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Bokaro News : वर्ष 1986 से बंद है गोमिया क्षेत्र की जगेश्वर कोलियरी

Updated at : 03 Jun 2025 11:01 PM (IST)
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Bokaro News : वर्ष 1986 से बंद है गोमिया क्षेत्र की जगेश्वर कोलियरी

Bokaro News : गोमिया क्षेत्र अंतर्गत सीसीएल स्वांग समूह की जगेश्वर कोलियरी वर्ष 1986 से बंद है.

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बेरमो,गोमिया क्षेत्र अंतर्गत सीसीएल स्वांग समूह की जगेश्वर कोलियरी वर्ष 1986 से बंद है. उस समय यहां सैकड़ों कामगार कार्यरत थे. वर्ष 1977 के आसपास जगेश्वर कोलियरी को खोलने के लिए हजारीबाग के नरेश देव ने सीसीएल से 15 साल के लिए लीज पर लिया था. कोलियरी खुलने के बाद यहां तीन-चार हजार लोग रोजगार से जुड़े. काफी मात्रा में कोयला उत्पादन किया जाने लगा, अचानक 1986 से कोलियरी को बंद कर दिया गया. कारण बताया गया असुरक्षित ढंग से माइंस चलाना. इसके अलावा वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से पर्यावरण नियमों के उल्लंघन किये जाने की भी बात कही गयी. बंद होने के बाद कोल इंडिया के अधिकारियों ने भी कोलियरी का दौरा किया था. कोलियरी के बंद होने के बाद सैकड़ों मजदूर बेरोजगार हो गये. इस कोलियरी को चालू करने के लिए समय-समय पर पूर्व मंत्री माधवलाल सिंह, पूर्व मंत्री स्व छत्रुराम महतो विधानसभा में आवाज उठाते रहे. मजदूरों ने भी कई दफा तेनुघाट अनुमंडल मुख्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया. पूर्व मंत्री माधवलाल सिंह कई दफा सीसीएल के सीएमडी से मिले. लेकिन जगेश्वर कोलियरी चालू नहीं हुई. लेकिन समय-समय पर इस कोलियरी के चालू होने के नाम पर दलाल सक्रिय हो गये तथा बिहार, उत्तरप्रदेश, झारखंड के सैकड़ों युवकों को इस कोलियरी में नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी कर ली.

जानकार बताते हैं कि जगेश्वर कोलियरी के भू गर्भ में काफी मात्रा में कोयला है तथा 50 वर्षों तक यहां से कोयला खनन किया जा सकता है. इधर, कोलियरी के बंद रहने के कारण यहां अवैध खनन भी धड़ल्ले से चला.

वर्ष 1987 से बंद है पिपराडीह कोलियरी

वर्ष 1987 से सीसीएल कथारा एरिया अंतर्गत स्वांग समूह की पिपराडीह कोलियरी भी बंद है. पहले यह कोलियरी निजी खान मालिक श्रीराम सिंह एंड कंपनी के अधीन थी. वर्ष 1971-72 में इस कोलियरी का भी राष्ट्रीयकरण हो गया था. चुकिः उस वक्त पिपराडीह व स्वांग कोलियरी के पीओ एक ही होते थे, जबकि मैनेजर अलग-अलग थे. इस कोलियरी से उत्पादित कोयला का यहां पोड़ा बनता था. वर्ष 1917 में भूमिगत खदान के रूप में इसे चालू किया गया था. जिस समय इस कोलियरी को बंद किया गया था, उस समय यहां लगभग 11 सौ कर्मी कार्यरत थे. इन सभी को इधर-उधर प्रबंधन ने स्थानांतरित कर दिया था. हालांकि पिपराडीह कोलियरी को चालू करने को लेकर प्रबंधकीय कार्रवाई तेज है. सीसीएल बोर्ड से एप्रुवल मिलने के बाद प्रोजेक्ट रिपोर्ट बना ली गयी है और एप्रुवल मिल गया है. इसके बाद इस माइंस से कोयला खनन के लिए आउटसोर्स का प्रपोजल बनाया जा रहा है. इस कोलियरी को दो फेज में चालू किया जायेगा. पहले पेज में 21 मिलियन टन कोयला का उत्पादन किया जायेगा और 77 लाख घन मीटर टन ओबी का निस्तारण होगा. हर साल दो मिलियन (20 लाख टन) कोयला उत्पादन होगा. दूसरे फेज में 15 मिलियन टन कोयला का उत्पादन होगा और 46 लाख घन मीटर टन ओबी का निस्तारण होगा. यानि दोनों फेज में 36 मिलियन टन का कोल रिजर्व है. इस कोलियरी में वाशरी ग्रेड 3.4.5 का कोल भंडार है. इसे वाश कर कोकिंग कोल भी बनाया जायेगा. साथ ही थर्मल व स्टील प्लांट में आपूर्ति की जायेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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JANAK SINGH CHOUDHARY

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