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Bokaro News : बोकारो को बाल विवाह मुक्त बनाने का आह्वान

Bokaro News : पुस्तकालय मैदान में सुरक्षित व सशक्त झारखंड के लिए कार्यशाला आयोजित, बोले उपायुक्त : बेटियों के जन्म को बोझ नहीं, बल्कि उत्सव की तरह मनाया जाना चाहिए.

बोकारो, बेटियां केवल विवाह के लिए नहीं बनी हैं, बल्कि देश की सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है. बेटियों के जन्म को बोझ नहीं, बल्कि उत्सव की तरह मनाया जाना चाहिए. जिस घर में बेटी का जन्म हो, वहां अवश्य जायें. उपहार दें और गर्व के साथ कहें कि बधाई हो, बेटी हुई है. यह बातें शुक्रवार को डीसी अजयनाथ झा ने कही. वह पुस्तकालय मैदान-सेक्टर 05 में सुरक्षित व सशक्त झारखंड के लिए आयोजित अनुमंडल स्तरीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे. डीसी ने बताया कि गोमिया प्रखंड बाल विवाह मुक्त प्रखंड बन चुका है. इसी तर्ज पर पूरे जिला को बाल विवाह मुक्त बनाना है. लोगों ने बाल विवाह के खिलाफ समाज में सक्रिय भूमिका निभाने की शपथ ली.

सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ हों एकजुट

उपायुक्त ने कहा कि बाल विवाह व डायन जैसी कुरीतियां समाज के विकास में सबसे बड़ी बाधा हैं. इसे समाप्त करने के लिए समाज के हर वर्ग को जागरूक व सक्रिय होना होगा. बेटियों के प्रति सोच में बदलाव लाना समय की मांग व जरूरत है. महिला का शृंगार, पहनावा व जीवनशैली उसकी अभिव्यक्ति है. इसे तय करने का अधिकार भी उसकी ही होनी चाहिए. महिलाएं पुरुषों पर निर्भरता छोड़कर आत्मनिर्भर बनें. निर्णय लेने की क्षमता विकसित करें.

पंचायत स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम की जरूरत : जिप अध्यक्ष

जिला परिषद अध्यक्ष सुनीता देवी ने कहा कि बाल विवाह समाज की गंभीर समस्या है, जिसका दुष्प्रभाव बेटियों के जीवन पर पड़ता है. बाल विवाह के कारण बेटियां शिक्षा से वंचित हो जाती है. स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है. भविष्य असुरक्षित हो जाता है. इसे रोकने के लिए पंचायत स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम होना चाहिए. उन्होंने सभी पंचायत प्रतिनिधि, सहिया, आंगनबाड़ी सेविका, स्वयं सहायता समूह व ग्रामीण महिलाओं से आह्वान किया कि लोगों को जागरूक करें, ताकि बाल विवाह जैसी कुप्रथा को प्रभावी रूप से रोका जा सकता है.

बेटा-बेटी में कोई अंतर नहीं, कुप्रथा को समाप्त करना जरूरी : डीडीसी

डीडीसी शताब्दी मजूमदार ने कहा कि बेटा व बेटी में कोई फर्क नहीं है. प्रो-एक्टिव होकर आसपास होने वाले बाल विवाह को रोकना होगा. यह केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि समाज की नैतिक जिम्मेदारी है. उन्होंने बताया कि अभी हर पांच विवाह में एक बाल विवाह हो रहा है, पूरे विश्व में भारत ऐसे मामलों में टॉपर है. इसे बॉटम से टॉपर श्रेणी में लाना है. कुप्रथा को समाप्त करने के लिए इच्छाशक्ति को जागृत करें. इस तरह के किसी भी मामले की सूचना तुरंत आंगनबाड़ी सेविका – सहायिका, बाल विवाह निषेध पदाधिकारी, थाना प्रभारी, या किसी भी सरकारी कर्मी को दें.

सूचना तंत्र के उपयोग करने की अपील

जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सुमन गुप्ता ने बाल विवाह व डायन कुप्रथा से संबंधित कानूनी प्रावधान की जानकारी दी. कहा कि ऐसी किसी भी घटना की सूचना डायल 112/100 अथवा चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर दें, ताकि समय रहते प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके. उन्होंने बताया कि प्रमंडल – जिला – प्रखंड व पंचायत स्तर पर बाल विवाह निषेध पदाधिकारी घोषित है. उन्होंने बेटियों के लिए केंद्र व राज्य सरकार की ओर से संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी.

जागरूकता से ही होगा सुरक्षित व सशक्त झारखंड का निर्माण

सहायक निदेशक सुमन सिंह ने महिलाओं व बच्चों से संबंधित कानून, सरकारी योजना, सुरक्षा उपाय व शिकायत निवारण तंत्र की जानकारी दी. संदेश दिया गया कि सामाजिक बदलाव केवल कानून से नहीं, बल्कि जनभागीदारी व जागरूकता से संभव है. बेटियों को सम्मान, सुरक्षा व समान अवसर देकर ही सुरक्षित व सशक्त झारखंड का निर्माण किया जा सकता है. जिला शिक्षा अधीक्षक अतुल चौबे, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी रवि कुमार, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी अविनाश कुमार सिंह, डीपीएम जेएसएलपीएस, अनुमंडल क्षेत्र के मुखिया, पंचायत सचिव, संबंधित विभागों के पदाधिकारी, कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की बच्चियां व अन्य मौजूद थे.

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