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कूड़ा उठाने का शुल्क लेगा चास नगर निगम

By Prabhat Khabar Print Desk
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यूजर चार्ज : घर, होटल, धर्मशाला, रेस्तरां, स्कूल, अस्पतालों की दर अलग-अलग

चास : चास नगर निगम की ओर से अब कूड़ा-कचरा उठाव करने पर शुल्क वसूला जायेगा. घर-घर जाकर अब मुफ्त में कचरा नहीं लिया जायेगा. सफाई का ठेका लेने वाली कंपनी इनवैरो प्रालि चास (पेटी कांट्रेक्टर) की ओर से इसी माह से यूजर चार्ज लेने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. कंपनी तय अनुबंध के अनुसार निगम क्षेत्र के सभी 35 वार्डों से शुल्क वसूलेगी.

एजेंसी आवासीय भवन से लेकर ढाबा, धर्मशाला, रेस्तरां, कारखाना, सिनेमा हॉल, दुकान, गोदाम, सब्जी व फल दुकान, विभिन्न कार्यालयों, अस्पताल, स्कूल, कोचिंग संस्थान सहित शादी विवाह स्थल या उत्सव घर से भी शुल्क वसूल करेगी. सभी से शुल्क प्रत्येक महीने वसूल किया जायेगा. इस संबंध में अपर नगर आयुक्त शशि प्रकाश झा ने कहा कि निगम में स्वच्छता कार्य सुचारु रूप से चलाने के लिए निगम क्षेत्र के हर व्यक्ति को सहयोग करने की जरूरत है. लोग अपना-अपना कचरा संग्रह कर रखें, कचरा वाहन आते ही उसमें डाल दें. उन्होंने सूखा व गीला कचरा अलग-अलग रखने की अपील की है, ताकि इसका निष्पादन सही तरीके से किया जा सके.

अलग-अलग दर है निर्धारित

इनवैरो कंपनी के इंचार्ज सुजीत कुमार ने बताया कि रिहायशी और व्यावसायिक स्थलों के लिए मासिक शुल्क का अलग-अलग स्लैब बना है. झुग्गी-झोंपड़ियों से 20 रुपए शुल्क लिया जायेगा. उनमें आवासीय भवनों से 20 रुपये से लेकर 80 रुपये तक शुल्क लिया जायेगा. अस्पताल, डिस्पेंसरी, लेबोरेटरीज आदि से 400 रूपये से लेकर 20 हजार रूपये तक का शुल्क लिया जायेगा.

वहीं अपार्टमेंट के मामले में कुल फ्लैटों की संख्या एवं प्रकार के गुणक के आधर पर एकमुश्त वसूली संबंधित सोसायटी से वसूल किया जायेगा. चाहे अलग भवन में हो या किसी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में ही स्थित क्यों ना हो. वहीं ठेला, खोमचा, पान व चाय दुकान आदि से भी शुल्क वसूले जायेंगे.

पूर्व में कई वार्डों में वसूला जाता था शुल्क, लोगों का होता था विरोध : चास नगर निगम की ओर से इससे पूर्व में भी कचरा संग्रह करने के लिये कई वार्डों से शुल्क वसूला जाता था. लेकिन लोगों को जानकारी नहीं होने के कारण इसका विरोध भी होता था. वर्ष 2018 में चीराचास में शुल्क लिए जाने पर लोगों ने विरोध किया था और निगम कार्यालय में आकर शिकायत भी दर्ज करायी थी. इस दौरान लोगों ने स्थानीय पार्षद पर सफाई कार्य के लिए शुल्क लेने का आरोप लगाया था, जबकि शुल्क वसूल करने पर रसीद भी दी जाती थी.

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