Bokaro News : भक्ति पथ नहीं बल्कि, लक्ष्य है: आचार्य विश्वदेवानंद
Published by : ANAND KUMAR UPADHYAY Updated At : 31 Dec 2025 9:47 PM
Bokaro News : आनंद मार्ग प्रचारक संघ के धर्म महासम्मेलन के दूसरे दिन भक्ति पर हुई चर्चा.
बोकारो, आनंद मार्ग प्रचारक संघ की ओर से आनंद नगर में आयाेजित धर्म महासम्मेलन के दूसरे दिन बुधवार को भक्ति पर चर्चा हुई. संघ के पुरोधा प्रमुख आचार्य विश्वदेवानंद अवधूत ने कहा कि राधाभक्ति का चरम भाव है प्रभु! तुम सिर्फ मेरे हो और मेरे होकर ही रहोगे. आचार्य ने कहा कि भक्ति पथ नहीं बल्कि, लक्ष्य है. जीवन की श्रेष्ठ अनुभूति भक्ति की है. ज्ञान व कर्म मार्ग से मनुष्य भक्ति में प्रतिष्ठित होते हैं. भक्ति मिल गया, तो सब कुछ मिल जाता है. आचार्य ने भक्ति की अवस्थाओं के भेद विषय पर कहा कि भक्ति अनेक रूपों में अभिव्यक्त होती है. इसका मूल है श्रद्धा. वहीं श्रद्धा का आधार है प्रेम. प्रेम का अर्थ अखंड सत्ता के प्रति आकर्षण होता है. आचार्य विश्वदेवानंद ने कहा कि यदि हम प्रेम नहीं करते, तो श्रद्धा भी नहीं हो सकती. भक्ति की दूसरी अवस्था में भक्त का प्रेम तीव्र हो जाता है. जैसे मनुष्य इंद्रिय सुख के लिए अनेक जोखिम उठाता है, वैसे ही सच्चे भक्त को परमपुरुष के प्रति तीव्र प्रेम रखना चाहिए. अन्यथा मन विषय-रस में डूब जाता है. आचार्य ने कहा कि प्रेम की तीसरी अवस्था है विरह. अर्थात, परमपुरुष के अभाव में जो पीड़ा उत्पन्न होती है, वही विरह है. भगवान ही प्रेमपद व साधक प्रेमी है. जब प्रेमी परम प्रेमपद को पा लेता है, तब वह स्वयं भी प्रेममय हो जाता है. आचार्य ने कहा कि प्रेम की चौथी अवस्था है राधाभक्ति. यानी जब जीव का चित्त सभी विषयों से हटकर केवल परमपुरुष की ओर केंद्रित हो जाता है. मौके पर झारखंड समेत विभिन्न राज्यों से आये दर्जनों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे.
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