बोकारो, सेक्टर पांच स्थित श्री अयप्पा मंदिर में मकर संक्रांति के अवसर पर बुधवार को विशेष पूजन व शोभा यात्रा निकाली गयी. इस आध्यात्मिक आयोजन में मुख्य रूप से डीसी शामिल हुए. डीसी ने कहा कि जब व्यक्तिगत साधना सार्वजनिक स्वरूप लेती है, तब वह समाज में शांति, सद्भाव और भाईचारे की मजबूत नींव रखती है. अयप्पा की परंपरा हमें जोड़ने, सहनशील बनने और एक-दूसरे के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने की प्रेरणा देती है. शोभा यात्रा में नंगे पांव, सरल वेश और संयमित आचरण के साथ चल रहे श्रद्धालु यह संदेश दे रहे थे कि सच्ची भक्ति दिखावे से नहीं, बल्कि आत्मनियंत्रण और शुद्ध जीवन मूल्यों से जुड़ी होती है. स्वामीये शरणम अयप्पा…का उद्घोष समानता और समरसता का प्रतीक है, जहां जाति, वर्ग, भाषा और क्षेत्र के सभी भेद मिट जाते हैं और हर भक्त केवल एक पहचान रखता है. श्री अयप्पा पब्लिक स्कूल के कमेटी के महासचिव शशि करात ने कहा कि अयप्पा की शोभा यात्रा हमारी सांस्कृतिक विरासत में विविधता में एकता का सुंदर उदाहरण है, जो यह सिद्ध करती है कि आस्था समाज को विभाजित नहीं, बल्कि एक सूत्र में पिरोने का कार्य करती है. प्राचार्या पी शैलजा जयकुमार सहित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, मंदिर समिति के सदस्य व स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे.
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