया था. इधर, लघु सिंचाई विभाग की ओर से 55 तालाब की सफाई का टेंडर 14 जून 2023 को खुला था. मानसून व एनजीटी की रोक के कारण कार्य शुरू नहीं हुआ था. लेकिन, मॉनसून के बाद तालाबों की सफाई हुई थी. इससे भूमिगत जलस्तर में गिरावट देखी गयी. चास में वर्तमान में भी भोलूर बांध तालाब व सोलागीडीह तालाब में काम चल ही रहा है.

नये भवन में है वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, पुराने में नहीं

जिला प्रशासन की ओर से बनाये जा रहे नये भवन में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम डेवलप किया गया है. जिला के न्याय सदन, तेनुघाट कोर्ट, सदर अस्पताल, समाहरणालय, एसपी ऑफिस (आधा), नगर निगम कार्यालय में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया गया है. लेकिन, चास एसडीओ कार्यालय समेत तमाम पुराने भवन में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है. वहीं शिक्षा विभाग के 468 भवन (विद्यालय व अन्य) में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम डेवलप किया गया है. भवन प्रमंडल विभाग की माने तो 2008-10 के बाद बनने वाले तमाम भवन में सिस्टम विकसित किया गया है. चास नगर निगम क्षेत्र में 03 हजार वर्ग फीट या अधिक क्षेत्र में बने घर व व्यवसायिक भवन में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम डेवलप किया गया है. जानकारी के अनुसार 5025 भवन में सिस्टम बनाया गया है.

भविष्य के लिए बचा है सिर्फ 12501.03 एचएएम पानी

भारत सरकार की डायनेमिक ग्राउंड वाटर रिसोर्स की 2023 की रिपोर्ट की माने तो बोकारो जिला की स्थिति बिगड़ती ही जा रही है. जिला में भविष्य उपयोग के लिए मात्र 12501.03 एचएएम शुद्ध भूजल ही बचा है. एक साल में बोकारो जिला में भविष्य उपयोग के लिए भूजल की स्थिति में 8152.23 एचएएम की कमी आयी है. 2022 की रिपोर्ट की माने तो बोकारो जिला में 20653.26 एचएएम भविष्य उपयोग के लिए था. एक साल में भूजल दोहन का चरण 30 से बढ़कर 42 प्रतिशत हो गया.

चिंता का सबब यह भी भूजल रिचार्ज में आयी है कमी

बोकारो लिए चिंता का कारण सिर्फ यह नहीं है कि भविष्य उपयोग के लिए भूजल में कमी आ रही है. असली चिंता का कारण यह है कि भूजल रिचार्ज भी नहीं हो रहा है. 2022 के मुकाबले 2023 में 8986.74 एचएएम की कमी आयी है. 2023 में कुल 22520.76 एचएएम भूजल रिचार्ज हुआ है, जबकि 2022 में यह 31507.50 एचएएम था. 2023 के रिपोर्ट के अनुसार मॉनसून समय में वर्षा से 18003.58 एचएएम व अन्य स्त्रोत से 1458.23 एचएएम भूजल रिचार्ज हुआ.

सुधर रही थी, जिले की स्थिति, लेकिन पिछले साल बिगड़ गयी

2017 से लेकर 2022 तक की सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की रिपोर्ट से पता चलता है कि बोकारो जिला की स्थिति में सुधार हो रहा था. ब्लॉक दर ब्लॉक की रिपोर्ट के अनुसार 2017 में बेरमो प्रखंड की स्थिति अति संवेदनशील थी, जबकि चास व चंद्रपुरा की स्थिति सेमी क्रिटिकल थी. जबकि 2020 की रिपोर्ट में बेरमो प्रखंड की स्थिति अति संवेदनशील व चास की स्थिति सेमी क्रिटिकल की रही. हालांकि, चंद्रपुरा सेफ जोन में आ गया. वहीं 2022 की रिपोर्ट में बोकारो जिला के बेरमो प्रखंड की स्थिति अति संवेदनशील रही, लेकिन चास की स्थिति भी सेफ जोन में पहुंच गयी. 2017 से 2022 की रिपोर्ट में जिला की स्थिति में सुधार देखा गया था, लेकिन 2023 की रिपोर्ट में स्थिति गड़बड़ा गयी.

समय की मांग है वर्षा जल संरक्षण

बोकारो में वर्षा जल संरक्षण समय की मांग है. राज्य भू-गर्भ निदेशालय की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2020 में बोकारो का जलस्तर 12.25 मीटर था, जो 2002 में 8.14 मीटर था. यानी हर साल जलस्तर घट रहा है. राज्य भूगर्भ निदेशालय झारखंड की रिपोर्ट की मानें तो राज्य के 19 जिलों में 2002 की तुलना में 2021 में दो से छह मीटर तक जलस्तर नीचे चला गया. इसके कारण कई जिलों को जल दोहन क्षेत्र घोषित किया गया है. बोकारो भी इसमें शामिल है. 2023 में कम वर्षा व समय के बाद तालाब की सफाई का असर देखने को मिला है, अब जरूरत है इस साल होने वाले मॉनसून में ज्यादा से ज्यादा वर्षा जल को संचयित करना. बताते चले कि बोकारो जिला में वेटलैंड के मामले में झारखंड में सबसे आगे है. पूरे प्रदेश में वेटलैंड की कुल संख्या 5649 है, इनमे सबसे अधिक 1631 वेटलैंड बोकारो में है.

हर बूंद को बचाने की है तैयारी : डीडीसी

डीडीसी संदीप कुमार की माने तो जिला प्रशासन की ओर से वर्षा जल संचयन के क्षेत्र में कई स्तर पर काम किया गया है. पंचायत स्तर पर पीट बनाया गया है. नीति आयोग, मत्स्य विभाग, भूमि संरक्षण व मनरेगा के तहत तालाब बनाया गया है. इससे बारिश जल का संचयन होगा. साथ ही किसान को फायदा भी मिलेगा. लोगों को भी इस दिशा में जागरूक किया जा रहा है.

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