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Bokaro News : सीसीएल में वर्ष 1974 से है जेसीएसी

Updated at : 23 Nov 2025 12:12 AM (IST)
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Bokaro News : सीसीएल में वर्ष 1974 से है जेसीएसी

Bokaro News : कोल इंडिया में सीसीएल ही एकमात्र ऐसी कंपनी है, जिसमें वर्ष 1974 से संयुक्त सलाहकार संचालन समिति (जेसीएसी) की बैठक हो रही है.

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राकेश वर्मा, बेरमो, कोल इंडिया में सीसीएल ही एकमात्र ऐसी कंपनी है, जिसमें वर्ष 1974 से संयुक्त सलाहकार संचालन समिति (जेसीएसी) की बैठक हो रही है. पहले इसका नाम कंपनी सलाहकार समिति था. बाद में संयुक्त सलाहकार समिति (जेसीसी) और फिर संयुक्त सलाहकार संचालन समिति नाम रखा गया. पहले सीसीएल में हर माह जेसीएसी की बैठक होती थी. बाद में हर तीन महीने पर होने लगी. अब हर छह माह में बैठक होने लगी है. इसकी अंतिम बैठक अप्रैल 2025 में हुई थी. एनसीडीसी (नेशनल कोल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) में जितनी भी कंपनियां थीं, वह सीसीएल के अधीन थीं. बाद में सीसीएल से ही एमसीएल, एनसीएल व डब्ल्यूसीएल बनी. डब्ल्यूसीएल से बाद में एसइसीएल बनी. जैसे-जैसे अलग कंपनियां बनती गयीं, वैसे-वैसे सभी कंपनियों में अलग-अलग जेसीएसी बनती गयी. मालूम हो कि प्रबंधन व मजदूरों की यह सबसे बड़ी कमेटी है. जेसीएसी की बैठक में कोयला उद्योग व मजदूरों से संबंधित कई बड़े नीतिगत फैसले लिये गये हैं. 90 के दशक में सीसीएल में बंद पड़े डबल इम्प्लायमेंट को जेसीएसी की बैठक में ही निर्णय लेते हुए इसे चालू कराया गया. अनुपस्थिति के नाम पर बर्खास्त लगभग 16-17 सौ कामगारों को पुनः बहाल कराया गया. लगभग 13 सौ पीआर मजदूरों को टीआर में नियमित कराया गया. इसके अलावा सीसीएल में सेवानिवृत्त कर्मियों को बगैर क्वार्टर हैंड ओवर किये ग्रेच्यूटी राशि का भुगतान कराया गया. डेथ केस (9:3:2) के मामले में आवेदन देने की समय सीमा को छह माह से बढ़ा कर डेढ़ साल कराया गया, जिसके कारण करीब ढाई सौ आवेदकों को नियोजन मिला. जेसीएसी की बैठक में बड़े मामलों पर नीतिगत निर्णय लिये जाते है. जबकि जिन छोटे-मोटे मुद्दों पर सहमति बनी बनती है, उसके लिए एक छोटी कमेटी बनायी जाती है. इसे फिर जेसीएसी की अगली बैठक में रखा जाता है. वर्ष 2011 में सीसीएल में अतिरिक्त आवास व जमीन को लेकर नीति निर्धारण जेसीएसी की बैठक में ही हुआ था. इसके बाद इसे एप्रुवल के लिए सीसीएल बोर्ड में भेजा गया. बोर्ड ने फिर इस आवंटन नीति की कुछ संशोधन के साथ पास किया था. इसके बाद सीसीएल आवंटन नीति के संबंध में लिये गये निर्णय के बाबत हाईकोर्ट में शपथ पत्र दायर किया था. मालूम हो कि वर्ष 2009 में सीसीएल में हाईकोर्ट के आदेश व सीबीआइ के निर्देश के बाद अवैध कब्जा वाले क्वार्टरों व कंपनी की अतिक्रमित जमीन पर बनाये गये दुकान व मकान को हटाने को लेकर कार्रवाई शुरू की गयी थी. बीसीसीएल में तो इसको लेकर गोली भी चली थी. अतिक्रमण के नाम पर उजाड़ने की कार्रवाई को बंद करने की मांग उस वक्त यूनियन नेताओं ने जेसीएसी की बैठक में रखी थी. इसके बाद लोगों को राहत मिली थी.

बिंदेश्वरी दुबे व चतुरानन मिश्र थे पहले सदस्य

सीसीएल में वर्ष 1974 में संयुक्त सलाहकार समिति (जेसीसी) बनी, तो इसमें मात्र दो ही यूनियन इंटक व एटक शामिल थी. इंटक की ओर से इसके पहले सदस्य पूर्व मुख्यमंत्री स्व बिदेश्वरी दुबे व एटक की ओर से पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री चतुरानन मिश्र थे. बाद के वर्षों में एटक के स्व शफीक खान, रमेंद्र कुमार, लखनलाल महतो, अशोक यादव व इंटक के स्व राजेंद्र प्रसाद सिंह व स्व ददई दुबे सहित मुरलीधर विश्वकर्मा, कन्हैया दुबे, बद्री सिंह व स्व गिरिजाशंकर पांडेय इसके सदस्य हुए. वर्ष 2005 में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद ददई दुबे इससे अलग हो गये थे. वर्ष 1977 में मजदूर नेता रामदास सिंह सांसद व समाजवादी नेता मिथिलेश सिन्हा विधायक बने तो दोनों को जेसीसी का सदस्य बनाया गया. बाद के वर्षों में इंटक व एटक के अलावा बीएमएस, एचएमएस व सीटू जेसीसी में शामिल हुईं. बीएमएस की ओर से प्रदीप कुमार दत्त, एचएमएस की ओर से रघुनंदन राघवन, ललन सिंह व हरिशंकर सिंह, सीटू की ओर से मिहिर चौधरी भी जेसीएसी के सदस्य रहे हैं. सीसीएल में अभी जेसीएसी सदस्यों में एटक के रमेंद्र कुमार, लखनलाल महतो व अशोक यादव, बीएमएस के संजय कुमार चौधरी, शशि भूषण सिंह, निर्गुण महतो, एचएमएस के रघुनंदन राघवन, राजेश सिंह, कमलेश सिंह तथा सीटू के आरपी सिंह शामिल हैं.

कितने सदस्य होते हैं इसमें

पहले सीसीएल की जेसीएसी में ट्रेड यूनियनों की ओर से 13 नामित सदस्य थे. इंटक की ओर से पांच, एटक व एचएमएस की ओर से तीन-तीन तथा बीएमएस व सीटू के एक-एक सदस्य शामिल थे. इसके बाद एटक, एचएमए व बीएमएस के तीन-तीन तथा सीटू के एक सदस्य हुए, जो अभी भी हैं. वर्ष 2016 में इंटक के दो गुटों के बीच विवाद का मामला न्यायालय में चले जाने तथा न्यायालय द्वारा इंटक को कोल इंडिया की सभी कमेटियों से बाहर रखने के निर्देश दिया तो सीसीएल में भी इंटक जेसीएसी की बैठक से अलग हो गयी़ जेसीएसी में प्रबंधन की ओर से सीएमडी, निदेशक तकनीकी, निदेशक वित्त, निदेशक कार्मिक, निदेशक तकनीकी (पीएंडपी), जीएम (सिविल), जीएम (पीएंडआइआर) के अलावा इडीएमएस (एक्जक्यूटिव डायरेक्टर मेडिकल सर्विसेज) शामिल रहते हैं. अब इडीएमएस के स्थान पर सीसीएल के सीएमएस बैठते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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JANAK SINGH CHOUDHARY

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