बोकारो में दिल दहला देने वाला मामला, 15 माह तक घर में बंद रहे मां-बेटा, पुलिस ने कराया आजाद
Published by : Sameer Oraon Updated At : 13 Oct 2025 9:36 PM
पुलिस के साथ मां-बेटा जो 15 माह से एक कमरे में बंद थे, Pic Credit- Prabhat Khabar
Bokaro Crime News: बोकारो से दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. बीएसएल के एक खाली आवास में 15 माह से मां और बेटा कैद थे. पुलिस ने ताला तोड़कर दोनों को मुक्त कराया. मामला एक राजनीतिक व्यक्ति से जुड़ा बताया जा रहा है. पुलिस मामले की जांच जारी है.
Bokaro Crime News, बोकारो : बोकारो जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. सेक्टर छह डी आवास संख्या 2517 में पिछले 15 माह से एक मां और उसका बेटा कैद थे. सोमवार को पुलिस ने दोनों को मुक्त कराया. बताया जा रहा है कि यह खाली पड़ा बीएसएल आवास था, जिसमें मां-बेटे को बंद रखा गया था.
मां-बेटा बिहार के रहने वाले हैं
घटना की जानकारी मिलते ही सेक्टर छह थाना प्रभारी इंस्पेक्टर संगीता कुमारी टीम के साथ मौके पर पहुंचीं. उन्होंने चास थाना से सत्यापन कराया, तो पता चला कि वंशीडीह से 15 माह पहले एक महिला और एक पुरुष लापता हैं. पुष्टि होते ही पुलिस ने बढ़ई बुलाकर ताला कटवाया और मां-बेटे को कैद से मुक्त कराया. मां और बेटे की पहचान सीता देवी (70 वर्ष) और संतोष कुमार (45 वर्ष) के रूप में हुई है. दोनों मूल रूप से बिहार के शेखपुरा जिला के रहने वाले हैं. इनका स्थायी आवास चास थाना क्षेत्र के तारानगर वंशीडीह में है.
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कैसे हुआ खुलासा
पुलिस की कार्रवाई के बाद इलाके में सनसनी फैल गई. ब्लॉक के पास और आसपास के लोगों की भीड़ जुट गई. पड़ोसियों को भी इस बात की भनक नहीं थी कि इतने लंबे समय से मां-बेटा पास के ही मकान में बंद हैं. संतोष कुमार ने बताया कि एक राजनीतिक पार्टी से जुड़े अशोक सिंह ने उन्हें कैद कर रखा था.
अशोक ने की थी आर्थिक मदद, फिर बनाने लगा दबाव
संतोष ने बताया, “हमारे परिवार का एक केस न्यायालय में चल रहा था. उसी दौरान एक अधिवक्ता के माध्यम से अशोक सिंह से जान-पहचान हुई. उन्होंने आर्थिक मदद की थी. बाद में वह संपत्ति बेचकर पैसा लौटाने का दबाव बनाने लगे. कई बार मारपीट भी की. लगभग 15 माह पहले वह हमें बाइक से सेक्टर छह डी आवास में लेकर आए, यह कहकर कि संपत्ति से जुड़ा काम है. इसके बाद गेट में ताला लगाकर हमें कैद कर दिया.”
राशन खत्म होते ही पड़ोसियों से मांगकर खाना खाते थे
संतोष ने बताया कि घर के अंदर खाना बनाने के लिए चावल और आटा दिया गया था. राशन खत्म होने पर वे खिड़की से पड़ोसियों से मांगकर खाते थे. एक दिन उनकी मां बालकनी में खड़ी थीं, तभी एक परिचित वहां से गुजर रहे थे. मां ने मदद की गुहार लगाई, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा.
पुलिस ने शुरू की जांच
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. इंस्पेक्टर संगीता कुमारी ने कहा कि “मामला संज्ञान में आते ही वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया गया. सत्यापन के बाद मां और पुत्र को कैद से मुक्त कराया गया. मामला संगीन है, आगे की जांच की जा रही है.” वहीं, बोकारो के एसपी हरविंदर सिंह ने कहा, “थाना प्रभारी को जांच के आदेश दिए गए हैं. दोषियों की पहचान कर उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाएगा.”
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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.
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