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कोरोना का असर : 1.71 लाख में मात्र 56 हजार बच्चे ही कर पा रहे ऑनलाइन पढ़ाई

By Prabhat Khabar Print Desk
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1.71 लाख में मात्र 56 हजार बच्चे ही कर पा रहे ऑनलाइन पढ़ाई
1.71 लाख में मात्र 56 हजार बच्चे ही कर पा रहे ऑनलाइन पढ़ाई
Prabhat Khabar

राजू नंदन, चास : कोरोना महामारी का असर सरकारी विद्यालयों के बच्चों पर सबसे अधिक पड़ा है. गरीब वर्ग के बच्चे ही सरकारी स्कूलों में नामांकन कराते हैं. लॉकडाउन के बाद से सभी सरकारी स्कूल बंद हैं, लेकिन विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी रखने के लिए शिक्षा विभाग ने फिलहाल निजी विद्यालयों की तर्ज पर ऑनलाइन शिक्षा देने की व्यवस्था की है. शिक्षा विभाग के आंकड़े के अनुसार बोकारो जिले में सिर्फ 56,498 विद्यार्थियों को ही ऑनलाइन शिक्षा मिल रही है, जबकि बोकारो जिले में वर्ग एक से वर्ग 10 तक नामांकित विद्यार्थियों की संख्या एक लाख 71 हजार 668 है.

शेष एक लाख 15 हजार 170 विद्यार्थियों के पास या तो एंड्रायड फोन नहीं है या फिर उन्हें चलाने का आइडिया नहीं है. इसके कारण इन सभी बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा से वंचित रहना पड़ रहा है. शिक्षा विभाग की ओर से वंचित बच्चों को जोड़ने के लिए अभी तक किसी प्रकार की कार्ययोजना तैयार नहीं की गयी है.

चास मे सबसे अधिक 20 हजार छात्र हैं वंचित : बोकारो जिले के चास प्रखंड क्षेत्र में सबसे अधिक बच्चे ऑनलाइन शिक्षा से वंचित हैं. फिलहाल इस प्रखंड क्षेत्र में 34067 विद्यार्थियों के पास मोबाइल नहीं होने से ऑनलाइन शिक्षा नहीं मिल रही है. चास प्रखंड में वर्ग एक से वर्ग दस तक कुल नामांकित विद्यार्थियों की कुल नामांकित संख्या 45696 है. उनमें से सिर्फ 14629 विद्यार्थियों के पास ही मोबाइल होने से ऑनलाइन शिक्षा मिल रही है.

इसके बाद चंदनकियारी प्रखंड क्षेत्र आता है. इस प्रखंड क्षेत्र में भी 20496 विद्यार्थी ऑनलाइन शिक्षा से वंचित हैं. इस प्रखंड क्षेत्र में कुल नामांकित विद्यार्थियों की संख्या 28380 है. इसके बाद बेरमो सहित जिले के अन्य प्रखंड क्षेत्र आते हैं.

ऑनलाइन कितने बच्चों को शिक्षा

प्रखंड नामांकित छात्र ऑनलाइन शिक्षा

बेरमो 8925 3977

चंदनकियारी 28380 7884

चास 45696 4629

गोमिया 22745 8016

जरीडीह 12167 3624

कसमार 12775 3821

नावाडीह 18522 6459

पेटरवार 15201 5477

जिले में काफी बच्चे मोबाइल नहीं होने से ऑनलाइन शिक्षा नहीं ले पा रहे हैं. वंचित बच्चों को चिह्नित कर गली- मुहल्ला में ही शिक्षा चौपाल लगा कर शिक्षा देने पर विचार विभाग की ओर से किया जा रहा है. उम्मीद है कि शीघ्र इस योजना पर विभाग की ओर से अमल होगा.

विनोद कुमार, एपीओ,बोकारो

केस स्टडी -एक : चास प्रखंड क्षेत्र हरला निवासी माथुर चंद्र गोप का पुत्र करण चंद गोप हरला मध्य विद्यालय में वर्ग आठ का छात्र है. इस परिवार की आर्थिक स्थिति काफी खराब है. एंड्रायड फोन नहीं है. इस कारण श्री गोप का बेटा ऑनलाइन शिक्षा नहीं ले पा रहा है.

केस स्टडी -दो : चास के विवेकानंद पथ निवासी गोलू बाउरी दैनिक मजदूर है. उसका पुत्र जीत कुमार मुहल्ला के ही प्राथमिक विद्यालय हरिजन स्पेशल में वर्ग एक में अध्ययनरत है. इस परिवार के पास एंड्रायड मोबाइल नहीं है. फलत: इसके लिए ऑनलाइन शिक्षा एक सपना है.

केस स्टडी 03 : विवेकानंद पथ स्थित प्राथमिक विद्यालय हरिजन स्पेशल में वर्ग एक का छात्र बंजरग बाउरी ऑनलाइन शिक्षा नहीं ले पा रहा है. इसके पिता शीतल बाउरी मजदूर हैं. गरीबी के कारण इस परिवार के पास भी एंड्रायड मोबाइल नहीं है, इसलिए ऑनलाइन पढ़ाई से वंचित है.

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