ढोरी स्थित सामुदायिक भवन में रविवार को विस्थापित संघर्ष समन्वय समिति के तत्वावधान में विचार गोष्ठी आयोजित की गयी. अध्यक्षता धनेश्वर महतो व संचालन सूरज महतो ने किया. विस्थापित नेता काशीनाथ केवट ने कहा कि कोयला क्षेत्रों में विस्थापन की समस्या गंभीर होती जा रही है. विस्थापित परिवार पलायन को विवश हैं, लेकिन उनकी पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है. वर्ष 2026 को विस्थापितों के लिए नयी दिशा के साथ सशक्त जनसंघर्ष का वर्ष बनाया जाये.
मौके पर समिति की नयी कमेटी का गठन किया गया. इसमें काशीनाथ केवट अध्यक्ष तथा सूरज महतो को महासचिव चुने गये. महासचिव ने कहा कि कोयलांचल के विस्थापितों की समस्याओं पर प्रबंधन का रवैया लगातार उदासीन रहा है. विस्थापित नौकरी, मुआवजा और पुनर्वास की मांग को लेकर आंदोलन करते आ रहे हैं, लेकिन सीसीएल प्रबंधन द्वारा बार-बार वादाखिलाफी की गयी. समिति और प्रबंधन के बीच हुई कई वार्ताओं में तय बिंदुओं को लागू नहीं किया गया.भुवनेश्वर केवट ने कहा कि बेरमो कोयलांचल के विस्थापितों की लंबित मांगों को लेकर अब व्यापक, संगठित और निर्णायक आंदोलन की आवश्यकता है. नरेश महतो और अहमद अंसारी ने कहा कि दशकों से जारी कोयला खनन ने क्षेत्र की बहुमूल्य कृषि भूमि को उजाड़ दिया है और कारो जैसे जीवनदायिनी जंगल के विनाश का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है. मौके पर राम भजन लायक, नरेश महतो, लालमोहन यादव, गोपाल महतो, भागीरथ करमाली, नागेंद्र महतो, मंटू गिरि, कामेश्वर गिरि, नंदकिशोर महतो, चंदन पासवान, विकास महतो, श्यामनारायण, हरखलाल महतो, चंदन राम, चिंतामणि महतो, संदीप महतो, मितलाल महतो, जलेश्वर महतो, कालीपोदो गोराई, दीनदयाल यादव, महेंद्र कुमार शर्मा, त्रिलोक सिंह आदि उपस्थित थे.
पारित किये गये चार प्रस्ताव
विचार गोष्ठी में सर्वसम्मति से चार प्रस्ताव पारित किये गये. इसमें विस्थापन आयोग के गठन की घोषणा को अविलंब मूर्तरूप देने, वर्ष 2013 के आरएफसीटीएल एवं आरआर एक्ट के प्रावधानों के अनुसार चार गुना मुआवजे का भुगतान, डीआरएंडआरडी प्रोजेक्ट, अंगवाली और पिछरी कोलियरी को अविलंब चालू कर विस्थापितों को नौकरी, मुआवजा देने व पुनर्वास की व्यवस्था और कथारा प्रक्षेत्र के जारंगडीह व बीएंडके क्षेत्र की कारो, फेस-टू एवं कोनार परियोजनाओं के विस्थापितों की लंबित नौकरी और मुआवजे का तत्काल भुगतान की मांग शामिल है.
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