कोनार डैम में डीवीसी के आठ मेगावाट के सोलर पावर प्लांट का शिलान्यास रविवार को डीवीसी के चेयरमैन एस सुरेश कुमार ने किया. तीस मीटर ऊंचे टावर पर तिरंगे का भी उद्घाटन किया. चेयरमैन ने कहा कि एक समय माओवादियों का खौफ के कारण कोनार डैम में कोई अधिकारी और कंपनी काम करना नहीं चाहते थे. परंतु समय के साथ स्थिति में बदलाव आया है. चेयरमैन ने कहा कि कोनार डैम से हजारीबाग, रामगढ़ सहित अन्य जिलों को 24 घंटे बिजली सप्लाई की जायेगी. डीवीसी बिजली उत्पादन के साथ-साथ झारखंड एवं बंगाल में सोशल डेवलपमेंट का भी काम करती है और करेगी. कहा कि कोनार डैम में टूरिज्म की काफी संभावनाएं हैं. कंस्ट्रक्शन के बाद टूरिज्म ही देश की सबसे बड़ी इंडस्ट्री है. डीवीसी चेयरमैन ने डीवीसी की स्थापना के इतने वर्षों बाद भी विस्थापितों को उनके पुनर्वासित गांव की जमीन का कागजात नहीं मिलने पर खेद प्रकट करते हुए कहा कि यह दुख की बात है.
बोकारो थर्मल में नये प्लांट को लेकर डीपीआर बनने के बाद होगा निर्णय
डीवीसी के चेयरमैन ने शिलान्यास कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बोकारो थर्मल में 800 मेगावाट के नये पावर प्लांट के निर्माण डीपीआर बनने के बाद निर्णय लेने पर ही किया जा सकता है. कोनार डैम में 11 सौ करोड़ की लागत से एलएंडटी द्वारा वाटर फ्लोटिंग पावर प्लांट का निर्माण एक माह के बाद शुरू किया जायेगा. 60 करोड़ की लागत से तीन मेगावाट के हाइडल प्लांट का भी निर्माण कार्य चार-पांच वर्षों में शुरू किया जायेगा. कहा कि लुगू पहाड़ पर प्रस्तावित 15 सौ मेगावाट का पंप स्टोरेज पावर प्लांट का निर्माण कार्य राज्य सरकार द्वारा कैबिनेट से प्रस्ताव पास करने के बाद स्थगित कर दिया गया है. बाद में संभावनाएं बनने पर फिर से विचार किया जायेगा. उक्त प्लांट को पश्चिम बंगाल शिफ्ट करने की बात पर चेयरमैन ने कहा कि इस पर कुछ बताना संभव नहीं है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

