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पोयला बोयशाख को लेकर बंग समाज के लोगों में उत्साह

Updated at : 14 Apr 2024 12:32 AM (IST)
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पोयला बोयशाख को लेकर बंग समाज के लोगों में उत्साह

पोयला बोयशाख को लेकर बंग समाज के लोगों में उत्साह

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बेरमो. 14 अप्रैल को बांग्ला नववर्ष यानि पोयला बोयशाख मनाया जायेगा. इसको लेकर बेरमो कोयलांचल के बंगाली समुदाय में काफी उत्साह है. लोगों के घरों में वैशाख माह के स्वागत में कवि गुरु रवींद्र नाथ टैगोर द्वारा रचित गीत ऐशो है बोयशाख…..सुनने को मिल रहे है. बंग समाज द्वारा यह दिन उत्साह के साथ मनाया जायेगा. मंदिरों में पूजा कर लोग नये साल में सुख-समृद्धि की कामना करेंगे. एक-दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं देंगे. महिलाएं घरों में रंगोली सजायेंगी. व्यवसाय से जुड़े लोग अपने-अपने प्रतिष्ठान में पूजा कर नया खाता-बही शुरू करेंगे. इस अवसर पर कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किये जायेंगे. पोयला बोयसाख के दिन लोग स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ उठायेंगे. लगभग सभी के घरों में मछली, मीठा और मिष्टी दोय (मिठा दही) तो अनिवार्य रूप से परोसे जायेंगे. मछली के माछेर पातुडी, माढेर कालिया, मुडी घोटों के अलावा अन्य व्यंजन परोसे जायेंगे. शाकाहारी लोगों के लिए भी कई व्यंजन सजेंगे. बेरमो के बंग समाज से जुड़े श्यामल कुमार सरकार, सुजीत कुमार घोष, आशीष चक्रवर्ती, एच अधिकारी, दुर्गा दास, श्रीधर सरदार, देवी दास, भुवन नाग, आसिम प्रमाणिक. तापस मुखर्जी ,अमृता बसाक आदि कहते हैं कि हर साल पोयला बोयशाख का बेसब्री से इंतजार रहता है. इस साल भी पारंपरिक तरीके से इसे मनाया जायेगा. चंद्रपुरा में बना था वैशाखी क्लब डीवीसी के चंद्रपुरा थर्मल में एक समय बंगाली समुदाय के लोगों की संख्या काफी थी. मगर अब गिनती के ही परिवार रह गये हैं. यहां पावर प्लांट बनने के समय बड़ी संख्या में बंगाली समुदाय के लोग यहां नौकरी करते थे. चंद्रपुरा में दुर्गा पूजा, लखी पूजा व काली पूजा में सबसे अधिक योगदान इन्हीं लोगों का रहता था. पोयला बोयशाख मनाने के लिए ही डीवीसी ने मुख्य बाजार के निकट वैशाखी क्लब बनाया था. यहां शाम में काफी संख्या में लोग जुटते थे और रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन होता था. अब पहले जैसा आयोजन नहीं होता है. बोकारो थर्मल में भी बंग समाज के लोग काफी संख्या में हैं. क्या कहते हैं लोग पंपी बोस (फ्राइडे बाजार) : इस दिन हम सभी सुबह नहा कर नये कपड़े पहनते हैं और घर में पूजा करते हैं. मंदिर भी जाते हैं. कई तरह के पकवान बनते हैं. एक-दूसरे के घर जाकर नये वर्ष की बधाई देते हैं. अर्पिता मुखर्जी (कुरपनिया) : इस दिन नील षष्ठी की पूजा करेंगे. परिवार के साथ काली मंदिर जाकर पूजा करेंगे. घर में बने पकवान का आनंद लेंगे. मित्रजनों को नव वर्ष की बधाई देंगे. समीर कुमार घोष (चलकरी) : इस दिन हम सभी वर्ष भर स्वस्थ रहने तथा सुख समृद्धि की कामना ईश्वर से करते हैं. सुबह स्नान ध्यान कर व नये वस्त्र पहन कर पूजा करेंगे. घर में बने व्यंजनों का आनंद लेंगे. बाबुल राय (कश्मीर कॉलोनी) : परिवार के साथ मंदिर जाकर पूजा करेंगे. घर में विशेष पकवान भी बनेगा, जिसका आनंद उठाते हैं. मित्रों को नववर्ष की बधाई देंगे.

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