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संतन सिंह को जनता पार्टी में शामिल कराने बेरमो आये थे चंद्रशेखर

Updated at : 07 Jul 2024 10:48 PM (IST)
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संतन सिंह को जनता पार्टी में शामिल कराने बेरमो आये थे चंद्रशेखर

संतन सिंह को जनता पार्टी में शामिल कराने बेरमो आये थे चंद्रशेखर

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राकेश वर्मा, बेरमो : पूर्व प्रधानमंत्री स्व चंद्रशेखर का बेरमो से भी गहरा लगाव था. यहां के कई समाजवादी नेताओं के साथ उनका व्यक्तिगत संबंध रहा. ऐसे भी बेरमो कभी समाजवादी आंदोलन का केंद्र हुआ करता था. समाजवादी आंदोलनकारियों के लिए यह इलाका शरणस्थली था. यहां का अतीत जय प्रकाश नारायण, जार्ज फर्नाडीस, मंधु दंडवते, मधु लिमये, विशेश्वर मिश्रा, चंद्रशेखर, ब्रज मोहन तुफान, प्रिय गुप्ता, पारितोष बनर्जी, कर्पूरी ठाकुर, रामसुंदर दास, रामानंद तिवारी, लखनलाल, बाना बानाराम तुलफुले, महेश देशाई जैसे देश के बड़े समाजवादियों के संपर्क सूत्र में बंधा हुआ था. 40-50 के दशक में यहां क्रांतिकारी समाजवादी संगठक के रूप में मिथिलेश सिन्हा का पदार्पण हुआ. 1977 में बेरमो विधानसभा सीट से जनता पार्टी के टिकट पर उन्होंने चुनाव लड़ा और कांग्रेस व इंटक नेता बिंदेश्वरी दुबे को पराजित किया था. इसके अलावा रामदास सिंह, संतन सिंह, नरसिंह बाबू, मथुरा प्रसाद केशरी, रामप्रसाद सिंह, ध्रुव सिंह, जीबी राघवन, ढिबरुलाल शर्मा, इम्तियाज हुसैनी, जिलाउद्दीन कादरी, जेपी सिंह आजाद, विकास सिंह, प्रमोद सिंह सहित कई समाजवादी नेता हुए. बसावन सिंह भी बड़े समाजवादी नेता थे. बेरमो में कांग्रेस व इंटक से जुड़े बड़े मजदूर नेता संतन सिंह भी थे. 80 के दशक में वह कांग्रेस छोड़ कर जनता पार्टी में शामिल हो गये थे. बेरमो के सोशलिस्ट लीडर व वर्तमान में भाकपा माले के नेता विकास कुमार सिंह के आग्रह पर पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर बेरमो के करगली फुटबॉल मैदान में वर्ष 1982 में संतन सिंह को जनता पार्टी में शामिल कराने आये थे. उस वक्त वह जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे. उक्त सभा में समाजवादी नेता नरेंद्र सिंह, धनबाद के सूर्यदेव सिंह, बेरमो के विकास सिंह, डॉ आरजे सिंह भी मंच पर मौजूद थे. संतन सिंह ने बेरमो में निजी खान मालिकों के खिलाफ आंदोलन चलाया था. 40-50 के दशक में समाजवादी नेता बिंदेश्वरी सिंह के संपर्क में आने के बाद मजदूर राजनीति में सक्रिय हो गये. बाद में स्व सिंह इंटक नेता बिंदेश्वरी दुबे व एचएमएस नेता स्व रामदास सिंह के साथ भी वर्षों तक कोयलांचल की मजदूर राजनीति में सक्रिय रहे. वर्ष 1980 में बिंदेश्वरी दुबे ने बेरमो विधानसभा सीट से केपी सिंह को कांग्रेस का टिकट दे दिया. इसके बाद ही टिकट के प्रबल दावेदार रहे संतन सिंह का उनके साथ मनमुटाव शुरू हुआ तथा बाद में जनता पार्टी में शामिल हो गये थे.

कार्यकर्ताओं को सम्मान देते थे : विकास

माले नेता विकास कुमार सिंह ने बताया कि चंद्रशेखर के साथ पारिवारिक व व्यक्तिगत संबंध थे. वे बिहार व झारखंड के दौरे पर आते थे तो उन्हें रिसिव करने जाता था. कई बार उनके साथ नेपाल के प्रधानमंत्री बीपी कोइराला व उनके भाई गिरिजा प्रसाद कोईराला से मिलने सड़क मार्ग से जाया करता था. एक बार जाने के क्रम में रात में पूर्णिया सर्किट हाउस में रुके. जाड़े का मौसम था. सुबह जब मैं शरीर के ऊपर नंगे बदन योगासान कर रहा था तो वह बगल में आकर बैठ गये और कहा- लूक जाये जीरा से अऊर जाड़ जाय हीरा से. यानि उनके कहने का मतलब था जाड़ा में सावधानी बरते. वे कार्यकर्ताओं को काफी सम्मान देते थे. उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उनके भोडसी आश्रम में गया था.

जन मोर्चा के गठन के बाद आये थे गिरिडीह

90 के दशक में चंद्रेशखर सिंह जन मोर्चा का गठन होने के बाद गिरिडीह सर्किट हाउस आये थे तथा गिरिडीह में सभा की थी. उनके साथ वीपी सिंह, देवी लाल, मेनका गांधी भी थे. इस दौरान चंद्रपुरा के पूर्व मुखिया गुलाम रसूल, बेरमो के ज्ञानेश्वर सिंह यादव, सुधीर किशन, गिरिडीह जिला युवा जनता पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर सिंह के साथ सर्किट हाउस में मौजूद थे.

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