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Bokaro news : मोचरो का काली मंदिर : लाल बाबा की साधना भूमि, जहां आज भी जीवित है आस्था

Updated at : 20 Oct 2025 12:56 AM (IST)
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Bokaro news : मोचरो का काली मंदिर : लाल बाबा की साधना भूमि, जहां आज भी जीवित है आस्था

Bokaro news : दूर-दूर तक फैली है काली मंदिर की प्रसिद्धि

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Bokaro news : दीपक सवाल, कसमार. कसमार प्रखंड मुख्यालय से सटा हुआ मोचरो गांव लोक आस्था, तांत्रिक परंपरा और भक्ति का संगम स्थल है. यहां स्थित काली मंदिर की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली है. इस मंदिर की नींव वर्ष 1967 में प्रसिद्ध तांत्रिक एवं काली उपासक स्वामी तपेश्वरानंद उर्फ लाल बाबा ने रखी थी. लाल वस्त्रधारी यह साधक अपनी साधना, सेवा और सिद्धि के कारण लोगों के बीच ‘लाल बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध हुए. उनकी मान्यता थी- मां काली का आशीर्वाद वहां नहीं मिलता, जहां भव्य मंदिर हो, बल्कि वहां मिलता है, जहां सच्ची भक्ति बसती है. इसी दर्शन के अनुरूप उन्होंने मंदिर का निर्माण नहीं कराया, बल्कि अपने मकान के एक हिस्से में मां काली की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू की. यही साधना स्थल आगे चलकर मोचरो काली मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हुआ.

लाल बाबा की साधना से बढ़ी मंदिर की प्रसिद्धि :

बताया जाता है कि मोचरो में मंदिर की स्थापना से पहले लाल बाबा ने बेरमो के गांधीनगर स्थित पहाड़ी मंदिर की स्थापना भी की थी. इसी क्रम में, एक दिन धधकिया निवासी भूतनाथ मिश्र के साथ जब वे कसमार आये, तो उन्हें इस स्थान पर दिव्य प्रेरणा मिली और उन्होंने यहीं मां काली की स्थापना कर दी. धीरे-धीरे यह स्थल साधना और श्रद्धा का केंद्र बन गया. बीते दशकों में जब परिवहन की सुविधाएं सीमित थीं, तब भी श्रद्धालु 15-20 किलोमीटर दूर से पैदल चलकर मोचरो पहुंचते थे और माता के दर्शन करते थे. आज भी वह आस्था अक्षुण्ण है. प्रत्येक वर्ष काली पूजा की रात्रि और वैशाख शुक्ल नवमी के अवसर पर यहां हजारों श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए उमड़ पड़ते हैं.

लाल बाबा की विरासत, आज भी जीवंत : वर्ष 2017 में 90 वर्ष की आयु में लाल बाबा का देहावसान हो गया, लेकिन उनके अनुयायी मानते हैं कि उनकी साधना आज भी इस मंदिर में विद्यमान है. मंदिर परिसर में लाल बाबा की प्रतिमा स्थापित है, जहां भक्त आज भी उन्हें नमन करते हैं. उनके दत्तक पुत्र आशुतोष मुखर्जी वर्तमान में मंदिर की देखरेख, पूजा-पाठ और सभी धार्मिक आयोजनों का संचालन करते हैं. वे बताते हैं कि यहां. रोज़ाना अनेक लोग मां के दर्शन के लिए आते हैं. विशेष रूप से मंगलवार को पूजा का महत्व और बढ़ जाता है.

इस वर्ष काली पूजा पर होगा भक्ति जागरणइस वर्ष काली पूजा के अवसर पर मंगलवार की रात विशेष भक्ति जागरण का आयोजन किया गया है. यह जानकारी पूर्व पंसस मंटू रजवार और गंगा कपरदार ने दी. उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए तैयारियां पूरी कर ली गयी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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MANOJ KUMAR

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