केंद्र सरकार पर डीवीसी को तोड़ने के प्रयास का आरोप

Updated at : 21 Jul 2024 11:38 PM (IST)
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केंद्र सरकार पर डीवीसी को तोड़ने के प्रयास का आरोप

चंद्रपुरा में डीवीसी कर्मचारी संघ केंद्रीय कमेटी की बैठक

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चंद्रपुरा. डीवीसी अतिथि भवन चंद्रपुरा में रविवार को इंटक से संबद्ध डीवीसी कर्मचारी संघ केंद्रीय कमेटी की बैठक हुई. यूनियन मान्यता चुनाव सहित कई मामलों को लेकर चर्चा की गयी. संघ के केंद्रीय जेनरल सेक्रेटरी सुब्रतो मुखर्जी, बीटीपीएस के यूनिट सचिव सदन सिंह सहित तपन कुमार दास अरिंदम बनर्जी, मो मोईनुद्दीन मुख्य रूप से उपस्थित थे. श्री मुखर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार डीवीसी को तोड़ने व उसके एक्ट में छेड़छाड़ करने में लगी हुई है. पहले भी इसकी कोशिश हो चुकी है. मगर अधिकारियों व कर्मियों की एकता के कारण उस समय सफलता नहीं मिली थी. हाल में डीवीसी मुख्यालय कोलकाता आये ऊर्जा मंत्री ने डीवीसी को तीन हिस्सों में बांटने की बात कही है. सरकार चाहती है कि प्रोडक्शन व ट्रांसमिशन डीवीसी का रहे और डिस्ट्रीब्यूशन व ट्रांसमिशन से जो राजस्व आये उसे प्राइवेट कंपनियों को दे दिया जाये. ऐसा होने से डीवीसी आर्थिक रूप से पंगु हो जायेगी और राजस्व का पैसा नहीं मिलने का बहाना बना कर कंपनियां डीवीसी के उत्पादन को प्रभावित कर देगी. ऐसी स्थिति में सरकार को प्लांट पूंजीपतियों को देने में आसानी हो जायेगी. सदन सिंह ने कहा कि हमारी यूनियन डीवीसी चुनाव अकेले लड़ेगी या मिल कर, यह तय किया जायेगा. मेरा मानना है कि पिछली बार की तरह सीटू के साथ चुनाव नहीं लड़ा जाये, क्योंकि तय टर्म कंडीशन का पालन नहीं किया गया था. तपन दास ने कहा कि डीवीसी के एक्ट 1948 में छेड़छाड़ किया जा रहा है. यह समय आने पर प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी को बताया जायेगा. बैठक में मान्यता चुनाव अकेला लड़ा जाये या मिल कर, यह केंद्रीय अध्यक्ष को सौंंपा गया. अधिकतर लोग अकेले चुनाव लड़ने के पक्ष में दिखे. यह भी कहा गया कि मान्यता मिलने के बाद डीवीसी श्रमिक यूनियन (सीटू) प्रबंधन पर दबाव नहीं बना सकी और इसके कारण कई मामलों का निपटारा नहीं हो सका. यह भी कहा गया कि प्रबंधन के साथ जिन मामलों पर सहमति बनी, उसे कामगार संघ ने लागू नहीं होने दिया. दुर्गा पूजा के समय मिलने वाले एनुअल इंसेंटिव स्कीम (एआइएस) में समानता लाने की मांग की गयी. डीवीसी आवासीय कॉलोनी के क्वार्टरों में लगाये जाने वाले स्मार्ट मीटर को यूनियन से वार्ता करने के बाद लागू करने की मांग की गयी. नयी ट्रांसफर पॉलिसी बनाने की मांग भी उठी. बैठक में उमेश कुमार शर्मा, केएन सिंह, मदन मेहता, एसके मंडल, केके सिंह, सुरेश दास, दीपेन धांग, डी बनर्जी, राज कुमार रजक, जितेंद्र कुमार रजक, मो अनवर हुसैन, सहदेव सिंह, अमरेंद्र सिंह, अचिंतय कुमार दास, रवि रंजन सिंह, चतुरानंद सिंह, लक्ष्मण सिंह, दिलीप कुमार चौधरी, शिव शंकर मांझी, मोती लाल सिंह, हेमंत कुमार ठाकुर आदि थे.

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