बोकारो के असनापानी गांव में आज तक नहीं पहुंची मूलभूत सुविधा, बिजली और सड़क को तरसते ग्रामीण, नहीं ले रहा कोई सुध
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 20 May 2021 4:01 PM
Jharkhand News (ललपनिया, बोकारो) : झारखंड के बोकारो जिला अंतर्गत गोमिया प्रखंड का एक गांव है असनापानी. सिंयारी पंचायत के उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र जिनगा पहाड़ में बसा संताल बहुल इस गांव में आज तक बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. झारखंड निर्माण के 21 साल बाद भी इस गांव में बिजली नहीं पहुंची है. वहीं, गांव में आवागमन के लिए सड़क भी नहीं है. जंगली व पगडंडी के सहारे आज भी आवागमन करने को विवश हैं ग्रामीण.
Jharkhand News (नागेश्वर, ललपनिया, बोकारो) : झारखंड के बोकारो जिला अंतर्गत गोमिया प्रखंड का एक गांव है असनापानी. सिंयारी पंचायत के उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र जिनगा पहाड़ में बसा संताल बहुल इस गांव में आज तक बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. झारखंड निर्माण के 21 साल बाद भी इस गांव में बिजली नहीं पहुंची है. वहीं, गांव में आवागमन के लिए सड़क भी नहीं है. जंगली व पगडंडी के सहारे आज भी आवागमन करने को विवश हैं ग्रामीण.
जिनगा पहाड़ का संताल बहुल गांव असना पानी में विकास के नाम पर पंचायत से सिर्फ एक डाडी और एक चबूतरा का निर्माण किया गया है. वहीं, मनरेगा से एक कूप तथा दो ग्रामीणों को प्रधानमंत्री आवास मिला है. इस गांव में मनरेगा योजना नहीं के बराबर है. गांव में जो विकास होनी चाहिए वो अपेक्षित नहीं हो पाया है.
भले ही इस गांव के नाम में पानी का जिक्र है, लेकिन ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल आज तक नसीब नहीं हुई है. आज भी ग्रामीण डाडी से पानी लाकर अपनी जरूरत को पूरा करते हैं. यहां के अधिकांश युवक रोजगार के लिए पलायन कर हैं .
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असनापानी गांव में ग्रामीण 5 किलोमीटर की दूरी तय कर डुमरी से पीडीएस डीलर से सामन लाते थे, लेकिन बिरहोर डेरा मे एक युवक को लाइसेंस मिल जाने से अब तीन किलोमीटर की दूरी तय कर सामान लाते हैं. सामाजिक कार्यकर्ता रामेश्वर मांझी का कहना है कि असनापानी के निकट कासीटाड व बिरहोर डेरा गांव है. इन सभी गांवों में भी आवागमन के लिए सड़क नहीं बनी है.
असनापानी गांव के ग्रामीण आज भी कोविड -19 से बेखबर हैं. बुखार लगने पर जंगली दवा का ही सेवन करते हैं. ग्रामीण जब काफी बीमार पड़ते हैं, तो उन्हें 5 किलोमीटर दूर खाट में टांग कर डुमरी ले जाते हैं. गांव में लगभग 15 घर है. वहां की आबादी करीब 150 के आसपास है.
हालांकि, इस गांव में राहत की बात है कि अब तक कोरोना संक्रमण ने दस्तक नहीं दी है. बीडीओ कपिल कुमार ने कहा कि असनापानी गांव में जो विकास होनी चाहिए, वो सड़क के अभाव में नहीं हो पाया है. इस संबंध में बीडीओ ने जेई को सड़क निर्माण की बात कही है.
इधर, असनापानी गांव के ग्रामीण लेदो मांझी, मोतीलाल बेसरा, महावीर बेसरा, भादो बेसरा, तालो सोरेन, बहराम सोरेन, शनिचरवा मरांडी, बहुवचंद मरांडी, सेरेन मरांडी, राजेश बेसरा, सुनिल मरांडी, अनिल मरांडी ने जिला प्रशासन से गांव में बिजली, पानी, सड़क समेत अन्य मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि इस गांव के ग्रामीण भी सरकार की विकास योजनाओं का लाभ उठा सके.
Posted By : Samir Ranjan.
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