बोकारो : नहीं रहे लेखक पं. विद्यानंद झा, साहित्यकारों ने जताया शोक, मधुबनी जिला के थे निवासी

Updated at : 04 Dec 2023 12:44 AM (IST)
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बोकारो : नहीं रहे लेखक पं. विद्यानंद झा, साहित्यकारों ने जताया शोक, मधुबनी जिला के थे निवासी

पं झा राष्ट्रीय संस्कृत प्रसार परिषद् बोकारो के निदेशक भी रहे थे. पं विद्यानंद झा वर्ष 2012-14 तक विशेषज्ञ (हिंदी एवं मैथिली) संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, नयी दिल्ली व भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर (मानव संसाधन विकास मंत्रालय, उच्च शिक्षा विभाग, भारत सरकार) का दायित्व भी संभाल चुके थे.

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पूर्व प्रशासनिक अधिकारी व कई पुस्तकों के लेखक पंडित विद्यानंद झा के निधन पर बोकारो के साहित्यकारों ने शोक जताया है. वरिष्ठ साहित्यकार बुद्धिनाथ झा, तुला नंद मिश्र, विजय शंकर मल्लिक, कुमार मनीष अरविंद, भुटकुन झा, पं. उदय कुमार झा, डॉ संतोष कुमार झा, नीलम झा, साहित्यलोक के संयोजक अमन कुमार झा, राष्ट्रीय कवि संगम के बोकारो महानगर अध्यक्ष अरुण पाठक, राष्ट्रीय संस्कृत प्रसार परिषद, बोकारो के शशि भूषण त्रिपाठी, डॉ राकेश रंजन, प्रवीण झा ने शोक संवेदना व्यक्त की है. पं झा राष्ट्रीय संस्कृत प्रसार परिषद् बोकारो के निदेशक भी रहे थे. पं विद्यानंद झा वर्ष 2012-14 तक विशेषज्ञ (हिंदी एवं मैथिली) संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, नयी दिल्ली व भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर (मानव संसाधन विकास मंत्रालय, उच्च शिक्षा विभाग, भारत सरकार) का दायित्व भी संभाल चुके थे. कटक, ओड़िशा में 26 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा की देर रात में उन्होंने अंतिम सांस लीं. 27 नवंबर को जगन्नाथ पुरी के स्वर्ग द्वार में पंच तत्वों में विलीन हुए. उनकी पुत्री ममता मिश्रा ने जानकारी दी कि श्राद्ध कर्म के बाकी कार्यक्रम उनके पैतृक गांव मधुबनी जिला के विष्णुपुर में संपन्न होंगे.

पं. विद्यानंद झा का अधिकांश लेखन कार्य बोकारो में हुआ

बिहार के मधुबनी जिला के विष्णुपुर गांव के मूल निवासी पं विद्यानंद झा का अधिकांश लेखन कार्य बोकारो में रहकर हुआ. एक दशक पूर्व अपने दामाद वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी व सीआइएसएफ, बोकारो के तत्कालीन डीआइजी व वर्तमान में भुवनेश्वर में पदस्थापित आइजी विनयतोष मिश्र व सुपुत्री वरीय अधिवक्ता ममता मिश्रा के साथ बोकारो में रहकर पंडित झा ने कई पुस्तकें लिखीं.

हिंदी और मैथिली में लगभग एक दर्जन पुस्तकें प्रकाशित 

पंडित विद्यानंद झा ने बिहार सरकार में संयुक्त सचिव के पद से सेवानिवृत्ति के बाद हिंदी और मैथिली में लगभग एक दर्जन पुस्तकें लिखीं. इनकी प्रकाशित पुस्तकों में मिथिला सरोज रत्नावली, सांख्यदर्शन कौमुदी, गायत्री तत्व प्रकाश, ममता गाबए मिथिलाक गीत, भारत का संविधान : एक विश्लेषण, सिद्घपीठ भदुली भद्रकाली, कपिलमुनि आ हुनक दर्शन, नवग्रहमाहात्म्य व ग्रह शांति, प्राचीन भारत की आदर्श नारियां, आधुनिक भारत की वीरांगनायें, भारत रत्न से अलंकृत विभूतियां, परमवीर चक्र : शौर्य की अनुपम गाथा आदि शामिल हैं. पुस्तक लेखन के लिए इन्हें कई सम्मानों से नवाजा गया था.

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