बोकारो के भरत नायक को मिला हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में दाखिला, इन जगहों पर कर चुके हैं काम

Edited by Sameer Oraon
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भरत नायक, File Photo

Jharkhand New: बोकारो के भरत नायक को हार्वर्ड हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के केनेडी स्कूल में मिड-कैरियर मास्टर इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में दाखिला मिला. उन्होंने अपनी पढ़ाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी), सिलचर से की है.

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बोकारो, राकेश वर्मा: बोकारो जिले के बेरमो अनुमंडल अंर्तगत पेटरवार प्रखंड के चलकरी बस्ती निवासी भरत नायक को विश्वविख्यात अमेरिका के हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के केनेडी स्कूल में मिड-कैरियर मास्टर इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (एमसी-एमपीए) प्रोग्राम में दाखिला मिला है. यह एक साल का कोर्स है. यह कोर्स दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पब्लिक पॉलिसी कार्यक्रमों में से एक माना जाता है. भरत ने असम के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी), सिलचर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. वहीं पढ़ाई के दौरान उन्होंने गरीबी और सामाजिक असमानताओं को करीब से देखा, जिसने उनके सोचने का नजरिया बदल दिया.

साल 2014 में द लॉजिकल इंडियन से जुड़े

द निरोस गेस्टस नामक डॉक्यूमेंट्री से प्रभावित होकर भरत जनसेवा और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में काम करने का निर्णय लिया. उन्होंने 2014 में द लॉजिकल इंडियन नामक डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म में फाउंडिंग एडिटर के तौर पर जुड़े. भरत ने पत्रकारिता, ऑडियंस एंगेजमेंट और कैंपेन बिल्डिंग की समझ खुद सीखी और एक मजबूत टीम खड़ी की. उनके नेतृत्व में द लॉजिकल इंडियन के सोशल मीडिया पर 1 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स हो गए और वेबसाइट पर हर महीने 30 से 50 लाख पाठक जुड़ने लगे.

भरत ने दिया 50 से अधिक युवाओं को मार्गदर्शन

भरत नायक ने 50 से अधिक युवाओं को मार्गदर्शन दिया. जो आगे चलकर टाइम्स ऑफ इंडिया, ब्लूमबर्ग और बेलिंगकैट जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े. उन्हें को यू.एस. स्टेट डिपार्टमेंट के इंटरनेशनल विजिटर लीडरशिप प्रोग्राम (भीएलपी) में फैलोशिप मिली. इसके अलावा वे सिंगापुर इंटरनेशनल फाउंडेशन के इंपैक्ट मीडिया फेलो, थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन और आईसीएफजी के रिपोर्टिंग फेलो भी रह चुके हैं.

सलाहकार शोधकर्ता के रूप में काम कर रहे हैं भरत नायक

वर्तमान में वे माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च के साथ एआई और गलत सूचना (मिसइनफोरेशन) पर सलाहकार शोधकर्ता के रूप में कार्य कर रहे हैं. भरत नायक की रुचि सार्वजनिक नीति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु परिवर्तन और गलत सूचना जैसे वैश्विक मुद्दों से जुड़ी है. हालांकि उन्हें हार्वर्ड में दाखिला मिल चुका है, लेकिन लगभग 75 लाख रुपये की शैक्षणिक लागत जुटाने में वे संघर्ष कर रहे हैं. वे झारखंड सरकार से आर्थिक सहायता की अपील कर रहे हैं और साथ ही समाज से भी सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं. उन्होंने इसके लिए 8553329298 या भरत नायक34 ’जीमेल.कॉम पर संपर्क करने को कहा है.

अमेरिका ने दो साल पहले आईभीएलपी के लिए किया था आमंत्रित

इससे पहले भरत नायक को अमेरिका में 10 सितंबर से 1 अक्टूबर 2022 के बीच आयोजित इंटरनेशनल विजिटर लीडरशिप प्रोग्राम (आईभीएलपी) के लिए भी आमंत्रित किया गया था. इसका विषय था- आईडेंटिफाइंग एंड कॉम्बैटिंग डिसइन्फॉर्मेशन इन द क्वाड. इस कार्यक्रम में भरत के साथ-साथ भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के 10 लोगों ने हिस्सा लिया था. इस संबंध में उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में शामिल होने के बाद उन्हें दुष्प्रचार के खिलाफ अभियान चलाने के बारे में अमेरिकी नीतियों के बारे में अहम जानकारियां मिलीं.

अमेरिका में सीखी कई तकनीक

भरत नायक ने बताया कि अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान वर्तमान दौर में दुष्प्रचार और भ्रामक सूचनाओं की पहचान करने वाली तकनीक के बारे में जाना. इस दौरान उन्होंने दुष्प्रचार की वजह से उत्पन्न होने वाली परस्थितियों के बारे में बताया. उन्होंने फैक्ट चेकिंग, इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के साथ-साथ भ्रामक तथ्यों के खिलाफ विशेष अभियान पर जोर दिया.उन्होंने इस बात पर भी चर्चा की कि किसी संगठन या व्यक्ति विशेष की ओर से फैलाये जाने वाले दुष्प्रचार को कैसे रोका जाये. अमेरिका में भरत नायक की अमेरिकी सरकार के कई प्रतिनिधियों, नीति निर्धारकों, पत्रकारों के अलावा स्टैनफोर्ड, वाशिंगटन यूनिवर्सिटी, मिसौरी विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों के साथ इस विषय पर चर्चा की. इस कार्यक्रम में विशेष रूप से चीन और रूस की ओर से फैलाये जाने वाले दुष्प्रचार की पहचान और उसकी रोकथाम पर चर्चा हुई. 21 दिन के इस कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने कई कॉन्फ्रेंस, सेमिनार के अलावा वन टू वन मीटिंग में भी हिस्सा लिया था. ये प्रोग्राम वाशिंगटन डीसी, सेंट लूइस, मिसौरी, सिएटल और सैन फ्रांसस्किो में आयोजित किये गये. माइक्रोसॉफ्ट, पुलत्जिर सेंटर, डिजिटल फॉरेंसिक रिसर्च लैब ऑफ अटलांटिक काउंसिल, इंटरनेशनल सेंटर फॉर जर्नल्ट्सिस, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के साइबर पॉलिसी सेंटर और अन्य संस्थानों के प्रतिनिधियों से भी भरत की मुलाकात हुई थी.

मिडिया लिटरेसी व दुष्प्रचार के खिलाफ 70 से अधिक वर्कशॉप किया

नेट न्यूट्रैलिटी और एसिड की बिक्री बंद करने के खिलाफ सोशल मीडिया पर अभियान चला चुके भरत नायक ने झारखंड में दुष्प्रचार के खिलाफ लोगों को जागरूक करने के लिए एक वर्कशॉप की भी शुरुआत की थी. वहीं महिला व पुरुषों के बीच मिडिया लिटरेसी के लिए भारत, नेपाल, भूटान सहित कई जगहों पर 70 से अधिक वर्कशॉप का आयोजन किया. भरत नायक चलकरी बस्ती निवासी सोमेश्वर लाल नायक के पुत्र है. इन्होंने वर्ग एक से 6 तक की अपनी प्रारंभिक शिक्षा रांची स्थित रामटहल चौधरी विद्यालय तथा 7 से 10वीं तक की पढाई बेरमो के कृष्णा सुदर्शन सेंटट्रल स्कूल से की थी.

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लेखक के बारे में

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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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