Indira Gandhi News: डीवीसी अधिकारियों पर गुस्से से लाल हो गयीं थीं इंदिरा गांधी, जानें क्यों
Indira Gandhi News: इस दौरान सड़क के दोनों किनारे लोगों की कतार लगी थी. डीवीसी गेस्ट हाउस के पास मैदान में कार्यक्रम के लिए स्टेज बनाया गया था. यूनिट के उद्घाटन के बाद उनका भाषण शुरू हुआ, तो बारिश होने लगी. हजारों लोगों ने बारिश में भींगकर इंदिरा गांधी का भाषण सुना.
Indira Gandhi News: दामोदर वैली कॉर्पोरेशन (डीवीसी) के चंद्रपुरा थर्मल पावर स्टेशन (सीटीपीएस) के तीन नंबर यूनिट से जुड़ी हैं भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की यादें. 7 जुलाई 1968 को इंदिरा गांधी इस यूनिट का उदघाटन करने चंद्रपुरा आयीं थीं. हवाई मार्ग से बोकारो और वहां से रेल मार्ग से स्पेशल सैलून से चंद्रपुरा स्टेशन पहुंचीं थीं. यहां उनका भव्य स्वागत हुआ था.
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इंदिरा गांधी को देखने और सुनने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी. स्टेशन से आयोजन स्थल तक उन्हें ले जाने के लिए कार की व्यवस्था की गयी थी, लेकिन लोगों की भीड़ को देखते हुए इंदिरा गांधी ने कार से जाने से मना कर दिया था. इसके बाद खुली जीप मंगायी गयी और उस पर सवार होकर इंदिरा गांधी ने लगभग डेढ़ किलोमीटर का सफर पूरा किया.
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इस दौरान सड़क के दोनों किनारे लोगों की कतार लगी थी. डीवीसी गेस्ट हाउस के पास मैदान में कार्यक्रम के लिए स्टेज बनाया गया था. यूनिट के उद्घाटन के बाद उनका भाषण शुरू हुआ, तो बारिश होने लगी. हजारों लोगों ने बारिश में भींगकर इंदिरा गांधी का भाषण सुना. डीवीसी की ओर से आम लोगों के लिए पंडाल नहीं बनाया गया था. इंदिरा गांधी ने इस पर भी गुस्से का इजहार किया था.
मालूम हो कि इस तीन नंबर यूनिट को दो साल पहले रिटायर घोषित कर दिया गया. बता दें कि इंदिरा गांधी 3 अक्टूबर 1972 को भी बतौर प्रधानमंत्री बोकारो आयी थी. यहां उन्होंने बोकारो स्टील प्लांट की एक नंबर यूनिट के अलावा ब्लास्ट फर्नेस का भी उद्घाटन किया था. साथ ही एक महती जनसभा को भी संबोधित किया था.
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सत्तर के दशक में भारत की इंदिरा गांधी ने भारत में जितने भी निजी कोयला खदानें थीं, सभी का राष्ट्रीयकरण करने का निर्णय लिया. दो चरणों में इस काम को पूरा किया गया. पहले कोकिंग कोल खदानों का 1971-72 में राष्ट्रीयकरण हुआ. फिर 1973 में नन-कोकिंग कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण किया गया.
राष्ट्रीयकरण का कारण यह बताया गया था कि देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए निजी कोयला खान के मालिक पर्याप्त पूंजी निवेश नहीं कर रहे थे. कुछ खदान मालिकों ने अवैज्ञानिक तरीके से खनन करना शुरू कर दिया था, जिससे खान मजदूरों की जान खतरे में थी. इसने भी सरकार की चिंता बढ़ा दी थी. कोयला खदानों के राष्ट्रीयकरण से कोयला मजदूरों का शोषण बंद हुआ.उनके रहन-सहन व सुख-सुविधाओं में भी वृद्धि हुई. बता दें कि इंदिरा गांधी की सरकार ने ही बैंकों का भी राष्ट्रीकरण किया था.
बेरमो से राकेश वर्मा की रिपोर्ट
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