Bokaro News : विजयादशमी : गुरु-चेला नृत्य होता है आकर्षण का केंद्र

Published by : MANOJ KUMAR Updated At : 30 Sep 2025 11:49 PM

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Bokaro News : नये कपड़े पहनने, पान खाने की रही है परंपरा

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Bokaro News : राकेश वर्मा, बेरमो. बेरमो अनुमंडल के गांवों में आज भी दुर्गा पूजा के अवसर पर नया कपड़ा लेने की परंपरा है. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इस मौसम का सबसे पहला ग्रामीण फल शकरकंद खाने का भी आनंद लेते हैं. इसके अलावा मनिहारी की दुकानों पर पूजा के अवसर पर ग्रामीण युवतियों व महिलाओं की भीड़ लगती है.

विजयादशमी का मेला देखकर लौटने के बाद महिला-पुरुष, बच्चे, युवक, युवतियां घर-घर जाकर बड़ों का पैर छूकर आशीर्वाद लेते थे. विजयादशमी के दिन टेसा राजा पक्षी का दर्शन करना शुभ माना जाता था. इसलिए लोग विजयादशमी के दिन अहले सुबह से टेसा राजा के दर्शन को लेकर आतुर रहते थे. दुर्गा पूजा के मेले में पान भी काफी लोकप्रिय था. गांवों में मेला देखने जाने वाले लोग पान चबाकर मेला देखने का आनंद लेते थे. गांव के मेले में आज भी कई तरह की ग्रामीण मिठाईयां लड्डू, खाजा, बालुशाही, जलेबी, बतीशा, गाजा आदि खूब प्रचलित है.

गांव के लोगों के मिलन का माध्यम भी रहा है मेला :

साल में एक बार लगने वाला दुर्गा पूजा का मेला लोगों के लिए मिलन का माध्यम भी था. प्रतिमा दर्शन के बाद बड़े-बुजुर्ग एक तरफ तो महिलाएं और बच्चे दूसरी तरफ चर्चा करने में मशगूल दिखते थे. मेलों में भी खूब चौपाल जमती थी, जो चेहरे मेले में नहीं दिखते थे, उनकी भी खबर बाद में लोग लेते थे. एक गांव के ग्रामीणों की दूसरे गांव के ग्रामीणों के साथ स्थापित मित्रता, सहिया-फूल संस्कृति, बड़े-छोटे के बीच के संबंध का बंधन मेले में भी खासकर दिखता था. मेला में फूहड़बाजी, शरारती तत्वों तथा मनचले लोगों के लिए कोई जगह नहीं थी. खेतों की मेढ़ के बीच पगडंडी से होकर गांव से लेकर मेला स्थल तक लंबी कतार आने जाने वालों की दिखती थी. कोई संसाधन नहीं होने के बावजूद भी लोग कोसों दूर पैदल चल कर मेला देखते थे. छोट-छोटे बच्चों को कंधे पर लेकर लोग मेला जाते थे.

अब नहीं दिखता परंपरागत नृत्य :

ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्गा पूजा के अवसर पर गुरु-चेला नृत्य भी आकर्षण का केंद्र रहता था. संताली लोग दुर्गा पूजा में दसाई पर्व मनाते हैं. इस दौरान गुरु-चेला की टोली गांव-गांव घूम कर नृत्य करती है. इसमें 30-40 की संख्या में लोग रहते हैं. यह नृत्य गांव का वर्षों पुराना परंपरागत नृत्य है. इसमें एक गुरु रहता है, जिसके एक हाथ में कांसा का एक कटोरा रहता है. इस कटोरा को वह दूसरे हाथ से बजाते हैं.

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